सीहोर जिले के लसुड़िया खास गांव में मंगलवार शाम पानी फिल्टर प्लांट में क्लोरीन गैस लीक होने की सूचना से अफरा-तफरी मच गई। गैस के संपर्क में आने के बाद कुछ ग्रामीणों ने सांस लेने में परेशानी के साथ उल्टी और दस्त की शिकायत की। घटना के बाद प्रभावित लोगों को जिला अस्पताल सीहोर लाया गया, जहां 8 से 10 लोगों की जांच की गई। डॉक्टरों के मुताबिक सभी की हालत सामान्य है और कोई भी मरीज गंभीर नहीं है।
पानी साफ करने के दौरान गैस टैंक में हुआ रिसाव
जानकारी के मुताबिक लसुड़िया खास स्थित पानी फिल्टर प्लांट में तालाब के पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन गैस का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी दौरान प्लांट में लगे क्लोरीन गैस के टैंक में रिसाव होने की बात सामने आई। गैस के रिसाव की सूचना फैलते ही आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया और ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया।
सांस लेने में परेशानी के बाद अस्पताल पहुंचे ग्रामीण
क्लोरीन गैस के प्रभाव में आने के बाद कुछ ग्रामीणों ने सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। इसके अलावा कुछ लोगों को उल्टी और दस्त जैसी समस्या भी हुई।घटना की जानकारी मिलते ही प्रभावित लोगों को उपचार के लिए जिला अस्पताल सीहोर पहुंचाया गया। यहां अस्पताल की टीम ने उनकी जांच और प्राथमिक उपचार शुरू किया।
डॉक्टर बोले- सभी मरीज खतरे से बाहर
डॉ. हरिओम गुप्ता के मुताबिक अस्पताल लाए गए 8 से 10 लोगों की जांच की गई, लेकिन सभी की स्थिति सामान्य पाई गई है। उन्होंने बताया कि गैस का हल्का असर लोगों पर दिखाई दिया है।डॉक्टर के अनुसार क्लोरीन गैस अधिक मात्रा में फेफड़ों तक पहुंचने पर नुकसानदायक हो सकती है, लेकिन इस मामले में गैस की मात्रा कम होने के कारण मरीजों को किसी गंभीर नुकसान की स्थिति नहीं है।
मौके पर पहुंची जिला अस्पताल की टीम
घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला अस्पताल की टीम मौके पर पहुंची। प्रभावित लोगों को जरूरत के मुताबिक अस्पताल लाकर उपचार कराने की व्यवस्था की जा रही है।वहीं संबंधित अमले ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। फिलहाल गैस टैंक में रिसाव किस वजह से हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों में दहशत, प्रशासन की निगरानी जारी
क्लोरीन गैस रिसाव की घटना के बाद लसुड़िया खास और आसपास के क्षेत्र में ग्रामीणों के बीच डर का माहौल है। प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।रिसाव के वास्तविक कारण और प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।