भोपाल, 8 सितंबर 2026 | भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर पुलिस द्वारा वाटर कैनन के इस्तेमाल का मामला अब जांच के दायरे में आ गया है। मामले में उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने संज्ञान लिया है। इसके बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए जोन-2 के पुलिस उपायुक्त विकास सहवाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जांच अधिकारी को सभी संबंधित पक्षों के बयान लेकर जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

हमीदिया अस्पताल गेट पर चला था Water Cannon
सोमवार को हमीदिया अस्पताल के इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने निकले थे। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई थी। इंटर्न डॉक्टरों ने पुलिस पर बल प्रयोग का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड पार करने के बाद हालात नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।
DCP विकास सहवाल करेंगे पूरे मामले की जांच
पुलिस कमिश्नर ने निष्पक्ष जांच के लिए DCP जोन-2 विकास सहवाल को जिम्मेदारी सौंपी है। जांच में यह देखा जाएगा कि वाटर कैनन का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया गया, पुलिस की कार्रवाई तय प्रक्रिया के मुताबिक थी या नहीं और प्रदर्शनकारियों के आरोपों में कितनी सच्चाई है। जांच अधिकारी सभी पक्षों का बयान दर्ज करने के बाद अपनी रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर को सौंपेंगे।
डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ला ने लिया संज्ञान
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग संभाल रहे डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ला ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है। इसके बाद पुलिस प्रशासन की ओर से जांच की प्रक्रिया शुरू की गई। सरकार की नजर अब एक तरफ इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड संबंधी मांग पर है, तो दूसरी तरफ प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं।
₹14,337 से ₹30 हजार स्टाइपेंड की मांग
इंटर्न डॉक्टरों को फिलहाल करीब ₹14,337 प्रति माह स्टाइपेंड मिलने की जानकारी है। प्रदर्शनकारी इसे बढ़ाकर कम से कम ₹30 हजार प्रति माह करने की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पहले उन्हें इस मुद्दे पर निर्णय का आश्वासन मिला था, लेकिन लिखित आदेश जारी नहीं हुआ। इसी मांग को लेकर सोमवार को आंदोलन तेज हुआ और मंगलवार तक डॉक्टरों का विरोध जारी रहा।
मंगलवार को OPD-OT का बहिष्कार
वाटर कैनन और कथित पुलिस बल प्रयोग के विरोध में इंटर्न डॉक्टर रातभर कमला पार्क क्षेत्र में डटे रहे। मंगलवार को हमीदिया अस्पताल की नियमित OPD और elective OT सेवाओं का भी बहिष्कार किया गया, हालांकि Emergency Services जारी रखी गईं। इस आंदोलन का असर भोपाल के यातायात और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई दिया। कमला पार्क से हमीदिया अस्पताल और आसपास के इलाकों में लंबा जाम लगा।
डॉक्टरों ने बढ़ाईं मांगें
पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी डॉक्टर अब केवल स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने घायल साथियों के लिए मुआवजा, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और पुलिस से माफी जैसी मांगें भी उठाई हैं। ऐसे में सरकार के सामने अब स्टाइपेंड विवाद के साथ पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवालों का समाधान करना भी चुनौती बन गया है।
जांच रिपोर्ट के बाद साफ होगी तस्वीर
DCP विकास सहवाल की जांच में पुलिस अधिकारियों, प्रदर्शनकारी डॉक्टरों और मौके पर मौजूद अन्य लोगों के बयान लिए जाने की संभावना है। वीडियो फुटेज और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों को भी देखा जा सकता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वाटर कैनन और अन्य पुलिस कार्रवाई में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं।