CG Krishi Vishwavidyalaya DA Hike: रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने रिटायर्ड कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का आदेश जारी किया है। अब महंगाई भत्ता 55 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारी पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य रिटायरमेंट लाभ से जुड़े मामलों के समाधान की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पेंशन से जुड़े मामलों की मौजूदा स्थिति को लेकर भी जानकारी दी गई है। प्रशासन के मुताबिक हाल ही में सेवानिवृत्त हुए 42 प्राध्यापकों और वैज्ञानिकों के मामलों में अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई चल रही है। इनमें से कुछ कर्मचारियों को 90 प्रतिशत पेंशन का भुगतान शुरू हो चुका है, जबकि अन्य मामलों को सत्यापन और शासन से मार्गदर्शन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।
रिटायर्ड कर्मचारियों का DA 55% से बढ़कर 58%
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने अपने सेवानिवृत्त प्राध्यापकों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। पहले पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 55 प्रतिशत DA मिल रहा था, जिसे अब बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस संबंध में औपचारिक आदेश भी जारी कर दिया है। DA में यह वृद्धि रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि महंगाई बढ़ने के साथ पेंशन पर निर्भर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए नियमित आर्थिक राहत काफी मायने रखती है। विश्वविद्यालय की ओर से पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़े मामलों को भी प्राथमिकता के साथ निपटाने की बात कही गई है।
पेंशन और ग्रेच्युटी के मामलों पर भी चल रही कार्रवाई
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और वैज्ञानिकों की पेंशन, ग्रेच्युटी तथा अन्य रिटायरमेंट बेनिफिट से संबंधित मामलों का परीक्षण और निराकरण लगातार किया जा रहा है। यह प्रक्रिया कई स्तरों पर पूरी की जा रही है। कुछ मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है, जबकि कुछ मामलों में सेवा शर्तों और नियुक्ति से संबंधित पुराने रिकॉर्ड की जांच के कारण प्रक्रिया आगे बढ़ने में समय लग रहा है। विश्वविद्यालय का कहना है कि पात्र कर्मचारियों को नियमानुसार लाभ दिलाने के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
42 रिटायर्ड प्राध्यापकों और वैज्ञानिकों के मामलों की क्या स्थिति है?
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक हाल के समय में सेवानिवृत्त हुए कुल 42 प्राध्यापकों और वैज्ञानिकों के पेंशन मामलों पर काम किया जा रहा है। इनमें से 15 कर्मचारियों को 90 प्रतिशत पेंशन स्वीकृत हो चुकी है और उसका भुगतान भी किया जा रहा है। वहीं, 15 अन्य मामलों को सत्यापन के लिए स्थानीय निधि संपरीक्षा संचालनालय (Audit Directorate) भेजा गया है। वहां से आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद इन मामलों में भी भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके अलावा 12 मामले अभी प्रक्रिया में हैं। इन मामलों में दस्तावेजों और संबंधित सेवा रिकॉर्ड की जांच सहित आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
15 पेंशन मामलों को सत्यापन के लिए भेजा गया
पेंशन से जुड़े 15 मामलों को विश्वविद्यालय स्तर पर आगे की जांच के लिए स्थानीय निधि संपरीक्षा संचालनालय भेजा गया है। इन मामलों में संबंधित दस्तावेजों और सेवा से जुड़े रिकॉर्ड का परीक्षण किया जाएगा। ऑडिट स्तर पर प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद विश्वविद्यालय की ओर से पेंशन भुगतान आगे बढ़ाया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पेंशन स्वीकृति नियमों और उपलब्ध सेवा रिकॉर्ड के अनुरूप हो।
12 मामलों में अभी जारी है प्रक्रिया
कुल 42 मामलों में से 15 को पेंशन का लाभ मिलना शुरू हो चुका है और 15 मामलों को सत्यापन के लिए भेजा गया है। बाकी 12 मामले अभी प्रक्रिया में हैं। इन मामलों में देरी के पीछे अलग-अलग प्रशासनिक और सेवा संबंधी कारण बताए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन इन मामलों को भी संबंधित स्तर पर आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में है। इससे स्पष्ट है कि सभी रिटायर्ड कर्मचारियों के मामले एक ही स्थिति में नहीं हैं। कुछ को अंतरिम राहत मिल रही है, जबकि कुछ मामलों में अंतिम स्वीकृति का इंतजार है।
सेवा नियमों में विसंगतियों के कारण भी अटके कुछ मामले
विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों के मामलों में उनकी नियुक्ति और सेवा शर्तों से जुड़े रिकॉर्ड में विसंगतियां सामने आई हैं। इन विसंगतियों के कारण लेखा और ऑडिट स्तर पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। ऐसे मामलों में विश्वविद्यालय अपने स्तर पर अंतिम निर्णय नहीं ले पा रहा है। इसी वजह से संबंधित प्रकरणों को राज्य शासन के पास मार्गदर्शन के लिए भेजा गया है। शासन से दिशा-निर्देश मिलने के बाद इन मामलों में आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
विवादित मामलों में भी 90% पेंशन की अंतरिम राहत
जिन मामलों में सेवा शर्तों या नियुक्ति से जुड़े सवालों के कारण अंतिम रूप से पेंशन तय नहीं हो पाई है, उनमें भी विश्वविद्यालय ने प्रभावित कर्मचारियों को राहत देने की कोशिश की है। प्रशासन के मुताबिक ऐसे कर्मचारियों को मानवीय आधार पर 90 प्रतिशत पेंशन अंतरिम राहत के रूप में दी जा रही है। इस व्यवस्था से उन सेवानिवृत्त कर्मचारियों को तत्काल आर्थिक सहायता मिल रही है, जिनके मामलों का अंतिम समाधान अभी बाकी है।
आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय की ओर से दी गई जानकारी
पेंशन और ग्रेच्युटी समेत सेवानिवृत्ति लाभ की मांग को लेकर रिटायर्ड कर्मचारियों की ओर से आंदोलन किया जा रहा है। इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने DA बढ़ाने और लंबित पेंशन मामलों की स्थिति को लेकर जानकारी सामने रखी है। DA में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी और पेंशन मामलों में हो रही कार्रवाई से रिटायर्ड कर्मचारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, जिन कर्मचारियों के मामले अभी शासन या ऑडिट स्तर पर लंबित हैं, उनके लिए अंतिम निर्णय और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होना महत्वपूर्ण रहेगा।
साइंटिस्ट की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का प्रस्ताव भी शासन के पास
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में वैज्ञानिकों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से जुड़ा प्रस्ताव भी चर्चा में है।विश्वविद्यालय ने बताया कि वैज्ञानिकों की रिटायरमेंट उम्र 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने के प्रस्ताव को प्रबंध मंडल की मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद प्रस्ताव को राज्य शासन के पास भेज दिया गया है। अब इस विषय पर शासन से मार्गदर्शन और निर्णय का इंतजार है। यदि प्रस्ताव को राज्य सरकार की मंजूरी मिलती है, तो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की सेवानिवृत्ति आयु में तीन वर्ष की वृद्धि हो सकती है। हालांकि, फिलहाल इस संबंध में अंतिम निर्णय शासन स्तर पर होना बाकी है।
DA बढ़ोतरी से रिटायर्ड कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?
महंगाई भत्ते में 55 से 58 प्रतिशत की बढ़ोतरी सीधे तौर पर पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करेगी। DA का उद्देश्य महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए पेंशनभोगियों को अतिरिक्त आर्थिक राहत देना होता है। ऐसे में तीन प्रतिशत की वृद्धि से संबंधित कर्मचारियों को पहले की तुलना में अधिक महंगाई भत्ता मिलेगा। वहीं, पेंशन और ग्रेच्युटी से जुड़े लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया आगे बढ़ने से उन कर्मचारियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अभी पूर्ण लाभ का इंतजार है।
आगे क्या होगा?
अब विश्वविद्यालय स्तर पर लंबित 12 मामलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। दूसरी ओर, सत्यापन के लिए भेजे गए 15 मामलों में स्थानीय निधि संपरीक्षा संचालनालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भुगतान का रास्ता साफ हो सकता है। जिन मामलों में सेवा नियमों से जुड़ी आपत्तियां हैं, उनमें राज्य शासन के मार्गदर्शन का इंतजार रहेगा। साथ ही वैज्ञानिकों की रिटायरमेंट आयु बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी शासन का फैसला महत्वपूर्ण होगा। कुल मिलाकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से DA बढ़ाने के साथ पेंशन मामलों के निपटारे की दिशा में उठाए गए कदम रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए राहत देने वाले हैं।