जयपुर: राजस्थान में चुनावी व्यवस्था को लेकर भजनलाल शर्मा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश में ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार के इस फैसले के बाद अब पंचायतों और शहरी निकायों के चुनाव अलग-अलग समय पर कराने के बजाय एक साथ कराने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।कैबिनेट बैठक के बाद डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा, कानून मंत्री जोगाराम पटेल और उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार के फैसलों की जानकारी दी।
पंचायत और शहरी निकाय चुनाव एक साथ कराने की तैयारी
राज्य सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, नवंबर तक जिन पंचायतों और शहरी निकायों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनके चुनाव एक साथ कराने की तैयारी की जाएगी।सरकार का उद्देश्य प्रदेश में बार-बार चुनाव होने की स्थिति को कम करना है। अलग-अलग समय पर चुनाव होने से प्रशासनिक मशीनरी, सुरक्षा बलों और सरकारी संसाधनों पर लगातार दबाव बना रहता है। ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ व्यवस्था के जरिए इस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, चुनाव कराने की पूरी प्रक्रिया में न्यायालय के निर्देशों का पालन किया जाएगा। यानी चुनाव कार्यक्रम, आरक्षण और अन्य संवैधानिक प्रक्रियाएं संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही आगे बढ़ेंगी।
OBC आरक्षण को लेकर भी कैबिनेट ने लिया फैसला
स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण को लेकर भी कैबिनेट बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय हुआ है। सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है। अब इसी रिपोर्ट के आधार पर स्थानीय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
राज्य सरकार की ओर से आरक्षण से संबंधित सिफारिश राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी। इसके बाद चुनावी प्रक्रिया में आरक्षित और सामान्य सीटों का निर्धारण संबंधित नियमों के अनुसार किया जाएगा।यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में आरक्षण का सीधा असर चुनावी समीकरणों पर पड़ता है। ऐसे में ओबीसी आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद चुनाव की तैयारियों को गति मिलने की संभावना है।
महिलाओं को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व
सरकार के फैसले के अनुसार नगर निकायों में 33 प्रतिशत और पंचायतीराज संस्थाओं में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण के आधार पर सीटों का निर्धारण किया जाएगा।इस व्यवस्था का उद्देश्य पंचायत से लेकर शहरी निकायों तक महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देना है। आरक्षण के आधार पर सीटों के निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी तस्वीर और अधिक स्पष्ट होगी।
‘राज्य मजदूरी संहिता-2026’ को मंजूरी
कैबिनेट बैठक में श्रमिकों और कर्मचारियों से जुड़ा एक अहम फैसला भी लिया गया। सरकार ने ‘राज्य मजदूरी संहिता-2026’ को मंजूरी प्रदान की है। नई व्यवस्था में वेतन से जुड़े नियमों को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया है।नई संहिता के तहत साल में दो बार वेतन संशोधन किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा कर्मचारियों को वेतन पर्ची यानी Salary Slip देना भी अनिवार्य होगा।
वेतन पर्ची अनिवार्य किए जाने से कर्मचारियों को उनके वेतन, कटौती और अन्य भुगतान का स्पष्ट रिकॉर्ड मिल सकेगा। इससे वेतन संबंधी विवादों को कम करने और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीति
राजस्थान सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘एग्रो फूड प्रोसेसिंग नीति-2026’ को भी मंजूरी दी है। सरकार का फोकस कृषि उत्पादों को केवल कच्चे माल के तौर पर बेचने के बजाय उनके प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने पर रहेगा।
इस नीति के जरिए राज्य में कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने की योजना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोसेसिंग यूनिट, स्टोरेज और इससे जुड़े दूसरे कारोबार विकसित होने की संभावना है।
सरकार का मानना है कि कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग बढ़ने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
एक ही कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले
राजस्थान सरकार की कैबिनेट बैठक को आने वाले समय की प्रशासनिक और चुनावी व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के फैसले से जहां पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को एक साथ कराने की दिशा में रास्ता साफ हुआ है, वहीं OBC आरक्षण और महिला आरक्षण से जुड़े निर्णयों से स्थानीय चुनावों की तैयारियों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा मजदूरी संहिता और एग्रो फूड प्रोसेसिंग नीति जैसे फैसलों का सीधा संबंध रोजगार, श्रमिक हित और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से है। अब आने वाले दिनों में चुनावी कार्यक्रम, आरक्षण प्रक्रिया और संबंधित प्रशासनिक तैयारियों पर नजर रहेगी।
सरकार के फैसलों का व्यापक असर
राजस्थान में ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ लागू होने की दिशा में उठाया गया कदम राज्य की चुनावी व्यवस्था में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। यदि पंचायत और शहरी निकाय चुनाव एक साथ होते हैं, तो राजनीतिक दलों के साथ-साथ प्रशासन को भी एकीकृत चुनावी रणनीति के अनुसार तैयारी करनी होगी।
वहीं, OBC और महिला आरक्षण से सीटों के स्वरूप में बदलाव आएगा। दूसरी ओर, मजदूरी संहिता और एग्रो फूड प्रोसेसिंग नीति के जरिए सरकार ने श्रमिक हितों के साथ-साथ कृषि आधारित रोजगार और उद्योग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है।
अब इन फैसलों के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण चुनावी प्रक्रिया और आरक्षण से संबंधित औपचारिक तैयारियों का होगा। न्यायालय के निर्देशों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप आगे की कार्रवाई पूरी की जाएगी।