अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को ब्रेंट और अमेरिकी क्रूड ऑयल करीब 6% तक टूट गए। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिली है। हालांकि भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
अमेरिका-ईरान तनाव कम होने से टूटा कच्चा तेल
वीकेंड के दौरान अमेरिका ने ईरान पर हमले रोक दिए, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत की उम्मीद बढ़ गई। इसी सकारात्मक संकेत के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और कम होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है और कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
ब्रेंट और WTI क्रूड में 6% तक की गिरावट
सोमवार को कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव
| ऑयल बेंचमार्क | मौजूदा कीमत | गिरावट |
|---|---|---|
| ब्रेंट क्रूड | 91.42 डॉलर प्रति बैरल | 5.54% |
| WTI (अमेरिकी क्रूड) | 84.15 डॉलर प्रति बैरल | 5.78% |
क्यों गिरे कच्चे तेल के दाम?
कीमतों में गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका द्वारा सैन्य कार्रवाई रोकना माना जा रहा है। इससे निवेशकों को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ सकती है।
साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) और बाब-अल-मंडेब मार्ग से तेल आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य होने की संभावना भी बनी है। हालांकि शिपिंग कंपनियां अभी भी सुरक्षा कारणों से सतर्क हैं।
क्या भारत में पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों, डॉलर-रुपया विनिमय दर, टैक्स और अन्य लागतों को देखते हुए कीमतों की समीक्षा करती हैं।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक सस्ता बना रहता है, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बन सकती है।
देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| मुंबई | 111.21 | 97.83 |
| हैदराबाद | 110+ | 103.82 |
| चेन्नई | 100+ | 100.92 |
नोट: अन्य शहरों में भी कीमतें स्थानीय करों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
कमोडिटी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक समाधान आगे बढ़ता है और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी आ सकती है। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, इसलिए बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं होता। इससे परिवहन लागत कम हो सकती है, महंगाई पर दबाव घट सकता है और कई उपभोक्ता वस्तुओं की लागत पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।