उज्जैन, 9 सितंबर 2026 | सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में सड़कों और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम तेजी से चल रहा है। इसी बीच सतीगेट क्षेत्र का करीब 170 साल पुराना श्री संकट मोचन खड़े हनुमान मंदिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। कंठाल से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण की जद में आने के कारण मंदिर की प्राचीन हनुमान प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई, लेकिन कई कोशिशों के बाद भी प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिल सकी। मंदिर का बड़ा हिस्सा सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई में हटाया जा चुका है। इसके बाद प्रशासन ने क्रेन और भारी मशीनों की मदद से प्रतिमा को निकालने की कोशिश की, लेकिन प्रयास सफल नहीं हुए। अब अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के सामने चुनौती है कि प्रतिमा को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना आगे की कार्रवाई कैसे की जाए।
4 बार कोशिश, फिर भी नहीं हिली प्रतिमा
ताजा जानकारी के मुताबिक 3 से 7 सितंबर के बीच प्रतिमा को हटाने के लिए अलग-अलग चरणों में कई प्रयास किए गए। क्रेन, खुदाई मशीन और दूसरी तकनीकी व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया, लेकिन करीब 8 फीट ऊंची प्रतिमा मूल स्थान से नहीं हटाई जा सकी। इसी के बाद प्रशासन ने जबरन मशीनरी इस्तेमाल करने के बजाय विशेषज्ञों से सलाह लेने का रास्ता चुना है।
क्यों हटाया जा रहा था मंदिर?
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत कंठाल से छत्री चौक तक करीब 410 मीटर लंबे मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है। यह इलाका शहर के महत्वपूर्ण धार्मिक और व्यावसायिक मार्गों में शामिल है। सतीगेट स्थित खड़े हनुमान मंदिर इसी चौड़ीकरण की जद में आ रहा था। नगर निगम की योजना प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित कर सड़क निर्माण आगे बढ़ाने की थी।
आस्था से जोड़कर देख रहे श्रद्धालु
प्रतिमा को कई कोशिशों के बावजूद नहीं हटाए जा सकने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और श्रद्धालु मौके पर पहुंचने लगे। कई श्रद्धालु इसे अपनी धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर तरह-तरह के दावे और वीडियो वायरल हो रहे हैं। हालांकि प्रशासन और विशेषज्ञों के लिए यह फिलहाल इंजीनियरिंग और संरचनात्मक चुनौती है, इसलिए इसे किसी चमत्कार का प्रमाण मानकर खबर में पेश करना उचित नहीं होगा।
नींव की बनावट बनी सबसे बड़ी चुनौती
ताजा रिपोर्टों के अनुसार प्रतिमा की नींव सामान्य संरचना जैसी नहीं है। विशेषज्ञों ने प्रारंभिक निरीक्षण में संकेत दिया है कि पत्थरों को नीचे ऐसी तकनीक से जोड़ा गया है, जिससे सीधे क्रेन के सहारे प्रतिमा उठाने पर उसे नुकसान पहुंच सकता है। इसी वजह से अब प्रतिमा के नीचे की संरचना, नींव और पत्थर की स्थिति का वैज्ञानिक परीक्षण करने पर विचार किया जा रहा है। विक्रम विश्वविद्यालय से जुड़े पुरातत्व विशेषज्ञों की राय भी ली गई है।
Archaeologist करेंगे Scanning
प्रतिमा हटाने की कोशिशें नाकाम होने के बाद अब Archaeology और Engineering Experts से तकनीकी मदद ली जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रतिमा और उसकी नींव की स्कैनिंग तथा भू-तकनीकी जांच के बाद तय किया जाएगा कि इसे सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जा सकता है या सड़क के डिजाइन में बदलाव करना बेहतर होगा।
भारी मशीनों से कार्रवाई फिलहाल रोकी
7 सितंबर को महापौर मुकेश टटवाल भी मौके पर पहुंचे थे। इसके बाद भारी मशीनरी से प्रतिमा हटाने की कार्रवाई फिलहाल रोक दी गई। नगर निगम का कहना है कि सभी पक्षों और तकनीकी विशेषज्ञों से चर्चा करने के बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा। धार्मिक भावनाओं और प्रतिमा की सुरक्षा को ध्यान में रखकर समाधान खोजने की बात कही गई है।
क्या सड़क का रास्ता बदलेगा?
अब प्रशासन के सामने कई विकल्प हैं। पहला, वैज्ञानिक तकनीक से पूरी नींव सहित प्रतिमा को सुरक्षित स्थानांतरित किया जाए। दूसरा, सड़क के डिजाइन या alignment में बदलाव कर प्रतिमा को मूल स्थान पर ही रखा जाए। स्थानीय श्रद्धालु संगठनों की ओर से मूल जगह पर ही मंदिर बनाए रखने की मांग भी सामने आई है। हालांकि अंतिम फैसला नगर निगम और प्रशासन की तकनीकी रिपोर्ट के बाद ही होगा।
करीब 170 साल पुराना बताया जाता है मंदिर
सतीगेट स्थित खड़े हनुमान मंदिर को स्थानीय परंपरा में करीब 170 साल पुराना माना जाता है और इसका इतिहास 1857 के आसपास के दौर से जोड़ा जाता है। एक ही पुजारी परिवार की कई पीढ़ियां इस मंदिर की सेवा करती आई हैं। हालांकि प्रतिमा की सटीक पुरातात्विक आयु को लेकर अलग-अलग दावे हैं, इसलिए “170 साल पुराना” मंदिर से जुड़ा प्रचलित/स्थानीय ऐतिहासिक अनुमान है।
सिंहस्थ 2028 से पहले चुनौती भी, संवेदनशील मामला भी
सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण, ट्रैफिक व्यवस्था और दूसरी आधारभूत परियोजनाओं को समय पर पूरा करना प्रशासन की प्राथमिकता है। लेकिन खड़े हनुमान मंदिर का मामला यह भी दिखाता है कि विकास कार्यों के दौरान धार्मिक विरासत, स्थानीय आस्था और तकनीकी सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है। अब सबकी नजर तकनीकी जांच पर है। उसकी रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि हनुमान प्रतिमा को दूसरी जगह सुरक्षित ले जाया जाएगा या सड़क निर्माण की योजना में बदलाव किया जाएगा।