नेपाल में 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ से हालात अभी पूरी तरह सामान्य भी नहीं हुए हैं कि मौसम विभाग ने बुधवार के लिए एक बार फिर खराब मौसम की चेतावनी जारी कर दी है। देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका है, जबकि हिमालयी क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फबारी और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार मधेश, कोशी, बागमती, गंडकी और लुंबिनी के पहाड़ी तथा तराई क्षेत्रों में तेज बारिश हो सकती है। वहीं कोशी, बागमती और गंडकी के हिमालयी इलाकों में बारिश या बर्फबारी के साथ गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। लुंबिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम के कुछ हिमालयी क्षेत्रों में भी बर्फबारी का अनुमान है।
बाढ़ से तबाही के बीच मौसम ने फिर बढ़ाई चिंता
नेपाल में पिछली बाढ़ का असर अभी भी गंभीर बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 26 अगस्त की बाढ़ में अब तक 1,377 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5,326 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। आपदा में 6,827 लोग घायल हुए हैं और 7,570 घरों के टूटने या क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे समय में नए सिरे से भारी बारिश का पूर्वानुमान राहत और बचाव अभियान के सामने अतिरिक्त चुनौती खड़ी कर सकता है। खासकर पहाड़ी और हिमालयी क्षेत्रों में बारिश, बर्फबारी और बिजली गिरने का खतरा प्रशासन के लिए चिंता का विषय है।
काठमांडू में 70% बारिश की संभावना, गरज-चमक के भी आसार
राजधानी काठमांडू में बुधवार को बारिश की संभावना 70 फीसदी बताई गई है। यहां दिन के समय मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक हो सकती है। काठमांडू में दिन का तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जबकि रात में तापमान 19 से 21 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है।
पोखरा में भी बारिश का अनुमान
पर्यटन नगरी पोखरा में भी बुधवार को बारिश की 70 फीसदी संभावना जताई गई है। यहां दिन का तापमान करीब 30 से 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। बारिश और बादलों के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, हालांकि लगातार बारिश की स्थिति स्थानीय स्तर पर आवाजाही और सामान्य गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
हिमालयी इलाकों में बारिश के साथ बर्फबारी का खतरा
नेपाल के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम का असर और ज्यादा गंभीर हो सकता है। कोशी, बागमती और गंडकी के हिमालयी क्षेत्रों में बारिश या बर्फबारी के साथ गरज-चमक की संभावना है। इसके अलावा लुंबिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम के कुछ हिमालयी क्षेत्रों में भी बर्फबारी होने का अनुमान है। ऐसे क्षेत्रों में मौसम में अचानक बदलाव और बिजली गिरने जैसी घटनाओं को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी होगी।
बाढ़ से 4 लाख करोड़ नेपाली रुपये से ज्यादा का नुकसान
इस बीच नेपाल की पिछली बाढ़ से हुए आर्थिक नुकसान का अनुमान भी बेहद बड़ा है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ से 4 लाख करोड़ नेपाली रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। इसमें घरों के साथ सड़कें और सरकारी एवं निजी संपत्तियों को हुए नुकसान को शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार नुकसान का विस्तृत आकलन पूरा होने के बाद यह आंकड़ा करीब 30 फीसदी तक और बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि नेपाल के सामने सिर्फ राहत और बचाव ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण की चुनौती भी है।
पुनर्निर्माण के लिए 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत
बाढ़ से प्रभावित इलाकों को दोबारा खड़ा करने के लिए नेपाल को बड़ी आर्थिक सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है। अनुमान के मुताबिक नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण के लिए करीब 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत हो सकती है। नेपाल सरकार इस नुकसान से निपटने के लिए दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आर्थिक मदद मांग रही है। आने वाले समय में पुनर्निर्माण के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अब सबसे बड़ी चिंता राहत कार्यों पर नए मौसम का असर
एक तरफ सरकार बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और पुनर्वास से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ नए मौसम अलर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। बारिश का असर सड़क संपर्क, पहाड़ी क्षेत्रों में आवाजाही और राहत सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बीच प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और स्थानीय लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।