भारत में हवाई सफर करने वाले यात्रियों की चिंता बढ़ सकती है। एयरलाइंस ने सितंबर 2026 के शेड्यूल में उड़ानों और सीटों की संख्या में कटौती की है। एविएशन डेटा कंपनी OAG के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में भारतीय एयरलाइंस ने कुल करीब 2.27 करोड़ सीटें शेड्यूल की हैं, जबकि सितंबर 2025 में यह आंकड़ा करीब 2.38 करोड़ था। यानी एक साल में कुल सीट क्षमता में लगभग 4.5 फीसदी की कमी आई है। खास बात यह है कि सीटों में यह गिरावट लगातार तीसरे महीने देखने को मिली है। घरेलू उड़ानों पर इसका असर ज्यादा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर एयरलाइंस ने क्षमता घटाना जारी रखा और यात्रियों की मांग बनी रही, तो क्या आने वाले दिनों में Flight Ticket Price और बढ़ सकता है?
घरेलू उड़ानों में 5.6 फीसदी सीटें कम
OAG के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में घरेलू उड़ानों के लिए करीब 1.5 करोड़ सीटें उपलब्ध हैं। पिछले साल की तुलना में इसमें 5.6 फीसदी की कमी हुई है। वहीं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भी क्षमता कम हुई है। सितंबर में इंटरनेशनल फ्लाइट्स के लिए करीब 77 लाख सीटें शेड्यूल हैं, जो पिछले साल की तुलना में 2.1 फीसदी कम हैं। यानी कुल गिरावट में सबसे बड़ा योगदान घरेलू विमानन क्षमता में कमी का है।
सीटें कम होने से टिकट महंगा होने का खतरा क्यों?
एयरलाइन किसी रूट पर जितनी सीटें उपलब्ध कराती है, उसका सीधा संबंध टिकट के किराए से होता है। अगर किसी रूट पर सीटें कम हो जाएं और यात्रियों की मांग बनी रहे, तो उपलब्ध सीटों पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में एयरलाइंस किराया बढ़ा सकती हैं। इसके संकेत पहले से दिखाई दे रहे हैं। DGCA के आंकड़ों के मुताबिक, 72 प्रमुख घरेलू रूट पर मार्च 2025 से जून 2026 के बीच औसत हवाई किराया करीब 20.5 फीसदी बढ़ा है। जुलाई में घरेलू उड़ानों की 83.1 फीसदी सीटें भरी थीं, जबकि पिछले साल जुलाई में लोड फैक्टर 82.9 फीसदी था। यानी क्षमता घटने के बावजूद विमानों में सीटें भरने की दर लगभग स्थिर रही।
IndiGo की सीटें भी घटीं
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo ने भी सितंबर के लिए अपनी सीट क्षमता घटाई है। सितंबर में उसकी सीटें करीब 4.5 फीसदी घटकर 1.12 करोड़ रह गईं। यानी एक साल की तुलना में लगभग 5.25 लाख सीटों की कमी हुई। वहीं Air India की सितंबर क्षमता में 8.8 फीसदी की गिरावट आई है और सीटों की संख्या करीब 32.2 लाख रही। Air India Express की सीटें भी 2.6 फीसदी घटकर करीब 25.4 लाख रह गईं। हालांकि अगस्त में इसकी सीट क्षमता में 8.4 फीसदी की गिरावट आई थी, इसलिए सितंबर में कमी की दर कुछ कम हुई है।
आखिर एयरलाइंस उड़ानें क्यों घटा रही हैं?
एयरलाइंस की क्षमता में कमी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें पश्चिम एशिया में तनाव, हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध, महंगा ATF और विमानों की उपलब्धता की समस्या प्रमुख हैं। मार्च 2026 में ईरान का हवाई क्षेत्र बंद होने के बाद कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अपने मार्ग बदलने पड़े। जून में ईरान ने पूर्वी हिस्से को कुछ उड़ानों के लिए खोला, लेकिन पश्चिमी हिस्सा अब भी प्रतिबंधों के दायरे में रहा। यूरोपीय विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) ने भी ईरान के ऊपर उड़ान को लेकर अपनी एयरलाइंस को सुरक्षा सलाह जारी की है। इसके अलावा इराक, लेबनान, बहरीन, कुवैत, कतर और UAE के हवाई क्षेत्र को लेकर भी सुरक्षा संबंधी परिस्थितियां बनी हुई हैं।
भारतीय विमानों के लिए पाकिस्तान एयरस्पेस भी बंद
भारतीय एयरलाइंस के लिए पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र बंद होने से भी कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। रूट लंबा होने का मतलब है कि विमान को अधिक समय तक उड़ना पड़ता है और ईंधन की खपत भी बढ़ती है। इससे एयरलाइंस की परिचालन लागत पर दबाव बढ़ता है और कुछ रूट पर उड़ानों की संख्या घटाना आर्थिक रूप से ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है।
ATF महंगा होना भी बड़ी चुनौती
एयरलाइंस की लागत में विमान ईंधन यानी ATF (Aviation Turbine Fuel) की बड़ी हिस्सेदारी होती है। 1 सितंबर को ATF की कीमत में 5.46 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह करीब ₹121.28 प्रति लीटर पहुंच गया। जून में ATF करीब ₹115 प्रति लीटर था। जुलाई में कीमत घटकर लगभग ₹110 हुई, लेकिन अगस्त में यह फिर करीब ₹115 और सितंबर में ₹121.28 प्रति लीटर पहुंच गई। एयरलाइन के कुल खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी तक हो सकती है। ऐसे में ईंधन महंगा होने पर कम मुनाफे वाले रूट पर उड़ानें घटाने का फैसला लिया जा सकता है।
विमानों की कमी से भी क्षमता पर असर
एयरलाइंस के सामने विमानों की उपलब्धता भी चुनौती बनी हुई है। Air India के चीफ कमर्शियल ऑफिसर निपुण अग्रवाल ने जुलाई में बताया था कि कंपनी ने जून से अगस्त के बीच अपनी क्षमता करीब 15 फीसदी तक कम की थी। इसके पीछे विमानों की कमी, नए विमानों की डिलीवरी में देरी और पुराने विमानों में सीटों को बदलने जैसे कारण बताए गए थे।
इन बड़े शहरों में सबसे ज्यादा सीटें घटीं
देश के 10 प्रमुख एयरपोर्ट में केवल दिल्ली और पुणे में सीट क्षमता बढ़ी। बाकी प्रमुख शहरों में गिरावट दर्ज की गई।
सबसे ज्यादा कमी:
- कोलकाता: 19 फीसदी
- हैदराबाद: 14.7 फीसदी
- अहमदाबाद: 13.5 फीसदी
- चेन्नई: 13.4 फीसदी
- गुवाहाटी: 12.1 फीसदी
- कोच्चि: 10.2 फीसदी
- बेंगलुरु: 8.3 फीसदी
- मुंबई: 6.5 फीसदी
राज्यों में केरल सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां सीट क्षमता में 26.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। गोवा में 17.6 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 16.8 फीसदी और तमिलनाडु में 12 फीसदी की कमी हुई।
केरल में खाड़ी कनेक्टिविटी पर ज्यादा असर
केरल में घरेलू उड़ानों की संख्या में बड़ी कटौती नहीं हुई है। मुंबई-कोच्चि और बेंगलुरु-कोच्चि जैसे कुछ रूट पर सीटें बढ़ी हैं। लेकिन खाड़ी देशों से जुड़े रूट पर कटौती ज्यादा दिखाई दे रही है। पश्चिम एशिया के हवाई मार्गों की स्थिति और ईंधन की बढ़ती लागत का असर खास तौर पर इन अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों पर पड़ रहा है।
कुछ प्रमुख रूट पर बढ़ी सीटें भी
ऐसा नहीं है कि हर रूट पर एयरलाइंस ने क्षमता घटाई है। कुछ व्यस्त रूट पर सीटों की संख्या बढ़ी है। मुंबई-दिल्ली रूट पर सीटें 13.9 फीसदी बढ़कर करीब 6.77 लाख हो गईं। बेंगलुरु-पुणे रूट पर 26.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। दिल्ली-पुणे और कोलकाता-दिल्ली रूट पर भी क्षमता बढ़ी। इसके उलट मुंबई-हैदराबाद रूट पर सीटें 9.5 फीसदी और मुंबई-चेन्नई रूट पर 8.5 फीसदी घट गईं। हैदराबाद-तिरुपति रूट पर भी बड़ी संख्या में उड़ानें कम की गई हैं। इससे संकेत मिलता है कि एयरलाइंस फिलहाल व्यस्त और ज्यादा मांग वाले रूट को प्राथमिकता दे रही हैं, जबकि कम मांग या कम लाभ वाले रूट पर क्षमता घटाई जा रही है।
एयर इंडिया समेत एयरलाइंस पर वित्तीय दबाव
एविएशन सेक्टर में क्षमता घटने के पीछे केवल परिचालन कारण नहीं हैं, बल्कि कंपनियों पर वित्तीय दबाव भी है। सिंगापुर एयरलाइंस की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष में Air India Group को ₹26,700 करोड़ से ज्यादा का घाटा हुआ। इस अवधि में समूह की कमाई करीब ₹79,150 करोड़ से अधिक रही। Air India में 25.1 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली Singapore Airlines के अपने मुनाफे में भी 57 फीसदी की गिरावट आई। ICRA ने भी मार्च 2026 में भारतीय एविएशन सेक्टर का आउटलुक Stable से घटाकर Negative कर दिया था।
क्या आगे और महंगा हो सकता है Flight Ticket?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि हर रूट पर हवाई किराया बढ़ेगा। लेकिन सीटों की लगातार घटती संख्या और स्थिर यात्री मांग को देखते हुए किराए पर ऊपर की ओर दबाव जरूर बन सकता है। सबसे ज्यादा असर उन रूट पर पड़ सकता है जहां पहले ही उड़ानों के विकल्प सीमित हैं। अगर किसी रूट पर यात्रियों की मांग बढ़ती है और एयरलाइंस क्षमता नहीं बढ़ातीं, तो टिकट की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।
अक्टूबर-नवंबर के आंकड़े होंगे अहम
आने वाले महीनों में स्थिति ज्यादा स्पष्ट होगी। अक्टूबर में त्योहारी सीजन शुरू होगा और महीने के अंत से विंटर शेड्यूल भी लागू होगा। ऐसे में इस दौरान यात्रियों की मांग बढ़ सकती है। अगर एयरलाइंस ने त्योहारी सीजन में सीट क्षमता नहीं बढ़ाई, तो टिकट की कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना रहेगी। दूसरी ओर, ATF की कीमत, पश्चिम एशिया के हवाई मार्ग और विमानों की उपलब्धता भी आगे किराए की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। Air India ने 1 सितंबर से अपनी 145 साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें फिर शुरू करने की घोषणा की है। इसके बावजूद सितंबर में उसकी कुल सीट क्षमता कम हुई है। इसलिए अक्टूबर और नवंबर के आंकड़े यह तय करने में अहम होंगे कि एयरलाइन क्षमता में वास्तविक सुधार होता है या नहीं।