लोकसभा की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमेरिकी व्यापार समझौते पर सरकार को कड़े शब्दों में घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समझौता समानता और पारस्परिक लाभ के सिद्धांत पर आधारित नहीं है, बल्कि इससे भारतीय कृषि और कपड़ा उद्योग पर गहरा आघात पहुंचेगा। राहुल गांधी के अनुसार यह पहला अवसर है जब भारतीय किसान एक वैश्विक तूफान का प्रत्यक्ष सामना करने के लिए मजबूर किए जा रहे हैं।
किसानों पर संकट, अमेरिकी कृषि को बढ़त देने का आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि मक्का, सोयाबीन, लाल ज्वार और कपास जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों के क्षेत्र में भारत ने अमेरिका के लिए रास्ता खोल दिया है, जबकि अमेरिका की कृषि अत्यधिक मशीनीकृत है। उनके अनुसार यह स्थिति भारतीय किसानों की प्रतिस्पर्धा को असंभव बना देगी और वे आर्थिक दबाव में कुचल जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक किसी प्रधानमंत्री ने किसानों को इस तरह की चुनौती के सामने नहीं खड़ा किया और भविष्य में भी कोई ऐसा नहीं करेगा।
टेक्सटाइल सेक्टर पर खतरे का साया, लाखों रोजगार दांव पर
राहुल गांधी ने अपने भाषण में भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने बांग्लादेश पर टेक्सटाइल टैरिफ शून्य कर दिया है, जबकि भारत के उत्पादों पर 18 प्रतिशत तक का शुल्क लगा दिया गया है। इस स्थिति में कपड़ा उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता खत्म हो जाएगी और अधिकांश उद्योग बांग्लादेश की ओर शिफ्ट होने को बाध्य होंगे। इससे न केवल उत्पादन प्रभावित होगा बल्कि लाखों श्रमिकों की आजीविका भी संकट में पड़ जाएगी।
ऊर्जा सुरक्षा पर भी सवाल, तेल खरीद नीति पर उठाए गंभीर प्रश्न
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस समझौते के बाद अब अमेरिका यह तय करेगा कि भारत किस देश से ऊर्जा खरीदेगा। उन्होंने कहा कि रूस और ईरान से कच्चा तेल लेने का फैसला भारत का होना चाहिए, न कि किसी अन्य देश का। ऊर्जा क्षेत्र में बाहरी दबाव को उन्होंने गंभीर संप्रभुता संकट बताते हुए कहा कि इससे भविष्य में देश की ऊर्जा जरूरतें और भी असुरक्षित हो सकती हैं।
भारत को बेचने का गंभीर आरोप, सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि इस डील के माध्यम से भारत के राष्ट्रीय हितों को गिरवी रख दिया गया है। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक, कृषि और ऊर्जा व्यवस्था को कमजोर करने वाले किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उनके बयान ने सदन में तीखी बहस और राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया।
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