नई दिल्ली - आज के समय में लंबे समय तक बैठकर काम करना लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। ऑफिस या घर से काम करने के दौरान कई लोग लगातार 9 से 10 घंटे तक बैठे रहते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने और शारीरिक गतिविधि कम होने से शरीर पर धीरे-धीरे नकारात्मक असर पड़ सकता है और कई लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
विश्व फिजियोथेरेपी दिवस 2026 के मौके पर विशेषज्ञों ने लोगों को नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी। विशेषज्ञों के मुताबिक, सही तरीके से की गई फिजियोथेरेपी और नियमित एक्सरसाइज शरीर को सक्रिय रखने के साथ-साथ हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है।
स्ट्रोक के बाद रिकवरी में मददगार फिजियोथेरेपी
स्ट्रोक के बाद कई लोगों को हाथ-पैर में कमजोरी, चलने में परेशानी, संतुलन बनाने में दिक्कत या रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ की निगरानी में फिजियोथेरेपी रिहैबिलिटेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। व्यक्ति की स्थिति के अनुसार तैयार किया गया एक्सरसाइज और मूवमेंट प्लान मांसपेशियों की ताकत, संतुलन और चलने-फिरने की क्षमता को बेहतर करने में मदद कर सकता है।
घुटने और कूल्हे के दर्द में भी जरूरी मूवमेंट
घुटने या कूल्हे के दर्द के कारण लोग अक्सर शारीरिक गतिविधि कम कर देते हैं। हालांकि, लंबे समय तक निष्क्रिय रहना समस्या को और बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, उचित एक्सरसाइज और नियंत्रित मूवमेंट शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। लेकिन दर्द या किसी बीमारी की स्थिति में हर व्यक्ति के लिए एक जैसी एक्सरसाइज सही नहीं होती। इसलिए जरूरत के अनुसार फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेकर व्यायाम करना बेहतर माना जाता है।
लगातार घंटों तक न बैठे रहें
विशेषज्ञों की सलाह है कि काम के दौरान लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना चाहिए। बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलना, शरीर को हल्का स्ट्रेच करना और रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि करना उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा नियमित स्ट्रेंथ एक्सरसाइज को भी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को दर्द, कमजोरी, चलने या संतुलन से जुड़ी समस्या है, तो अपने स्तर पर एक्सरसाइज शुरू करने के बजाय विशेषज्ञ से व्यक्तिगत एक्सरसाइज प्लान लेना बेहतर है।
फिजियोथेरेपी सिर्फ दर्द तक सीमित नहीं
फिजियोथेरेपी को अक्सर केवल कमर, घुटने या कंधे के दर्द से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका दायरा इससे कहीं व्यापक है। चोट, स्ट्रोक या अन्य शारीरिक समस्याओं के बाद मूवमेंट और कार्यक्षमता को बेहतर करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। विश्व फिजियोथेरेपी दिवस का उद्देश्य भी लोगों को शारीरिक सक्रियता और बेहतर मूवमेंट के महत्व के प्रति जागरूक करना है। हालांकि, किसी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या में व्यायाम और फिजियोथेरेपी का तरीका व्यक्ति की स्थिति के अनुसार तय किया जाना चाहिए।