गणेश चतुर्थी 2026 में 14 सितंबर को मनाई जाएगी। इस पर्व को लेकर घरों और बाजारों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा घर लाने और विधि-विधान से उनकी स्थापना की तैयारी कर रहे हैं। मान्यता है कि गणपति की पूजा से घर में सुख-समृद्धि और शुभता आती है। गणेश चतुर्थी से पहले लोग नई गणेश प्रतिमा खरीदते हैं। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मूर्ति खरीदते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं कि घर के लिए गणेश जी की मूर्ति लेते समय किन बातों का ध्यान रखना शुभ माना जाता है।
कैसी होनी चाहिए गणेश जी की मूर्ति?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में स्थापना के लिए बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की मूर्ति को शुभ माना जाता है। इसे वाममुखी गणेश कहा जाता है और ऐसी प्रतिमा को घर में सुख, शांति और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, दाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा की पूजा के नियम अधिक कठोर माने जाते हैं। इसलिए घर में नियमित पूजा के लिए लोग सामान्यतः बाईं सूंड वाली प्रतिमा को प्राथमिकता देते हैं।
बैठी हुई गणेश प्रतिमा को माना जाता है शुभ
घर में स्थापना के लिए बैठे हुए गणेश जी की मूर्ति को शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे स्थिरता और सुख-समृद्धि से जोड़ा जाता है। वहीं, खड़े हुए गणेश जी की प्रतिमा को घर में स्थापित करने से बचने की सलाह दी जाती है। मूर्ति खरीदते समय यह भी देखा जाता है कि भगवान गणेश के साथ उनका वाहन मूषक (चूहा) और भोग के लिए मोदक भी दर्शाया गया हो।
गणेश जी की मूर्ति का रंग कैसा हो?
गणेश जी की प्रतिमा के लिए केसरिया, पीला और सफेद रंग शुभ माने जाते हैं। घर में स्थापना के लिए इन रंगों की प्रतिमा चुनी जा सकती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में काले रंग की गणेश प्रतिमा स्थापित करने से बचने की सलाह दी जाती है। प्रतिमा के स्वरूप में भगवान गणेश के चार हाथ होने और दाहिना दांत पूरा तथा बायां दांत थोड़ा टूटा हुआ होने को भी पारंपरिक रूप से शुभ स्वरूप माना जाता है।
घर के लिए किस धातु या सामग्री की मूर्ति लें?
घर में गणेश जी की स्थापना के लिए शुद्ध मिट्टी, पीतल, तांबा, चांदी या सफेद संगमरमर से बनी प्रतिमा ली जा सकती है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए गणेश चतुर्थी पर प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प माना जाता है। मूर्ति खरीदते समय सबसे जरूरी बात यह है कि वह टूटी, खंडित या क्षतिग्रस्त न हो। प्रतिमा को अच्छी तरह देखकर ही खरीदना चाहिए।
गणेश जी की मूर्ति कितनी बड़ी होनी चाहिए?
घर में गणेश जी की स्थापना के लिए प्रतिमा का आकार पूजा स्थल के अनुसार होना चाहिए। बहुत बड़ी प्रतिमा के बजाय ऐसी मूर्ति चुनना उचित है जिसे घर के मंदिर या पूजा स्थल पर आसानी से स्थापित किया जा सके। मान्यताओं के अनुसार घर के लिए छोटी या मध्यम आकार की प्रतिमा अधिक सुविधाजनक मानी जाती है।
घर में किस दिशा में रखें गणेश जी की मूर्ति?
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी की मूर्ति को घर के उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में रखना शुभ माना जाता है। इसके अलावा पूर्व दिशा भी पूजा स्थल के लिए उपयुक्त मानी जाती है। मूर्ति स्थापित करने से पहले पूजा की जगह को अच्छी तरह साफ कर लें और प्रतिमा को सम्मानपूर्वक चौकी पर स्थापित करें।
गणेश पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
- गणेश चतुर्थी के दिन पूजा के लिए सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
- पूजा के दौरान भगवान गणेश को फल, फूल, दूर्वा, मोदक या लड्डू अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद विधि-विधान से पूजा और आरती करें।
- पूजा स्थल के पास तांबे के पात्र में जल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते रखने की भी परंपरा है।
गणेश मूर्ति खरीदते समय ध्यान रखने वाली बातें
- बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा को प्राथमिकता दें।
- बैठी हुई गणेश प्रतिमा को घर के लिए शुभ माना जाता है।
- प्रतिमा के साथ मूषक का होना पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
- मूर्ति टूटी या खंडित नहीं होनी चाहिए।
- केसरिया, पीले या सफेद रंग की प्रतिमा ली जा सकती है।
- घर के पूजा स्थल के अनुसार मूर्ति का आकार चुनें।
- ईशान कोण या पूर्व दिशा में स्थापना को शुभ माना जाता है।
- पर्यावरण की दृष्टि से प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा बेहतर विकल्प है।