देश के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और पारंपरिक बीजों की अमूल्य विरासत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उपभोक्ता मामले विभाग के अंतर्गत भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। BIS ने कम्युनिटी सीड बैंक (Community Seed Bank) के संचालन और प्रबंधन के लिए नया भारतीय मानक IS 20201:2026 जारी किया है। यह मानक देशभर में सामुदायिक स्तर पर संचालित सीड बैंकों के लिए एक व्यवस्थित और मानकीकृत ढांचा प्रदान करेगा।
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच लिया गया फैसला
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय कृषि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का सामना कर रही है। अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान, सूखे की लंबी अवधि और बदलते मौसम चक्र कृषि उत्पादन को प्रभावित कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की पारंपरिक और स्वदेशी बीज किस्मों में ऐसी विशेषताएं मौजूद हैं जो उन्हें इन चुनौतियों से लड़ने में सक्षम बनाती हैं। इनमें सूखा सहने की क्षमता, रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर पोषण मूल्य जैसे गुण शामिल हैं।
क्या है कम्युनिटी सीड बैंक?
कम्युनिटी सीड बैंक एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें स्थानीय समुदाय और किसान पारंपरिक तथा स्वदेशी बीजों को एकत्रित, संरक्षित और साझा करते हैं। इसका उद्देश्य दुर्लभ और स्थानीय बीजों की किस्मों को सुरक्षित रखना तथा किसानों को जरूरत के समय गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना होता है। नया मानक इन सीड बैंकों के संचालन को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने में मदद करेगा।
IS 20201:2026 में क्या होंगे प्रमुख दिशा-निर्देश?
- BIS द्वारा जारी मानक के तहत कम्युनिटी सीड बैंक के संचालन से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं। इनमें शामिल हैं—
- बीजों का संग्रहण और चयन
- बीजों की प्रोसेसिंग
- सुरक्षित भंडारण व्यवस्था
- गुणवत्ता परीक्षण
- दस्तावेजीकरण और रिकॉर्ड प्रबंधन
- जोखिम प्रबंधन
- बीज पुनर्जनन (Seed Regeneration)
- समुदाय आधारित बीज आदान-प्रदान प्रणाली
- इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य बीजों की गुणवत्ता बनाए रखना और उनकी दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
केंद्र सरकार की योजनाओं को मिलेगा बल
यह नया मानक केंद्र सरकार की कृषि और खाद्य सुरक्षा संबंधी योजनाओं को भी मजबूती प्रदान करेगा। विशेष रूप से नेशनल फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन मिशन (NFSNM) के तहत कम्युनिटी सीड बैंक स्थापित करने के लिए 50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। सरकार का मानना है कि मानकीकृत व्यवस्था लागू होने से इन योजनाओं का लाभ किसानों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।
प्रधानमंत्री के सतत कृषि विजन के अनुरूप पहल
BIS ने बताया कि यह मानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत कृषि, कृषि जैव विविधता संरक्षण और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के विजन के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल बीज संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि क्षेत्र को भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम और लचीला बनाना भी है।
कई राष्ट्रीय संस्थानों ने मिलकर तैयार किया मानक
IS 20201:2026 का मसौदा तैयार करने में कई प्रतिष्ठित संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसका नेतृत्व ICAR-National Bureau of Plant Genetic Resources ने किया। इसके अलावा National Biodiversity Authority, Protection of Plant Varieties and Farmers' Rights Authority तथा अन्य विशेषज्ञ संस्थानों ने भी इस प्रक्रिया में सहयोग दिया।
छोटे किसानों को होगा सबसे अधिक लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल का सबसे बड़ा लाभ छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा। उन्हें स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होंगे, महंगे व्यावसायिक बीजों पर निर्भरता कम होगी और खेती की लागत घटाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही पारंपरिक बीजों की विविधता संरक्षित रहने से देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी।
BIS ने हितधारकों से अपनाने की अपील की
भारतीय मानक ब्यूरो ने सभी कम्युनिटी सीड बैंक, सहकारी समितियों, किसान समूहों और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों से इस नए मानक को अपनाने की अपील की है। सरकार का मानना है कि यदि इस मानक को व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है, तो यह किसानों की आजीविका सुरक्षा, कृषि जैव विविधता संरक्षण और देश की दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।