पश्चिम बंगाल: की राजधानी कोलकाता स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय क्षेत्र में जारी राजनीतिक गहमागहमी के बीच बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से विशाल 'गेरुआ यात्रा' (गेरुआ सम्मान यात्रा) का आयोजन किया गया। गोलपार्क से शुरू होकर जादवपुर विश्वविद्यालय के करीब से गुजरते हुए यह यात्रा 8बी (8B) बस स्टैंड तक पहुंची। इस रैली का नेतृत्व स्वयं राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी कर रहे थे। यात्रा के समापन पर मंच से मुख्यमंत्री ने कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया कि बंगाल की धरती पर 'कश्मीर मांगे आजादी' जैसे देशविरोधी नारे और राष्ट्र विरोधी मानसिकता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जादवपुर बना राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र
जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में वामपंथी छात्र संगठनों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं के बीच हुई हालिया झड़पों के बाद से क्षेत्र में माहौल काफी गरम है। विश्वविद्यालय के पास से गुजरी इस यात्रा को भाजपा के बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई थी ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। यात्रा के दौरान भाजपा नेता दिलीप घोष ने भी बयान देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में देश की अखंडता के खिलाफ किसी भी तरह की नारेबाजी सहन नहीं की जाएगी और वहां से केवल 'वंदे मातरम्' की आवाज आनी चाहिए।

साधु-संतों और जनसैलाब के साथ निकली यात्रा
बुधवार दोपहर गोलपार्क से जादवपुर तक का पूरा मार्ग गेरुआ ध्वजों से पट गया था। शंखध्वनि और उलुध्वनि के बीच निकली इस रैली में साधु-संतों के साथ-साथ बड़ी संख्या में आम समर्थकों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ इस यात्रा और मंच पर राज्य के मंत्री तापस रॉय, जादवपुर से भाजपा विधायक शर्बरी मुखर्जी और पद्म श्री कार्तिक महाराज प्रमुख रूप से मौजूद रहे। जादवपुर पहुंचने पर सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से 'वंदे मातरम्' का गायन किया।
'देशविरोधी तत्वों को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प'
जादवपुर 8बी बस स्टैंड पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "मैंने इस जादवपुर में संकल्प लिया है, जो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और ऋषि अरविंद की पवित्र भूमि है। यहां 'कश्मीर मांगे आजादी' गैंग, किशनजी को रेड सैल्यूट देने वालों और गेरुआ को तांडव बताने वालों को जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा।" उन्होंने स्वामी विवेकानंद, श्री चैतन्य महाप्रभु और स्वामी प्रणवानंद की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के गौरव और गेरुआ ध्वज के सम्मान की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
कम्युनिस्टों के बाद अब जमाती राजनीति के अंत की बात
अपने संबोधन में राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह 2011 में कम्युनिस्ट शासन को हटाने का संकल्प लिया गया था, उसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2026 में जमाती सोच वाली सरकार को उखाड़ फेंकने का काम जनता के सहयोग से पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि जादवपुर जैसे शैक्षणिक और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में राष्ट्रविरोधी ताकतों के पनपने की कोई जगह नहीं है।