सागर/भोपाल, 10 सितंबर 2026 | मध्यप्रदेश के सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में सामने आए कथित जहरीली शराब कांड पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने के आदेश दिए हैं। इसके साथ पुलिस प्रशासन में बड़ा बदलाव करते हुए वरिष्ठ IPS अधिकारी इरशाद वली को सागर रेंज का नया पुलिस महानिरीक्षक (IG) बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने बुधवार को सागर पहुंचकर अस्पताल में भर्ती पीड़ितों और उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश देते हुए साफ कहा कि अवैध शराब कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही में जिसकी भी भूमिका मिलेगी, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
CM ने दिए Judicial Inquiry के आदेश
सागर शराब कांड की जांच अब केवल पुलिस और प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहेगी। मुख्यमंत्री ने न्यायिक जांच के निर्देश दिए हैं ताकि घटना के कारण, अवैध शराब की सप्लाई चेन और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष पड़ताल हो सके। हालांकि अभी तक यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है कि न्यायिक जांच की अध्यक्षता कौन करेगा और रिपोर्ट देने के लिए कितनी समय-सीमा होगी।
इरशाद वली को सौंपी गई सागर पुलिस की कमान
मामले के बाद राज्य सरकार ने पुलिस नेतृत्व में बदलाव करते हुए वरिष्ठ IPS अधिकारी इरशाद वली को सागर रेंज का IG नियुक्त किया है। सरकार का कहना है कि जांच, कानून-व्यवस्था और अवैध शराब के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करने के लिए यह बदलाव किया गया है।
दिलीप कुमार ने संभाली सागर कमिश्नर की जिम्मेदारी
IAS अधिकारी दिलीप कुमार ने भी सागर संभाग आयुक्त का कार्यभार संभाल लिया है। हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण टाइमलाइन समझना जरूरी है। दिलीप कुमार को सागर कमिश्नर बनाने का आदेश 5 सितंबर को हुए IAS फेरबदल में ही जारी हो चुका था, यानी शराब त्रासदी सामने आने से पहले उनकी पोस्टिंग तय हो गई थी। बाद में मुख्यमंत्री ने उन्हें तत्काल पदभार ग्रहण करने के निर्देश दिए। इसलिए इसे “शराब कांड के बाद दिलीप कुमार को कमिश्नर बनाया गया” लिखना पूरी तरह सटीक नहीं होगा।
अस्पताल पहुंचे CM, मरीजों का जाना हाल
दुबई दौरे से लौटने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने अन्य कार्यक्रम स्थगित कर सागर का दौरा किया। उन्होंने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों से मुलाकात की और डॉक्टरों से इलाज की स्थिति की जानकारी ली। सरकार ने पीड़ितों के इलाज का खर्च उठाने और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही है।
अवैध शराब नेटवर्क पर कार्रवाई तेज
पुलिस ने शराब की कथित सप्लाई और बिक्री से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कई FIR दर्ज की हैं। 9 सितंबर तक की ताजा रिपोर्ट में 16 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी। पुलिस ने एक स्थानीय आरोपी को इस नेटवर्क में अहम भूमिका वाला बताया है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि शराब कहां तैयार हुई, किस रास्ते से गांवों तक पहुंची और स्थानीय स्तर पर उसकी बिक्री में कौन-कौन शामिल था।
Methanol Poisoning की बात आई सामने
हादसे के बाद की मेडिकल जांच और पोस्टमॉर्टम से जुड़े शुरुआती निष्कर्षों में मेथनॉल विषाक्तता की बात सामने आई है। मेथनॉल बेहद जहरीला पदार्थ है। इसका सेवन आंखों की रोशनी जाने, गंभीर अंग क्षति और मौत तक का कारण बन सकता है। अस्पताल में कुछ मरीजों को Methanol Poisoning के उपचार में इस्तेमाल होने वाला विशेष antidote भी दिया गया।
CM ने कांग्रेस पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना को लेकर कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्व की कांग्रेस सरकारों के समय जहरीली शराब के मामलों के लिए कानून इतना सख्त नहीं था और भाजपा सरकार ने शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में कानून को कठोर बनाया। हालांकि इसे मुख्यमंत्री का राजनीतिक बयान मानकर ही प्रकाशित किया जाना चाहिए।
जहरीली शराब पर क्या कहता है MP का कानून?
मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2021 में Madhya Pradesh Excise Act में संशोधन कर जहरीली शराब से मौत के मामलों में सजा कड़ी की थी। कानून के मुताबिक पहली बार अपराध में जहरीले पदार्थ से मौत होने पर कम से कम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और न्यूनतम ₹5 लाख जुर्माने का प्रावधान है। वहीं इसी तरह के दूसरे या उसके बाद के अपराध में मौत होने पर मृत्युदंड या आजीवन कारावास और कम से कम ₹20 लाख जुर्माने का प्रावधान है। इसलिए “हर जहरीली शराब मौत के मामले में सीधे फांसी का कानून है” कहना कानूनी रूप से सटीक नहीं होगा।
पूरे प्रदेश में अवैध शराब के खिलाफ अभियान
सागर की घटना के बाद मुख्यमंत्री ने प्रशासन को प्रदेशभर में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ अभियान तेज करने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि दोषी चाहे किसी भी स्तर का हो, कार्रवाई से बचना नहीं चाहिए। साथ ही नशामुक्ति और जनजागरूकता अभियान में सामाजिक तथा स्वयंसेवी संगठनों को जोड़ने की बात भी कही गई है।
अब न्यायिक जांच पर टिकी नजर
सागर शराब कांड ने आबकारी विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब न्यायिक जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि जहरीली शराब का स्रोत क्या था, इसे बाजार तक पहुंचने से क्यों नहीं रोका गया और क्या किसी स्तर पर पहले मिली जानकारी के बावजूद कार्रवाई में लापरवाही बरती गई। जांच में जिम्मेदारी तय होने के बाद सरकार ने दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई का भरोसा दिया है।