नई दिल्ली, 7 अगस्त 2026 | देश के विभिन्न हिस्सों में जारी तेज मानसूनी बारिश के बीच एल नीनो को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के नवीनतम विस्तारित पूर्वानुमान के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मध्यम एल नीनो की स्थिति सक्रिय है और दक्षिण-पश्चिम मानसून के शेष हिस्से में इसके और मजबूत होने की संभावना है हालांकि, एल नीनो सक्रिय होने का अर्थ यह नहीं है कि देश के हर हिस्से में बारिश तत्काल बंद हो जाएगी। यह मौसमी स्तर पर बारिश की संभावना और वितरण को प्रभावित करता है। स्थानीय स्तर पर मानसूनी द्रोणिका, चक्रवाती परिसंचरण, बंगाल की खाड़ी से मिलने वाली नमी और पश्चिमी विक्षोभ जैसे सिस्टम कम समय में तेज से बहुत तेज बारिश करा सकते हैं।
आज इन क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश
IMD के नवीनतम उपलब्ध राष्ट्रीय बुलेटिन के अनुसार 7 अगस्त को इन क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है:
- केरल एवं माहे
- ओडिशा
- पूर्वी मध्य प्रदेश
- पूर्वी राजस्थान
- तटीय कर्नाटक
- दक्षिण आंतरिक कर्नाटक
यह पूर्वानुमान 7 अगस्त सुबह 8:30 बजे से 8 अगस्त सुबह 8:30 बजे तक की अवधि के लिए है।
इन राज्यों में कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी
अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय क्षेत्र, हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, लक्षद्वीप, मध्य महाराष्ट्र, नागालैंड-मणिपुर-मिजोरम-त्रिपुरा, उत्तर आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु-पुडुचेरी-कराईकल, उत्तराखंड और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।
| चेतावनी की श्रेणी | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|
| भारी से बहुत भारी बारिश | केरल, ओडिशा, पूर्वी राजस्थान, पूर्वी मध्य प्रदेश, तटीय एवं दक्षिण आंतरिक कर्नाटक |
| कहीं-कहीं भारी बारिश | दिल्ली-हरियाणा, पूर्वी यूपी, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिमी MP, हिमाचल, उत्तराखंड, पूर्वोत्तर भारत |
| बिजली और तेज हवा | बिहार, झारखंड, MP, ओडिशा, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के हिस्से |
| तेज सतही हवा | कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप, रायलसीमा और तेलंगाना |
क्या वास्तव में एल नीनो सक्रिय हो चुका है?
हां। IMD के 6 अगस्त के विस्तारित पूर्वानुमान में मध्यम एल नीनो की स्थिति सक्रिय बताई गई है। समुद्र की सतह का तापमान मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत में सामान्य से ऊपर है और मानसून मिशन मॉडल इसके आगे मजबूत होने का संकेत दे रहा है।
अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA का भी कहना है कि एल नीनो जारी है और वर्ष के अंत तक मजबूत होगा। NOAA ने इसके 2027 की शुरुआती वसंत ऋतु तक बने रहने की 97 प्रतिशत संभावना बताई है। अक्टूबर-दिसंबर 2026 में इसके अत्यंत मजबूत श्रेणी में पहुंचने की संभावना भी जताई गई है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने जुलाई-सितंबर के दौरान मजबूत एल नीनो विकसित होने का अनुमान जताया है। WMO के मॉडल भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम बारिश की संभावना बढ़ने का संकेत देते हैं, लेकिन यह एक संभाव्यता आधारित अनुमान है—हर क्षेत्र में समान परिणाम की गारंटी नहीं।
एल नीनो के बावजूद इतनी तेज बारिश क्यों?
एल नीनो मानसून को चालू या बंद करने वाला स्विच नहीं है। यह पूरे सीजन की बारिश के औसत और उसके वितरण पर असर डालने वाली एक महत्वपूर्ण वैश्विक मौसमी परिस्थिति है।
मौजूदा समय में मानसूनी द्रोणिका अपनी सामान्य स्थिति के आसपास है। बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके अलावा पश्चिमी हिमालय पर पश्चिमी विक्षोभ और MJO की सक्रिय स्थिति क्षेत्रीय बारिश को समर्थन दे रही है। इन सिस्टमों के कारण एल नीनो के बीच भी कुछ राज्यों में बेहद तेज बारिश हो सकती है।
इसीलिए किसी शहर में बाढ़ या मूसलाधार बारिश दिखना पूरे देश में सामान्य या अधिक मानसून होने का प्रमाण नहीं होता। मानसूनी बारिश की स्थिति का आकलन लंबी अवधि, व्यापक क्षेत्र और सामान्य औसत से तुलना के आधार पर किया जाता है।
पिछले सप्ताह ज्यादा बारिश, फिर भी सीजन में घाटा
30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच देशभर में सामान्य से सात प्रतिशत अधिक बारिश हुई। इसके बावजूद 1 जून से 6 अगस्त तक का कुल मानसूनी आंकड़ा सामान्य से 11 प्रतिशत कम है।
| क्षेत्र | वास्तविक बारिश | सामान्य बारिश | अंतर |
|---|---|---|---|
| पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत | 606.4 मिमी | 815.5 मिमी | -26% |
| उत्तर-पश्चिम भारत | 295.4 मिमी | 330.2 मिमी | -11% |
| मध्य भारत | 566.8 मिमी | 561.3 मिमी | +1% |
| दक्षिणी प्रायद्वीप | 330.7 मिमी | 405.8 मिमी | -19% |
| पूरा देश | 443.2 मिमी | 500.2 मिमी | -11% |
ये आंकड़े 1 जून से 6 अगस्त 2026 की अवधि के हैं। IMD की तकनीकी श्रेणी में देश का 11 प्रतिशत घाटा अभी ‘सामान्य’ सीमा के भीतर है, क्योंकि सामान्य श्रेणी -19 से +19 प्रतिशत तक मानी जाती है।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा वर्षा घाटा?
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार मेघालय में मानसूनी बारिश सामान्य से 56 प्रतिशत कम है। अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में 36-36 प्रतिशत, बिहार और आंध्र प्रदेश में 35-35 प्रतिशत, पंजाब में 34 प्रतिशत और झारखंड में 27 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है।
इसके उलट ओडिशा में सामान्य से 24 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। मध्य भारत का सामूहिक आंकड़ा भी सामान्य से एक प्रतिशत ऊपर है, जबकि पूर्वोत्तर और दक्षिणी प्रायद्वीप में बड़ा क्षेत्रीय घाटा बना हुआ है।
‘देश के हर कोने में जोरदार बारिश’ लिखना क्यों भ्रामक हो सकता है?
अलग-अलग राज्यों में तेज बारिश की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि पूरे देश में समान रूप से पर्याप्त वर्षा हुई है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत, दक्षिणी प्रायद्वीप और उत्तर-पश्चिम के कई राज्यों में संचयी बारिश सामान्य से कम है।
अधिक सटीक भाषा होगी—“देश के कई हिस्सों में तेज बारिश के दौर जारी हैं, लेकिन मानसूनी वर्षा का कुल और क्षेत्रीय वितरण अब भी असमान है।”
आंध्र प्रदेश और झारखंड के रेड अलर्ट की सच्चाई
प्राप्त प्रारंभिक सामग्री में अनकापल्ली, विशाखापट्टनम, विजयनगरम और झारखंड के कुछ जिलों के लिए रेड चेतावनी का उल्लेख किया गया था। ऐसे जिलावार रंगीन अलर्ट प्रायः अल्प अवधि के नाउकास्ट हो सकते हैं, जो आमतौर पर अधिकतम तीन घंटे के लिए जारी होते हैं। इन्हें जारी होने और समाप्त होने का समय लिखे बिना पूरे दिन का रेड अलर्ट बताना उचित नहीं है।
7 अगस्त के उपखंड स्तरीय पूर्वानुमान में तटीय आंध्र प्रदेश के लिए गरज-चमक की चेतावनी है, लेकिन पूरे उपखंड के लिए भारी बारिश की चेतावनी नहीं दी गई। झारखंड के लिए कहीं-कहीं भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तेज हवा का पूर्वानुमान है।
IMD के राष्ट्रीय मानचित्र पर भी स्पष्ट लिखा है कि लाल रंग को स्वतः औपचारिक ‘Red Alert’ न कहा जाए; उस उत्पाद में इसका अर्थ ‘Take Action’ है। इसलिए रंग, चेतावनी के प्रकार और उसकी वैधता को साथ लिखना जरूरी है।
आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मानसून?
6 से 12 अगस्त वाले सप्ताह के पहले हिस्से में देशभर की बारिश सामान्य के आसपास और दूसरे हिस्से में सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इंडो-गंगेटिक मैदान, मध्य भारत, केरल और तमिलनाडु-कर्नाटक से लगे क्षेत्रों में सप्ताह की कुल बारिश सामान्य रह सकती है, जबकि पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से कम बारिश की संभावना है।
13 से 19 अगस्त के दौरान मध्य और पूर्वी भारत तथा पश्चिमी घाट में सामान्य से अधिक बारिश के संकेत हैं। देश के अन्य बड़े हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रह सकती है।
खरीफ फसलों के लिए राहत या चिंता?
हालिया बारिश से मिट्टी में नमी, जलाशयों और खरीफ की फसलों को स्थानीय स्तर पर फायदा मिल सकता है। लेकिन कम समय में बहुत तेज बारिश से खेतों में जलभराव, पौधों की जड़ों को नुकसान और मिट्टी का कटाव भी हो सकता है।
देशभर में 11 प्रतिशत मानसूनी घाटा और राज्यों के बीच बड़े अंतर को देखते हुए अभी पूरे खरीफ सीजन या अर्थव्यवस्था के लिए स्थिति को समान रूप से अनुकूल घोषित करना जल्दबाजी होगी। अंतिम असर बारिश की कुल मात्रा के साथ उसके समय, क्षेत्रीय वितरण और बीच में आने वाले सूखे अंतराल पर निर्भर करेगा। यह उपलब्ध IMD आंकड़ों से निकलने वाला आकलन है।
भारी बारिश के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- आकाशीय बिजली के समय खुले मैदान और ऊंचे पेड़ों से दूर रहें।
- जलभराव वाले अंडरपास और बहते पानी वाली सड़क पार न करें।
- पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और पत्थर गिरने की आशंका वाले मार्गों से बचें।
- यात्रा से पहले स्थानीय जिला नाउकास्ट और ट्रैफिक एडवाइजरी जांचें।
- किसानों को निचले खेतों में जल निकासी बनाए रखनी चाहिए।
- समुद्री क्षेत्रों में मछुआरे संबंधित तटीय चेतावनी का पालन करें।
IMD ने बहुत भारी बारिश वाले क्षेत्रों में स्थानीय जलभराव, कमजोर ढांचों को नुकसान, सड़क-रेल यातायात प्रभावित होने और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का जोखिम बताया है।
FAQ: एल नीनो और आज के मौसम से जुड़े सवाल
1. क्या इस समय एल नीनो सक्रिय है?
हां। IMD के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत में मध्यम एल नीनो की स्थिति सक्रिय है और इसके आगे मजबूत होने की संभावना है।
2. एल नीनो सक्रिय है तो भारत में तेज बारिश क्यों हो रही है?
एल नीनो पूरे मानसून सीजन की संभावना को प्रभावित करता है। मानसूनी द्रोणिका, बंगाल की खाड़ी के चक्रवाती परिसंचरण और दूसरे स्थानीय सिस्टम कुछ क्षेत्रों में तेज बारिश करा सकते हैं।
3. आज कहां भारी से बहुत भारी बारिश होगी?
केरल, ओडिशा, पूर्वी मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान तथा तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश संभव है।
4. देश में अब तक मानसून कितना कम है?
1 जून से 6 अगस्त तक देश में 443.2 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य मात्रा 500.2 मिलीमीटर है। यानी वर्षा सामान्य से 11 प्रतिशत कम है।
5. क्या जिलों का रेड नाउकास्ट पूरे दिन लागू रहता है?
नहीं। जिलावार नाउकास्ट सामान्य रूप से तीन घंटे तक वैध होता है। इसे प्रकाशित करते समय जारी होने और समाप्त होने का समय जरूर लिखना चाहिए।