मध्य प्रदेश सरकार ने कृषि उपज मंडियों की व्यवस्था में बड़े बदलाव करते हुए नए नियम लागू कर दिए हैं। अब प्रदेश की मंडियों में एक पंजीकृत व्यापारी को केवल एक ही दुकान आवंटित की जाएगी। इसके साथ ही दुकान, प्लॉट और गोदाम का आवंटन पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा। कृषि विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।
अब 30 साल का मिलेगा लाइसेंस
सरकार ने मंडी व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए लाइसेंस की अवधि 5 साल से बढ़ाकर 30 साल कर दी है।
अब 30 साल तक वैध रहेगा लाइसेंस।
बार-बार रिन्यू कराने की जरूरत नहीं होगी।
हर पांच साल बाद लाइसेंस फीस में 10% की वृद्धि होगी।
तय समय के बाद भुगतान करने पर 16% वार्षिक ब्याज के साथ लेट फीस देनी होगी।
एक व्यापारी को मिलेगी सिर्फ एक दुकान
नई व्यवस्था के तहत-
एक पंजीकृत व्यापारी को केवल एक दुकान आवंटित होगी।
दुकान, प्लॉट और गोदाम का आवंटन अब ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा।
ऑफलाइन आवंटन की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
नहीं बिके तो किराए पर दिए जाएंगे प्लॉट और दुकान
प्रदेश में वर्तमान में-
557 कृषि उपज मंडियां
करीब 35,000 दुकानें और प्लॉट
3,000 से अधिक गोदाम संचालित हैं। यदि किसी दुकान, प्लॉट या गोदाम की तीन बार नीलामी के बाद भी खरीदार नहीं मिलता है, तो उसे अधिकतम 3 वर्ष के लिए किराए पर दिया जाएगा। किराया कलेक्टर द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार तय होगा।
आवंटन के नए नियम
नीलामी से 15 दिन पहले विज्ञापन जारी करना होगा।
बोली की बयाना राशि ऑनलाइन जमा करनी होगी।
सफल बोलीदाता को 30 दिन के भीतर पूरी राशि जमा करनी होगी।
दुकान, प्लॉट या गोदाम आवंटन पर ₹10,000 प्रोसेसिंग फीस देनी होगी।
ट्रांसफर कराने पर कलेक्टर गाइडलाइन या सौदे की कीमत (जो अधिक हो) का 10% शुल्क देना होगा।
नए नियमों का उद्देश्य
सरकार का उद्देश्य मंडियों में आवंटन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना, ऑनलाइन व्यवस्था लागू करना और व्यापारियों को लंबी अवधि का लाइसेंस देकर प्रशासनिक प्रक्रिया को आसान बनाना है।