नई दिल्ली - महंगाई का असर अब घर के रोजमर्रा के खाने के बजट पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अगस्त में प्याज, खाद्य तेल और LPG की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते शाकाहारी और नॉन-वेज थाली दोनों की लागत बढ़ी। हालांकि, आलू और टमाटर के दाम में गिरावट ने महंगाई के दबाव को कुछ हद तक कम किया।

अगस्त में कितनी महंगी हुई शाकाहारी थाली?
CRISIL Intelligence की ‘Roti Rice Rate’ रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में एक शाकाहारी थाली की लागत बढ़कर 29.5 रुपये पहुंच गई। जुलाई की तुलना में इसमें करीब 1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। पिछले साल अगस्त के मुकाबले भी शाकाहारी थाली की कीमत लगभग 1 फीसदी अधिक रही। थाली की लागत बढ़ने में प्याज की कीमतों की बड़ी भूमिका रही। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में प्याज पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 43 फीसदी महंगा रहा।
खाद्य तेल और LPG ने भी बढ़ाया बोझ
घर के खाने का बजट बढ़ने की एक और वजह खाद्य तेल और रसोई गैस की कीमतों में हुई बढ़ोतरी रही। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में खाद्य तेल की कीमत सालाना आधार पर करीब 11 फीसदी बढ़ी। इसी तरह LPG की कीमत में भी पिछले साल के मुकाबले करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन दोनों चीजों की कीमत बढ़ने का सीधा असर खाना तैयार करने की कुल लागत पर पड़ा।
आलू-टमाटर सस्ते होने से मिली थोड़ी राहत
जहां प्याज, तेल और LPG ने थाली की लागत बढ़ाई, वहीं सब्जियों की कुछ कीमतों में गिरावट ने महंगाई के असर को सीमित किया। अगस्त में आलू करीब 12 फीसदी और टमाटर करीब 28 फीसदी सस्ता रहा। टमाटर और आलू की कीमतों में कमी के चलते शाकाहारी थाली की लागत में इससे ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई। यानी कुछ जरूरी खाद्य वस्तुओं के सस्ता होने से परिवारों को थोड़ी राहत मिली।
नॉन-वेज थाली भी हुई महंगी
अगस्त में नॉन-वेज थाली की औसत लागत 57.5 रुपये रही। CRISIL की रिपोर्ट के अनुसार, यह पिछले साल अगस्त की तुलना में करीब 5 फीसदी अधिक है। नॉन-वेज थाली की कीमत बढ़ने के पीछे मुख्य वजह ब्रॉयलर यानी चिकन की कीमतों में सालाना बढ़ोतरी बताई गई है। चिकन के महंगे होने से नॉन-वेज थाली की कुल लागत पर सीधा असर पड़ा।
रोजमर्रा के बजट पर पड़ रहा असर
प्याज, खाद्य तेल, LPG और चिकन जैसी जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी बताती है कि खाद्य महंगाई का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव घर के मासिक बजट पर भी पड़ता है। हालांकि, आलू और टमाटर जैसी वस्तुओं के सस्ता होने से अगस्त में थाली की लागत में तेज उछाल को कुछ हद तक रोका जा सका।