नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विपक्षी दलों से अलग होकर एनडीए के साथ आए सांसदों के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग की। बैठक में प्रधानमंत्री ने सांसदों से संसद की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी करने और बहस के दौरान अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने की अपील की। इस दौरान उन्होंने सांसदों को भरोसा दिलाया कि उन्हें किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
पीएम मोदी ने कहा- NDA एक परिवार है
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों से कहा कि एनडीए सिर्फ राजनीतिक गठबंधन नहीं बल्कि एक परिवार की तरह है। उन्होंने सांसदों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे उनके साथ हैं और उन्हें किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। पीएम मोदी ने हाल ही में शिवसेना में शामिल हुए छह सांसदों के साथ अलग से भी मुलाकात की। इन सांसदों ने ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टियों से अलग होकर एनडीए का रुख किया है।
संसद की बहस में सक्रिय रहने की सलाह
प्रधानमंत्री ने सांसदों को संसद की डिबेट में ज्यादा सक्रियता के साथ हिस्सा लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर सदन में बोलने से पहले पूरी तैयारी जरूरी है। पीएम मोदी ने सांसदों से संसदीय इतिहास को पढ़ने, समझने और पुराने रिकॉर्ड का अध्ययन करने को कहा। उन्होंने बताया कि संसद में इतिहास और विभिन्न विषयों से संबंधित काफी सामग्री उपलब्ध है, जिसका इस्तेमाल सांसद अपनी बहस की तैयारी के लिए कर सकते हैं।
राज्यों के विकास पर भी दिया जोर
बैठक में प्रधानमंत्री ने सांसदों को अपने-अपने राज्यों के विकास पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि राज्यों की प्रगति देश की समग्र तरक्की से सीधे जुड़ी हुई है। प्रधानमंत्री ने सांसदों से अपने क्षेत्रों की समस्याओं को समझने और विकास से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रभावी तरीके से उठाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब राज्य मजबूत और विकसित होंगे, तभी देश भी आगे बढ़ेगा।
नए सांसदों को संसदीय भूमिका समझने का संदेश
ब्रेकफास्ट मीटिंग को उन सांसदों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो हाल ही में एनडीए के साथ जुड़े हैं। प्रधानमंत्री की सलाह का फोकस संसदीय कार्यप्रणाली को समझने, सदन में प्रभावी भागीदारी करने और अपने क्षेत्रों के विकास के लिए सक्रिय भूमिका निभाने पर रहा। बैठक के जरिए पीएम मोदी ने सांसदों को राजनीतिक बदलाव के बाद नई जिम्मेदारियों के लिए तैयार रहने और संसद में अपनी भूमिका मजबूत करने का संदेश दिया।