भोपाल, 10 सितंबर 2026 | मध्यप्रदेश की सियासत में सनातन और राम मंदिर से जुड़ा मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 से उज्जैन से अयोध्या तक ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने का ऐलान किया है। उन्होंने इसे शिवधाम से रामधाम तक की पदयात्रा बताते हुए कहा है कि यात्रा का उद्देश्य धर्म के नाम पर कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाना, पारदर्शिता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देना है। दिग्विजय सिंह ने दावा किया है कि यह यात्रा किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं होगी। हालांकि उनके बयान में राम मंदिर के चढ़ावे और उससे जुड़े कथित भ्रष्टाचार को लेकर सरकार तथा मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है।
विजयादशमी से शुरू होगी यात्रा
दिग्विजय सिंह के मुताबिक ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन उज्जैन से शुरू होगी। यात्रा महाकाल की नगरी उज्जैन से अयोध्या तक जाएगी। उन्होंने इसे ‘शिवधाम से रामधाम’ की यात्रा बताया है। यात्रा का ध्येय धर्म और आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की मांग और सनातन मूल्यों को लेकर जनसंवाद करना बताया गया है।
राम मंदिर चंदे को लेकर लगाए गंभीर आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस और अपने वीडियो संदेश में दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर से जुड़े चंदे और चढ़ावे को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि श्रद्धालुओं द्वारा दी गई राशि और चढ़ावे के इस्तेमाल में कथित अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों पर भी सवाल उठाए और सरकार पर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया। इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। मामले में जांच और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया को साथ रखना जरूरी है।
VHP-RSS को लेकर भी बोले दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने अपने पुराने राजनीतिक मतभेदों का जिक्र करते हुए कहा कि वे RSS और VHP की विचारधारा से असहमति रखते रहे हैं, लेकिन राम मंदिर आंदोलन के दौर में रामशिला पूजन कार्यक्रम में उन्होंने भी भाग लिया था।
उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि राम के नाम पर श्रद्धालुओं से प्राप्त धन का गलत इस्तेमाल हुआ है तो उसका हिसाब सामने आना चाहिए।
हालांकि यहां संतुलन जरूरी है। राम मंदिर दान विवाद पर VHP अध्यक्ष आलोक कुमार भी पहले FIR और तेज जांच की मांग कर चुके हैं और कहा था कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति पर कार्रवाई होनी चाहिए।
लोगों के लिए जारी किया Google Form
यात्रा में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए दिग्विजय सिंह ने Google Form के जरिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था भी जारी की है। उन्होंने रामभक्तों और उन नागरिकों से यात्रा से जुड़ने की अपील की है, जो धर्म और धार्मिक संस्थानों से जुड़े वित्तीय मामलों में पारदर्शिता चाहते हैं। इच्छुक लोग जारी डिजिटल लिंक के जरिए अपनी सहभागिता दर्ज करा सकते हैं।
QR Code की बात पर रखें सावधानी
कुछ स्थानीय सूचनाओं में Google Form तक पहुंचने के लिए QR Code का भी जिक्र है, लेकिन उपलब्ध प्रमुख रिपोर्टों में सबसे स्पष्ट पुष्टि Google Form और डिजिटल लिंक की है। इसलिए खबर में QR Code तभी निश्चित रूप से लिखें, जब आपके पास दिग्विजय सिंह की ओर से जारी मूल पोस्टर या आधिकारिक QR मौजूद हो।
‘गैर-राजनीतिक’ बताई यात्रा, लेकिन सियासी असर तय
दिग्विजय सिंह ने यात्रा को गैर-राजनीतिक बताया है और कहा है कि इसका मकसद किसी पार्टी का समर्थन या विरोध नहीं है। इसके बावजूद मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता द्वारा चुनावी राजनीति के बेहद संवेदनशील विषय—सनातन, राम मंदिर और चंदे—को लेकर लंबी पदयात्रा निकालने के कारण इसका राजनीतिक असर होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
उज्जैन और अयोध्या जैसे दो बड़े धार्मिक केंद्रों को जोड़ने वाली यह यात्रा आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों की राजनीति में चर्चा का विषय बन सकती है।
पहले भी उठा चुके हैं चंदे का मुद्दा
दिग्विजय सिंह राम मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे के मुद्दे को पिछले कुछ महीनों से लगातार उठा रहे हैं। जून में भी उन्होंने चंदे और मंदिर से जुड़े वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया था। अब उन्होंने इन्हीं मुद्दों को लेकर पदयात्रा का औपचारिक ऐलान कर दिया है।
BJP-VHP की प्रतिक्रिया पर रहेगी नजर
दिग्विजय सिंह के ताजा आरोपों और यात्रा की घोषणा पर BJP, RSS, VHP और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। खास तौर पर चंदे के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोपों के मामले में दोनों पक्षों का पक्ष सामने रखना जरूरी है। उपलब्ध ताजा सर्च में इस नई यात्रा की घोषणा पर BJP या VHP का विस्तृत औपचारिक जवाब नहीं मिला है।