नई दिल्ली - गुरुवार को हुई नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विकास और तकनीकी भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने राज्यों से कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के अवसरों का उपयोग करते समय साइबर धोखाधड़ी और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए भी समान रूप से तैयार रहना होगा।
AI को अवसर और चुनौती दोनों बताया
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) देश के विकास के लिए बड़ा अवसर है, लेकिन इसके साथ कई सामाजिक और सुरक्षा संबंधी खतरे भी जुड़े हैं। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे तकनीक को अपनाने के साथ-साथ इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए मजबूत सिस्टम विकसित करें। उन्होंने विशेष रूप से साइबर क्राइम और ऑनलाइन फ्रॉड जैसी बढ़ती समस्याओं पर चिंता जताई और इनके खिलाफ सतर्कता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
अल-नीनो और जल संकट पर चेतावनी
बैठक में प्रधानमंत्री ने अल-नीनो की संभावित स्थितियों से जुड़े मौसमीय जोखिमों के प्रति भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम पैटर्न और अल-नीनो जैसी घटनाएं कृषि और जल संसाधनों पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं। इसी को देखते हुए उन्होंने जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने और इसके लिए राज्यों को अधिक प्रभावी कदम उठाने का सुझाव दिया।
आत्मनिर्भरता और निवेश पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देश को विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना चाहिए। उन्होंने हाल के अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का भी उल्लेख किया और राज्यों से आग्रह किया कि वे युवाओं और MSME sector के लिए अधिक अवसर पैदा करें।
राज्यों से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विकास यात्रा आज दुनिया के लिए एक प्रेरणा बन रही है, लेकिन इसे और मजबूत बनाने के लिए राज्यों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने निवेश आकर्षित करने, उद्योगों को बढ़ावा देने और वैश्विक साझेदारियों का लाभ उठाने के लिए सक्रिय प्रयास करने की जरूरत बताई। नीति आयोग की इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी का संदेश साफ था—भारत को आगे बढ़ाने के लिए तकनीक, सुरक्षा और सतत विकास के बीच संतुलन जरूरी है। AI जैसी आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए देश को जल, ऊर्जा और सामाजिक सुरक्षा जैसी चुनौतियों पर भी समान ध्यान देना होगा।