अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री मार्गों पर हमलों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार को तेजी देखने को मिली। Brent Crude 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 98 डॉलर के करीब कारोबार करता नजर आया। तेल बाजार में सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सप्लाई को लेकर बनी हुई है। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से तेल की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका के कारण निवेशकों की नजर अब आगे होने वाले घटनाक्रम पर टिकी है।
Brent Crude 100 डॉलर के पार
गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude 0.68 फीसदी की बढ़त के साथ 101.90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी WTI Crude 1.81 फीसदी चढ़कर 97.79 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। बाजार को आशंका है कि अगर संघर्ष और बढ़ा तो तेल की सप्लाई और परिवहन प्रभावित हो सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता
तेल बाजार के लिए Strait of Hormuz बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। ईरान की ओर से दावा किया गया है कि अमेरिका द्वारा उसके पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद उसने होर्मुज के पास 10 जहाजों पर हमला किया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने आगे किसी हमले की स्थिति में और कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी भी दी है। इन घटनाक्रमों के बीच इस समुद्री मार्ग से तेल के प्रवाह को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी है। रिपोर्टों के अनुसार, इस सप्ताह टैंकरों पर हुए हमलों के बाद यहां से तेल का प्रवाह युद्ध से पहले के स्तर के करीब एक-चौथाई तक रह गया है।
सप्लाई बाधित हुई तो और महंगा हो सकता है Crude
तेल बाजार में फिलहाल सबसे बड़ा जोखिम सप्लाई का है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित होती है, तो वैश्विक बाजार में उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में पहले से ऊंची कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। खासकर उन देशों पर इसका असर अधिक पड़ सकता है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करते हैं।
MCX पर भी क्रूड में तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार की तेजी का असर घरेलू कमोडिटी बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। MCX पर Crude Oil करीब 9,140 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। तकनीकी नजरिए से MCX Crude फिलहाल 9,150-9,200 रुपये के resistance zone के आसपास है। अगर कीमत 9,200 रुपये के ऊपर मजबूती के साथ टिकती है तो अगला लक्ष्य 9,350-9,400 रुपये के आसपास हो सकता है। वहीं नीचे की तरफ 9,000-8,950 रुपये तत्काल सपोर्ट जोन माना जा रहा है। इसके नीचे कमजोरी आने पर 8,800-8,750 रुपये का स्तर अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट हो सकता है।
MCX Crude का RSI 71, तेजी के साथ correction का भी जोखिम
MCX Crude का Relative Strength Index (RSI) करीब 71 बताया जा रहा है। यह मजबूत तेजी के momentum का संकेत है, लेकिन 70 से ऊपर RSI पहुंचने पर बाजार में short-term overbought स्थिति की संभावना भी बढ़ जाती है। इसका मतलब यह नहीं है कि कीमत तुरंत गिर जाएगी, लेकिन मौजूदा स्तरों पर profit booking या consolidation देखने को मिल सकता है। जब तक MCX Crude 9,000 रुपये के ऊपर बना रहता है, तब तक इसका व्यापक तकनीकी रुझान मजबूत माना जा सकता है।
WTI Crude में भी तेजी का रुख
अमेरिकी WTI Crude फिलहाल 96 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है। बाजार की नजर अब 98 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर पर है। अगर WTI 98 डॉलर के ऊपर मजबूती से निकलता है तो इसके 100 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है। दूसरी तरफ 95-94 डॉलर का स्तर तत्काल सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। इसके नीचे 92-91 डॉलर अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन हो सकता है। WTI का RSI करीब 69 है। यानी इसमें भी तेजी का momentum मजबूत है, हालांकि मौजूदा स्तरों पर उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
भारत पर क्या होगा असर?
कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी भारत के लिए चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। महंगे क्रूड से इंपोर्ट बिल, पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही पर निर्भर करेगी। अगर सप्लाई बाधित रहती है तो क्रूड में तेजी आगे भी जारी रह सकती है, जबकि तनाव कम होने पर कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिल सकती है।