दतिया, 10 सितंबर 2026 | दतिया की प्रसिद्ध श्री पीतांबरा पीठ परिसर स्थित प्राचीन वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा और दान व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू की है। लंबे अंतराल के बाद मंदिर परिसर में तीन दान पेटियां रखवाई गई हैं। इनमें एक दान पेटी शिवालय परिसर में स्थित हनुमान मंदिर के पास भी रखी गई है। इसके साथ ही मंदिर परिसर की निगरानी CCTV कैमरों और प्रशासनिक अमले के जरिए मजबूत की जा रही है। दतिया जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट वनखंडेश्वर मंदिर को पीतांबरा पीठ परिसर में स्थित महाभारतकालीन शिव मंदिर के रूप में उल्लेखित करती है।
श्रद्धालु अब सीधे दान पेटी में दे सकेंगे राशि
नई व्यवस्था के बाद श्रद्धालु अपनी इच्छा और श्रद्धा के अनुसार दान राशि सीधे निर्धारित दान पेटियों में डाल सकेंगे। प्रशासन का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को पूजा-दर्शन के दौरान किसी तरह की असुविधा न हो और दान का पूरा रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से रखा जाए। हाल ही में प्रशासन ने पीतांबरा पीठ और वनखंडेश्वर महादेव मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए कई फैसले लिए थे। इनमें दान राशि की गिनती CCTV और वीडियो रिकॉर्डिंग के बीच करने की व्यवस्था भी शामिल है।
पूजा और दान को लेकर मिली थीं शिकायतें
प्रशासन तक पिछले कुछ समय से श्रद्धालुओं की ओर से पूजा, अभिषेक और दान व्यवस्था को लेकर शिकायतें पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। कुछ श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया था कि मंदिर पहुंचते ही कुछ पांडा या अन्य लोग उनसे संपर्क करते हैं और पूजा-अभिषेक जैसी धार्मिक गतिविधियों के लिए राशि मांगी जाती है। इन शिकायतों की पुष्टि हर मामले में अलग से जरूरी है। इसलिए किसी पुजारी या सेवायत वर्ग को सामूहिक रूप से जिम्मेदार ठहराने के बजाय प्रशासन ने व्यवस्थागत बदलाव और निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया है।
दान पेटी खुलेगी तो CCTV में होगी पूरी गिनती
नई प्रशासनिक व्यवस्था के मुताबिक दान पेटियों को खोलने और राशि की गणना की प्रक्रिया भी निगरानी में होगी। पहले जारी निर्देशों के अनुसार दान पेटी खोलते समय कम से कम पांच अधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी जरूरी होगी और गिनती की पूरी प्रक्रिया CCTV तथा वीडियो रिकॉर्डिंग के बीच की जाएगी। दान राशि का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाएगा, ताकि बाद में हिसाब-किताब को लेकर कोई भ्रम न रहे।
अधिकारी और मंदिर प्रबंधन की मौजूदगी में होगी गणना
स्थानीय प्रशासनिक जानकारी के मुताबिक दान पेटियों को समय-समय पर मंदिर प्रबंधन और अधिकृत अधिकारियों की मौजूदगी में खोला जाएगा। दान में प्राप्त राशि की विधिवत गणना की जाएगी और उसका पूरा विवरण सुरक्षित रखा जाएगा। तहसील प्रशासन का कहना है कि व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुविधा देना और मंदिर की आर्थिक व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाना है।
मंदिर में CCTV Control Room की भी तैयारी
प्रशासन केवल दान पेटियों तक व्यवस्था सीमित नहीं रख रहा है। हाल में हुई बैठक में पूरे मंदिर परिसर में अतिरिक्त CCTV कैमरे लगाने और Dedicated Control Room स्थापित करने का भी फैसला किया गया था।
इसके जरिए प्रवेश-निकास, गर्भगृह के आसपास का क्षेत्र और मंदिर परिसर की दूसरी संवेदनशील जगहों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
अभिषेक की संख्या भी तय
वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में अभिषेक को लेकर भी प्रशासन ने नियम तय किए हैं। सामान्य दिनों में प्रतिदिन अधिकतम एक अभिषेक, जबकि सावन और विशेष पर्वों पर अधिकतम तीन अभिषेक कराने की व्यवस्था तय की गई है। इससे ज्यादा अभिषेक के लिए SDM की पूर्व अनुमति की जरूरत होगी और निर्धारित व्यवस्था के तहत QR Code आधारित रसीद जारी की जाएगी। इसका उद्देश्य पूजा व्यवस्था को नियंत्रित रखने के साथ श्रद्धालुओं को स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया उपलब्ध कराना है।
प्रवेश और निकास भी होंगे अलग
भीड़ प्रबंधन के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास को व्यवस्थित करने पर भी काम किया जा रहा है। प्रशासन ने अलग-अलग मार्ग तय करने और भीड़ का दबाव कम करने की योजना बनाई है। गर्भगृह, परिक्रमा पथ तथा प्रवेश-निकास क्षेत्र में पूजा-अभिषेक के निर्धारित समय को छोड़कर अनधिकृत रूप से बैठने या दूसरी गतिविधियों पर भी रोक लगाने का फैसला हुआ है।
पीतांबरा पीठ का बेहद खास है धार्मिक महत्व
दतिया की श्री पीतांबरा पीठ देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां मां बगलामुखी और धूमावती माता के मंदिर के साथ वनखंडेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर भी स्थित है। दतिया जिला प्रशासन के आधिकारिक विवरण के मुताबिक श्री वनखंडेश्वर को महाभारतकालीन शिव मंदिर माना जाता है। यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पीतांबरा पीठ आने के साथ वनखंडेश्वर महादेव के दर्शन और जलाभिषेक भी करते हैं।
नई व्यवस्था से श्रद्धालुओं को कितनी राहत?
फिलहाल दान पेटी, CCTV निगरानी और पूजा-अभिषेक के लिए नियम लागू किए जाने के बाद प्रशासन का दावा है कि मंदिर में पारदर्शिता और व्यवस्था बेहतर होगी। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि जमीन पर इन नियमों का कितना प्रभाव दिखाई देता है और श्रद्धालुओं को दर्शन तथा पूजा-अर्चना के दौरान पहले से बेहतर व्यवस्था मिलती है या नहीं।