भोपाल/जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को नया स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। गुजरात हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने 10 सितंबर 2026 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली। इसके साथ ही हाईकोर्ट में नियमित मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व की शुरुआत हो गई है। जस्टिस कोगजे के सामने अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। लंबित मामलों के निपटारे, न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने और अदालत के प्रशासनिक कामकाज को बेहतर करने जैसे मुद्दे उनके कार्यकाल में अहम रहेंगे।
तीन महीने बाद MP हाईकोर्ट को मिला स्थायी मुख्य न्यायाधीश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पिछले कुछ समय से स्थायी मुख्य न्यायाधीश का पद खाली था। इस दौरान जस्टिस विवेक रूसिया कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे की नियुक्ति के बाद हाईकोर्ट को नियमित मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। केंद्र सरकार की नियुक्ति के अनुसार जस्टिस कोगजे को गुजरात हाईकोर्ट से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। यह नियुक्ति देश के कई हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े हालिया बदलावों का हिस्सा है।
कौन हैं जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे?
जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे का जन्म 16 जुलाई 1969 को हुआ था। उन्होंने रसायन विज्ञान में बीएससी की पढ़ाई की और इसके बाद बड़ौदा की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री हासिल की। वर्ष 1993 में उन्होंने वकालत शुरू की और गुजरात हाईकोर्ट में लंबे समय तक कानूनी प्रैक्टिस की। उनके न्यायिक करियर में आपराधिक, सिविल और संवैधानिक मामलों समेत विभिन्न क्षेत्रों का अनुभव रहा है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के मुताबिक वे 6 अप्रैल 2016 को गुजरात हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए थे। इसके बाद 15 मार्च 2018 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया।
गुजरात सरकार की ओर से भी कर चुके हैं पैरवी
न्यायाधीश बनने से पहले जस्टिस कोगजे ने गुजरात में सरकारी पक्ष की ओर से भी जिम्मेदारियां निभाईं। उनके पेशेवर जीवन में असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर और अतिरिक्त लोक अभियोजक जैसी भूमिकाएं शामिल रही हैं। वर्ष 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े मामलों में भी उन्होंने गुजरात सरकार की ओर से पैरवी की थी। इस वजह से उनके कानूनी करियर में गुजरात दंगों से संबंधित मुकदमों की पैरवी का भी उल्लेख मिलता है।
2016 में बने थे गुजरात हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश
जस्टिस कोगजे का हाईकोर्ट में न्यायिक सफर वर्ष 2016 में शुरू हुआ। 6 अप्रैल 2016 को उन्हें गुजरात हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। करीब दो साल बाद 15 मार्च 2018 को उनकी नियुक्ति स्थायी न्यायाधीश के तौर पर हुई। गुजरात हाईकोर्ट में एक दशक से ज्यादा समय के न्यायिक अनुभव के बाद अब उन्हें मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की कमान सौंपी गई है। उपलब्ध रिकॉर्ड में उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख 15 जुलाई 2031 दर्ज है।
MP हाईकोर्ट के सामने क्या होंगी बड़ी चुनौतियां?
मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस कोगजे के सामने न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय रहेंगे। इनमें अदालतों में लंबित मामलों को कम करना, मामलों की सुनवाई की गति बेहतर करना और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना प्रमुख हैं। इसके अलावा जबलपुर मुख्यपीठ के साथ इंदौर और ग्वालियर बेंच में न्यायिक कामकाज के बेहतर समन्वय पर भी ध्यान रहेगा। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की आधिकारिक जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट की स्वीकृत न्यायाधीश क्षमता 53 है और इसकी स्थायी बेंच इंदौर तथा ग्वालियर में हैं।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद हुई नियुक्ति
जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की थी। इसके बाद केंद्र सरकार की अधिसूचना के जरिए नियुक्ति को मंजूरी मिली। सितंबर 2026 में कई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के साथ जस्टिस कोगजे को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जिम्मेदारी दी गई। अब शपथ ग्रहण के साथ जस्टिस कोगजे ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया है। उनके नेतृत्व में लंबित मामलों के निपटारे और न्यायिक प्रशासन को लेकर आगे की दिशा पर नजर रहेगी।