हैदराबाद - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विवाह संस्था और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बड़ा बयान दिया है। हैदराबाद में विश्व मांगल्य सभा द्वारा आयोजित 'समकालीन मातृत्व' विषयक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि विवाह केवल एक सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि ऐसा अनुशासन है जो व्यक्ति को धर्म, जिम्मेदारी और परिवार के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराता है।
'विवाह जिम्मेदारी का संस्कार देता है'
मोहन भागवत ने कहा कि विवाह व्यक्ति को जिम्मेदार बनाता है और जीवन में अनुशासन लाता है। उनके अनुसार, विवाह संस्था धर्म और परिवार के मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि समाज की स्थिरता और परिवार की मजबूती के लिए विवाह की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
लिव-इन रिलेशनशिप पर जताई चिंता
संघ प्रमुख ने कहा कि आज के समय में आधुनिकता के नाम पर लिव-इन रिलेशनशिप को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इसकी सोच जिम्मेदारियों से बचने वाली है। उन्होंने कहा कि लिव-इन का आधार स्थायी प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि सुविधा और व्यक्तिगत पसंद पर टिका होता है। उन्होंने कहा, "विवाह एक अनुशासन है, जो धर्म के संस्कार देता है। इसका विकल्प लिव-इन रिलेशनशिप है क्या? इसके परिणाम क्या हैं? हमें जिम्मेदारियां नहीं, बल्कि सिर्फ खुशी चाहिए। जब तक मन हो साथ रहो और जब मन न हो तो अलग हो जाओ। कोई जिम्मेदारी नहीं। इससे क्या बढ़ेगा? क्या बढ़ रहा है, दुनिया भर में यह देखा जा सकता है।"
'दुनिया देख रही है इसके परिणाम'
मोहन भागवत ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप के परिणाम अब दुनिया के कई देशों में सामने आ रहे हैं। उनका मानना है कि केवल व्यक्तिगत सुख को प्राथमिकता देने वाली जीवनशैली समाज और परिवार दोनों के लिए दीर्घकालिक चुनौतियां पैदा कर सकती है।
परिवार व्यवस्था को मजबूत करने पर दिया जोर
अपने संबोधन में उन्होंने परिवार संस्था को भारतीय संस्कृति की आधारशिला बताते हुए कहा कि समाज में नैतिक मूल्यों, जिम्मेदारी और पारिवारिक संस्कारों को मजबूत बनाए रखने के लिए विवाह संस्था का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि परिवार और मातृत्व की भूमिका समाज निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण है और आने वाली पीढ़ियों तक इन मूल्यों को पहुंचाना समय की जरूरत है।
