भोपाल। मध्यप्रदेश की प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 एक नए विवाद में घिरती नजर आ रही है। दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से अपनाई जा रही प्रक्रिया पर अभ्यर्थियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता से जुड़े नियम बदल दिए गए, जिससे सैकड़ों चयनित अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। ऐसे में पूरी भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
कर्मचारी चयन मंडल (ESB) द्वारा जारी भर्ती अधिसूचना में स्पष्ट उल्लेख था कि डीएलएड (D.El.Ed.) और बीएलएड (B.El.Ed.) के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं। शर्त यह थी कि दस्तावेज सत्यापन के समय तक उनके पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज उपलब्ध होने चाहिए। इसी नियम के आधार पर हजारों अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने आवेदन किया, परीक्षा दी और इनमें से लगभग 800 अभ्यर्थियों का चयन भी हो गया।
दस्तावेज सत्यापन में बदली गई शर्त का आरोप
अभ्यर्थियों का आरोप है कि जब वे दस्तावेज सत्यापन के लिए पहुंचे तो स्कूल शिक्षा विभाग ने उनसे आवेदन की अंतिम तिथि (25 अगस्त 2025) तक की डिग्री या अंकसूची प्रस्तुत करने को कहा। उनका कहना है कि यह शर्त भर्ती अधिसूचना में नहीं थी और चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद नई पात्रता लागू करना नियमों के विपरीत है।
भर्ती नियमों का दिया जा रहा हवाला
अभ्यर्थियों के अनुसार आवेदन पत्र के क्लॉज-49 में अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। वहीं, ईएसबी की नियम पुस्तिका के अध्याय-1 के क्लॉज-3 के अनुसार आवेदन पत्र भर्ती नियमों का अभिन्न हिस्सा माना गया है। इसके बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग ने 17 जुलाई को जारी आदेश के क्लॉज-9.3 में आवेदन की अंतिम तिथि तक डिग्री पूरी होना अनिवार्य कर दिया, जिसे अभ्यर्थी नियमों में बाद में किया गया बदलाव बता रहे हैं।
प्रदर्शन और कानूनी कार्रवाई की तैयारी
दस्तावेज सत्यापन से वंचित अभ्यर्थियों ने शुक्रवार को लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के सामने प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। उनकी मांग है कि भर्ती अधिसूचना में दिए गए मूल नियमों के आधार पर उन्हें दस्तावेज सत्यापन का अवसर दिया जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे न्यायालय में याचिका दायर करेंगे।
भर्ती प्रक्रिया पर पड़ सकता है असर
यदि मामला अदालत पहुंचता है तो प्राथमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में देरी की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में हजारों अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। फिलहाल इस पूरे विवाद पर स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
Key Highlights
- प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 में दस्तावेज सत्यापन को लेकर विवाद।
- अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को आवेदन की अनुमति मिलने के बावजूद पात्रता पर सवाल।
- लगभग 800 चयनित अभ्यर्थी प्रभावित होने का दावा।
- भर्ती शुरू होने के बाद नियम बदलने का आरोप।
- अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन और कोर्ट जाने की चेतावनी दी।
- मामला बढ़ने पर भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका।