नई दिल्ली: नीट (NEET) समेत देश भर की तमाम ऑल इंडिया प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोपों के बीच केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने वाले माफिया और आपराधिक तत्वों पर शिकंजा कसने के लिए सरकार अब और अधिक कठोर कानून लाने जा रही है।शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' को मंजूरी दे दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने इस बिल को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इसे जल्द से जल्द संसद में पेश करने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि इस विधेयक को कल ही लोकसभा के पटल पर रखा जा सकता है।
नए संशोधन बिल की प्रमुख बातें और कड़े प्रावधान
वर्ष 2024 के मूल कानून की तुलना में इस नए संशोधन विधेयक में सजा और जुर्माने की दरों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी की गई है, ताकि परीक्षा माफियाओं में खौफ पैदा किया जा सके: सजा और जुर्माना: व्यक्तिगत रूप से धांधली या पेपर लीक में शामिल पाए जाने पर न्यूनतम सजा को 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है। वहीं अधिकतम सजा 5 साल से बढ़ाकर 10 साल जेल करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही अधिकतम जुर्माना ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दिया गया है।

एजेंसी या सर्विस प्रोवाइडर पर नकेल: परीक्षा आयोजित करने वाली किसी एजेंसी या सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के खिलाफ अगर पेपर लीक का आरोप साबित होता है, तो उस पर ₹5 करोड़ तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही ऐसी संस्थाओं पर सरकारी परीक्षा आयोजित करने पर लगा बैन 4 साल से बढ़ाकर 8 साल कर दिया गया है।
अधिकारियों पर कार्रवाई: दोषी पाई गई एजेंसी के निदेशकों (Directors) और शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कम से कम 5 साल की जेल और ₹5 करोड़ तक के व्यक्तिगत जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।संगठित अपराध पर कड़ा प्रहार: गिरोह बनाकर (Organized Crime) बड़े पैमाने पर पेपर लीक कराने वाले सिंडिकेट के लिए न्यूनतम 7 साल की कैद और ₹10 करोड़ तक के भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है।
2 महीने में जांच पूरी और फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन
जांच और अदालती कार्यवाही में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए भी बिल में ऐतिहासिक प्रावधान किए गए हैं:
- विशेष STF का गठन: किसी भी मामले की त्वरित जांच के लिए केंद्र सरकार के पास विशेष टास्क फोर्स (STF) बनाने की शक्ति होगी। जरूरत पड़ने पर मामला तुरंत केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI) को सौंपा जाएगा। नए नियम के तहत जांच अधिकतम 2 महीने (60 दिन)** के भीतर पूरी करनी होगी।
- फास्ट ट्रैक कोर्ट: त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर रोजाना सुनवाई (Day-to-Day Hearing) चलाकर केस का निपटारा करना अनिवार्य होगा। वर्तमान में लंबित मामले भी इन अदालतों में ट्रांसफर होंगे।
- हाईकोर्ट में अपील का दायरा: फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ संबंधित उच्च न्यायालय (High Court) की डिवीजन बेंच में अपील की जा सकेगी, जिसका निपटारा भी 3 महीने की समयसीमा के भीतर करने का प्रयास किया जाएगा।
केंद्र सरकार का दावा है कि इस संशोधन से देश में होने वाली सरकारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और सुरक्षा का माहौल मजबूत होगा। हालांकि, संसद में बिल पेश होने के बाद पेपर लीक और परीक्षा सुधार के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस और सियासी घमासान होना तय माना जा रहा है।