रायपुर। छत्तीसगढ़ में कार्यरत हजारों शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET उत्तीर्ण करना होगा। निर्धारित अवधि के भीतर परीक्षा पास नहीं करने वाले शिक्षकों के पदोन्नति (Promotion) पर असर पड़ सकता है और भविष्य में उनकी सेवा से जुड़े अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप समय-समय पर TET परीक्षा आयोजित करनी होगी, ताकि सभी पात्र शिक्षक आवश्यक योग्यता हासिल कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
29 मई 2026 को दिए गए अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी राज्य सरकारें और संबंधित प्राधिकरण TET का नियमित आयोजन सुनिश्चित करें। अदालत ने सुझाव दिया कि परीक्षा साल में दो बार, लगभग छह-छह महीने के अंतराल पर आयोजित की जाए, ताकि शिक्षक निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक पात्रता प्राप्त कर सकें। इस व्यवस्था का उद्देश्य योग्य शिक्षकों को पर्याप्त अवसर देना और शिक्षा व्यवस्था में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।
31 अगस्त 2028 क्यों है महत्वपूर्ण?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय समय-सीमा के अनुसार 31 अगस्त 2028 तक TET की योग्यता प्राप्त करना आवश्यक होगा। इसके बाद जिन शिक्षकों के पास TET की पात्रता नहीं होगी, उनके लिए सेवा संबंधी प्रक्रियाओं में कठिनाई आ सकती है। हालांकि, अंतिम प्रशासनिक कार्रवाई राज्य सरकार और संबंधित विभागों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही तय होगी।
प्रमोशन पर पड़ सकता है सीधा असर
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेशों में यह स्पष्ट किया गया है कि TET अर्हता नहीं रखने वाले शिक्षकों को पदोन्नति के लिए पात्र नहीं माना जाएगा। संघ का कहना है कि जिन कर्मचारियों की सेवा अवधि कम बची है, उन्हें कुछ परिस्थितियों में सेवा जारी रखने की अनुमति मिल सकती है, लेकिन पदोन्नति के मामलों में TET की पात्रता महत्वपूर्ण शर्त रहेगी।
NCTE नियमों से जुड़ा पूरा मामला
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का आयोजन राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के दिशा-निर्देशों के आधार पर किया जाता है।
राष्ट्रीय स्तर पर CBSE द्वारा CTET आयोजित की जाती है।
छत्तीसगढ़ में CG Vyapam के माध्यम से CG-TET आयोजित होती है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए प्रारंभिक नियमों में TET अनिवार्य नहीं था। वहीं, राज्य में वर्ष 2011 के बाद TET परीक्षाएं शुरू हुईं, लेकिन कई नियुक्तियों में इस योग्यता का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने के कारण यह विवाद लंबे समय से बना हुआ है।
शिक्षकों को अब क्या करना चाहिए?
यदि किसी शिक्षक ने अभी तक TET उत्तीर्ण नहीं किया है, तो उन्हें आने वाली परीक्षाओं में शामिल होकर समय-सीमा के भीतर पात्रता हासिल करने की तैयारी करनी चाहिए। राज्य सरकार की ओर से परीक्षा कार्यक्रम जारी होने के बाद आवेदन प्रक्रिया और अन्य निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।
क्या बदल सकता है?
सुप्रीम कोर्ट का आदेश TET परीक्षा आयोजित करने और शिक्षकों को अवसर उपलब्ध कराने से जुड़ा है। हालांकि, किस शिक्षक पर कौन-सा प्रशासनिक निर्णय लागू होगा, यह राज्य सरकार के नियमों, शिक्षा विभाग के आदेशों और संबंधित सेवा शर्तों पर निर्भर करेगा।