नई दिल्ली: साल 2026 के ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण’ में लखनऊ ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ देश का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शहर बनकर सामने आया है। वहीं, लंबे समय से वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को इस सर्वेक्षण में 21वां स्थान मिला है। केंद्र सरकार के नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत किए गए इस वार्षिक आकलन में देश के 130 शहरों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए प्रयासों और उनके प्रदर्शन के आधार पर रैंकिंग दी गई है। कई बड़े शहरों से आगे निकला दिल्ली दिल्ली का 21वें स्थान पर रहना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राजधानी में खासकर सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण गंभीर स्तर तक पहुंच जाता है। हालांकि, ताजा आंकड़ों में प्रदूषण नियंत्रण और PM10 के स्तर में सुधार के संकेत मिले हैं।
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की रैंकिंग में:
- लखनऊ सबसे ऊपर रहा।
- दिल्ली को 21वां स्थान मिला।
- श्रीनगर 26वें स्थान पर रहा।
- मुंबई को 28वां स्थान मिला।
- बेंगलुरु 32वें स्थान पर रहा।
- वाराणसी 34वें स्थान पर रहा।
वहीं, इस श्रेणी के सबसे निचले पांच शहरों में चेन्नई, जमशेदपुर, कोटा, कोलकाता और मदुरै शामिल रहे।
पराली, वाहनों और धूल से जूझती है दिल्ली
दिल्ली की हवा खराब होने के पीछे कई प्रमुख कारण माने जाते हैं। इनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल तथा सर्दियों में आसपास के राज्यों में पराली जलाने से उठने वाला धुआं प्रमुख हैं। इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों और PM10 के स्तर में सुधार के कारण राजधानी की स्थिति में कुछ सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए हैं।
3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों में राउरकेला नंबर-1
3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों की श्रेणी में ओडिशा का राउरकेला सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला शहर रहा। इसके बाद फिरोजाबाद का स्थान रहा।
इस श्रेणी में:
- राउरकेला पहले स्थान पर रहा।
- फिरोजाबाद दूसरे स्थान पर रहा।
- नोएडा को 8वां स्थान मिला।
- देहरादून 12वें स्थान पर रहा।
- गया को 35वां स्थान मिला।
छोटे शहरों में कलिंग नगर सबसे आगे
3 लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में ओडिशा का कलिंग नगर शीर्ष पर रहा। वहीं, मेघालय का बायर्नीहाट इस श्रेणी में सबसे निचले स्थान पर रहा। इससे साफ है कि वायु प्रदूषण से निपटने की चुनौती केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और तेजी से विकसित हो रहे शहरों में भी प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण की जरूरत है।
किन आधारों पर होती है शहरों की रैंकिंग?
‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण’ में शहरों द्वारा वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किए जा रहे विभिन्न उपायों का आकलन किया जाता है।
इसमें मुख्य रूप से:
- सड़क की धूल को नियंत्रित करने के उपाय
- ठोस कचरा प्रबंधन
- वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण
- औद्योगिक प्रदूषण की रोकथाम
- निर्माण और विध्वंस से निकलने वाले कचरे का प्रबंधन
- डीजल जनरेटर से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना
- व्यावसायिक संस्थानों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण
- जन-जागरूकता अभियान
जैसे मानकों को शामिल किया जाता है।
शहरों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कई स्तरों पर किया जाता है। इसमें सिटी लेवल असेसमेंट, राज्य स्तरीय समितियों की जांच, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का आकलन और स्वतंत्र फील्ड वेरिफिकेशन शामिल होता है।
108 शहरों में PM10 के स्तर में कमी
नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के आंकड़ों के अनुसार 130 में से 108 शहरों में 2017-18 के बेसलाइन की तुलना में 2025-26 में PM10 की मात्रा में कमी दर्ज की गई।
इनमें:
- 72 शहरों ने PM10 में 20 प्रतिशत से अधिक कमी हासिल की।
- 26 शहरों में PM10 की मात्रा में 40 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई।
PM10 हवा में मौजूद बेहद छोटे कणों का एक प्रमुख प्रदूषक है, जिसका लंबे समय तक अधिक स्तर पर संपर्क स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
NCAP के तहत 16,425 करोड़ रुपये का आवंटन
केंद्र सरकार ने शहरों में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए NCAP के तहत 16,425 करोड़ रुपये परफॉर्मेंस-लिंक्ड ग्रांट के रूप में आवंटित किए हैं। इस राशि का इस्तेमाल शहरों में सड़क की धूल पर नियंत्रण, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण निगरानी, हरित क्षेत्र बढ़ाने और अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपायों को मजबूत करने में किया जा रहा है।
लखनऊ की सफलता से दूसरे शहरों को भी उम्मीद
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में लखनऊ का शीर्ष स्थान हासिल करना इस बात का संकेत है कि बड़े शहरों में भी लगातार और योजनाबद्ध तरीके से प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास किए जाएं तो बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। हालांकि, दिल्ली समेत कई बड़े शहरों के सामने अभी भी चुनौती बड़ी है। खासकर सर्दियों में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए वाहनों के उत्सर्जन, धूल, औद्योगिक प्रदूषण और क्षेत्रीय प्रदूषण स्रोतों पर एक साथ काम करने की जरूरत होगी। कुल मिलाकर, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की यह रैंकिंग शहरों के लिए केवल पुरस्कार या प्रतिस्पर्धा का विषय नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा और बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।