नई दिल्ली - राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नागरिकों से भारतीय हथकरघा उत्पादों को अपनाने और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने में भागीदार बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक बुनाई केवल कपड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक विरासत, कारीगरों की मेहनत और आत्मनिर्भर भारत की भावना का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक स्थानीय हथकरघा उत्पादों का उपयोग करें और उनके प्रचार-प्रसार में अपनी भूमिका निभाएं।
सोशल मीडिया अभियान से जोड़ने की अपील
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए लोगों से डिजिटल माध्यमों का रचनात्मक उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवा और सोशल मीडिया उपयोगकर्ता अपने पसंदीदा हथकरघा परिधानों के साथ 'गेट रेडी विद मी (GRWM)' जैसे वीडियो साझा करें। साथ ही उन्होंने पोस्ट में #NationalHandloomDay हैशटैग का इस्तेमाल करने की अपील की, ताकि भारतीय हथकरघा उत्पादों की पहचान देश और दुनिया तक पहुंच सके। उनके अनुसार, सोशल मीडिया आज स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है और इससे बुनकर समुदाय को भी सीधा लाभ मिल सकता है।
नई दिल्ली में होगा राष्ट्रीय समारोह
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के उपलक्ष्य में कपड़ा मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के आयोजन में देशभर के बुनकरों, शिल्पकारों और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम में भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक बुनाई, हस्तनिर्मित वस्त्रों और शिल्पकला की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसके अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बुनकरों और संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा।
राष्ट्रपति समेत कई वरिष्ठ हस्तियां रहेंगी मौजूद
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। उनके साथ केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा, कपड़ा सचिव नीलम शमी राव और विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान हथकरघा उद्योग को मजबूत बनाने और बुनकरों के कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा होगी।
क्या है राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का महत्व?
भारत में हर वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2015 में की गई थी। इस दिन को चुनने के पीछे 1905 के स्वदेशी आंदोलन का ऐतिहासिक महत्व जुड़ा है, जब विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का व्यापक अभियान शुरू हुआ था। हथकरघा उद्योग आज भी देश के सबसे बड़े ग्रामीण रोजगार क्षेत्रों में शामिल है। लाखों बुनकर और कारीगर अपनी पारंपरिक कला के माध्यम से आजीविका कमाते हैं। सरकार का मानना है कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर न केवल भारतीय संस्कृति को संरक्षित किया जा सकता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार को भी नई मजबूती मिल सकती है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग नियमित रूप से भारतीय हथकरघा उत्पादों को प्राथमिकता दें और डिजिटल माध्यमों पर उनका प्रचार करें, तो इससे घरेलू उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इससे बुनकरों की आय बढ़ेगी, पारंपरिक शिल्प संरक्षित रहेगा और "वोकल फॉर लोकल" तथा "आत्मनिर्भर भारत" जैसे अभियानों को भी नई गति मिलेगी। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि देश की समृद्ध विरासत और लाखों कारीगरों के सम्मान का प्रतीक है।