इंदौर, 9 सितंबर 2026 | इंदौर में 19 सितंबर को प्रस्तावित राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर सियासत अब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) तक पहुंच गई है। कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के कुलगुरु के नाम ज्ञापन सौंपकर 19 सितंबर को DAVV और उससे संबद्ध कॉलेजों में अवकाश घोषित करने की मांग की है। कांग्रेस ने इसके साथ यह भी कहा है कि जो विद्यार्थी कार्यक्रम में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें शैक्षणिक गतिविधियों और उपस्थिति यानी Attendance में आवश्यक छूट दी जाए।
कांग्रेस का सवाल- दूसरे संगठनों के कार्यक्रम में छूट, फिर यहां क्यों नहीं?
कांग्रेस नेताओं ने ज्ञापन में विश्वविद्यालय प्रशासन की निष्पक्षता का मुद्दा उठाया है। पार्टी का कहना है कि यदि RSS, भाजपा या ABVP से जुड़े आयोजनों में विद्यार्थियों की भागीदारी को लेकर विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर सहूलियत दी जाती है, तो ‘छात्रों की गूंज’ में शामिल होने के इच्छुक विद्यार्थियों के साथ अलग व्यवहार नहीं होना चाहिए। हालांकि यह कांग्रेस का आरोप और राजनीतिक तर्क है। DAVV प्रशासन की ओर से इस तुलना या अवकाश की मांग पर अंतिम आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
कांग्रेस बोली- मामला राहुल गांधी का नहीं, छात्रों के अधिकार का
कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में दावा किया कि यह मामला केवल राहुल गांधी के कार्यक्रम से जुड़ा नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय की निष्पक्षता और विद्यार्थियों के अधिकार का विषय है। पार्टी की मांग है कि जो छात्र कार्यक्रम में जाना चाहते हैं, उनके सामने Attendance या शैक्षणिक नुकसान का डर नहीं होना चाहिए और विश्वविद्यालय उन्हें अपनी इच्छा से कार्यक्रम में शामिल होने की स्वतंत्रता दे।
19 सितंबर को इंदौर आएंगे राहुल गांधी
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पहले 12 सितंबर को प्रस्तावित था, लेकिन आयोजन स्थल की अनुमति को लेकर विवाद के बाद इसे 19 सितंबर के लिए आगे बढ़ाया गया। कांग्रेस ने कहा है कि कार्यक्रम में राहुल गांधी विद्यार्थियों और युवाओं से शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य से जुड़े सवालों पर संवाद करेंगे। पार्टी इसे गैर-राजनीतिक छात्र संवाद के रूप में पेश कर रही है, हालांकि कार्यक्रम की तैयारियां कांग्रेस संगठन द्वारा ही संचालित की जा रही हैं।
कार्यक्रम स्थल को लेकर अभी भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं
‘छात्रों की गूंज’ को लेकर सबसे बड़ा पेंच आयोजन स्थल का रहा है। नेहरू स्टेडियम की अनुमति नहीं मिलने के बाद कांग्रेस ने रीजनल पार्क के सामने मैदान, DAVV के मैदान और आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज के पीछे के मैदान समेत अलग-अलग विकल्प प्रशासन के सामने रखे हैं। 8 सितंबर तक भी अंतिम स्थल की आधिकारिक अनुमति स्पष्ट नहीं हुई थी। इसलिए फिलहाल किसी एक मैदान को कार्यक्रम का अंतिम Venue लिखना जल्दबाजी होगी।
एक लाख से ज्यादा Registration का कांग्रेस का दावा
कार्यक्रम के लिए विद्यार्थियों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी कराया जा रहा है। 8 सितंबर को कांग्रेस ने दावा किया कि रजिस्ट्रेशन की संख्या एक लाख के पार पहुंच गई है। इसी को लेकर इंदौर में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जश्न भी मनाया। हालांकि यह संख्या आयोजकों की ओर से बताई गई है; इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित सरकारी आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
DAVV के फैसले पर रहेगी नजर
अब सबसे अहम सवाल यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन कांग्रेस की मांग पर क्या फैसला लेता है। 19 सितंबर को अवकाश घोषित करना, संबद्ध कॉलेजों पर इसे लागू करना और विद्यार्थियों को Attendance में छूट देना विश्वविद्यालय की प्रशासनिक प्रक्रिया और नियमों पर निर्भर करेगा। जब तक DAVV की ओर से औपचारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक 19 सितंबर को विश्वविद्यालय या कॉलेजों में छुट्टी तय मानना सही नहीं होगा।
कार्यक्रम को लेकर पहले से सियासी घमासान
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की घोषणा के बाद से ही भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। नेहरू स्टेडियम की अनुमति को लेकर विवाद हुआ, वहीं भाजपा से जुड़े नेताओं और संगठनों ने कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि युवाओं की आवाज के लिए मंच उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जबकि कार्यक्रम के स्वरूप और राजनीतिक उद्देश्य को लेकर भाजपा की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं। अब DAVV को सौंपे गए ज्ञापन के बाद विवाद का नया केंद्र छात्रों की उपस्थिति, अवकाश और विश्वविद्यालय की निष्पक्षता बन गया है।