भोपाल: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल के रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने ऐसे प्रतिष्ठानों को निर्देश दिया है कि यदि उनके पास आवासीय जमीन पर मॉल, होटल या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की वैध अनुमति है, तो उससे जुड़े सभी दस्तावेज 7 दिन के भीतर भोपाल नगर निगम (BMC) के समक्ष पेश करने होंगे। कोर्ट ने साफ किया है कि निर्धारित समय सीमा में जरूरी दस्तावेज पेश नहीं किए गए तो नगर निगम संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कर सकेगा।
7 दिन में BMC को देने होंगे अनुमति के दस्तावेज
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों को अपनी वैधता साबित करनी होगी। संबंधित संस्थानों को यह दिखाना होगा कि उनके पास आवासीय भूखंड पर व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने के लिए जरूरी अनुमति मौजूद है। यदि किसी प्रतिष्ठान के पास जमीन के उपयोग में बदलाव या व्यावसायिक गतिविधि के संचालन से संबंधित वैध मंजूरी है, तो उसके दस्तावेज नगर निगम के सामने पेश करने होंगे।
दस्तावेज नहीं मिले तो BMC कर सकेगा कार्रवाई
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि संबंधित प्रतिष्ठान 7 दिन की समय सीमा में अनुमति से जुड़े दस्तावेज जमा नहीं करते, तो भोपाल नगर निगम को नियमानुसार कार्रवाई करने की स्वतंत्रता होगी। इस आदेश से उन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है, जो आवासीय क्षेत्रों में बिना जरूरी अनुमति के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के राजेंद्र कुमार बड़जात्या फैसले का हवाला
हाईकोर्ट ने अपने निर्देश में सुप्रीम कोर्ट के राजेंद्र कुमार बड़जात्या मामले में दिए गए फैसले का भी आधार लिया है। कोर्ट के निर्देश के बाद नगर निगम के पास ऐसे मामलों की जांच और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई के लिए स्पष्ट न्यायिक आधार उपलब्ध हो गया है।
रिहायशी इलाकों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों का मामला
भोपाल के कई रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों के कारण कई क्षेत्रों में ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं बढ़ती हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब ऐसे प्रतिष्ठानों की अनुमति और जमीन के उपयोग से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
याचिकाकर्ता ने फैसले का किया स्वागत
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह फैसला भोपाल के रिहायशी क्षेत्रों को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके मुताबिक, आदेश के बाद नगर निगम के पास ऐसे मामलों में आगे की कार्रवाई के लिए स्पष्ट न्यायिक निर्देश मौजूद हैं।
रहवासियों को भी बड़ी राहत की उम्मीद
स्थानीय रहवासियों ने भी कोर्ट के निर्देश को राहत भरा बताया है। उनका कहना है कि रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कारण रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही थी। खास तौर पर पार्किंग और ट्रैफिक के साथ शोर तथा सुरक्षा से जुड़ी परेशानियां सामने आ रही थीं। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भोपाल नगर निगम से मांग की है कि रिहायशी क्षेत्रों में संचालित ऐसे सभी प्रतिष्ठानों की जांच कराई जाए। समिति का कहना है कि जिन संस्थानों के पास जरूरी अनुमति नहीं है, उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट के आदेश की बड़ी बातें
- रिहायशी भूखंडों पर चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच होगी।
- वैध अनुमति रखने वाले प्रतिष्ठानों को उसके दस्तावेज BMC के सामने पेश करने होंगे।
- दस्तावेज जमा करने के लिए 7 दिन की समय सीमा दी गई है।
- अनुमति नहीं दिखाने वाले प्रतिष्ठानों पर नगर निगम कार्रवाई कर सकता है।
- मामले में सुप्रीम कोर्ट के राजेंद्र कुमार बड़जात्या फैसले का हवाला दिया गया है।
- रहवासियों ने ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और सुरक्षा संबंधी समस्याओं का मुद्दा उठाया है।