नई दिल्ली, 7 अगस्त 2026 | सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर बच्चों के यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री यानी Child Sexual Exploitative and Abuse Material—CSEAM की कथित उपलब्धता को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कार्रवाई तेज कर दी है। NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि पिछले एक सप्ताह में आयोग को Instagram पर CSEAM से संबंधित 50 से अधिक लिंक वाली शिकायतें मिली हैं। शिकायतों में दी गई जानकारी के आधार पर विभिन्न राज्यों की पुलिस, Meta India और संबंधित केंद्रीय मंत्रालय को कार्रवाई के लिए नोटिस भेजे गए हैं।
50 मामले नहीं, 50 से अधिक लिंक की मिली शिकायत
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि NHRC सदस्य के सार्वजनिक बयान में “50 से अधिक लिंक” मिलने की बात कही गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि जांच में 50 अलग-अलग आपराधिक मामले प्रमाणित हो चुके हैं। इन लिंक की वास्तविक प्रकृति, सामग्री, अपलोड करने वाले खातों, पीड़ित बच्चों और अपराध में शामिल लोगों की पहचान पुलिस तथा साइबर इकाइयों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए खबर में “50 अपराध साबित” या “50 बच्चों के शोषण की पुष्टि” जैसे दावे नहीं किए जाने चाहिए।
इन आठ राज्यों और क्षेत्रों की पुलिस को नोटिस
प्रियंक कानूनगो के नवीनतम बयान के अनुसार इन राज्यों और केंद्रशासित क्षेत्रों के पुलिस प्रमुखों को नोटिस भेजे गए हैं:
- पंजाब
- दिल्ली
- तेलंगाना
- महाराष्ट्र
- ओडिशा
- पश्चिम बंगाल
- हरियाणा
- बिहार
दिल्ली में पुलिस का नेतृत्व पुलिस आयुक्त करते हैं, इसलिए सभी अधिकारियों को सामान्य रूप से “डीजीपी” लिखने के बजाय “संबंधित पुलिस प्रमुखों” या “डीजीपी और पुलिस आयुक्त” लिखना अधिक सटीक होगा।
पुलिस को क्या कार्रवाई करने के लिए कहा गया?
NHRC की हालिया कार्यवाही में संबंधित पुलिस इकाइयों को शिकायतों के साथ मिले URL और दूसरे डिजिटल संकेतों की साइबर क्राइम यूनिट या विशेष किशोर पुलिस इकाई के माध्यम से जांच करने को कहा गया है। जांच में संज्ञेय अपराध के संकेत मिलने पर FIR दर्ज करने, सामग्री बनाने या अपलोड करने वालों की पहचान करने और उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी बच्चे की पीड़ित के रूप में पहचान होने पर उसके तत्काल बचाव, चिकित्सा सहायता, मनोवैज्ञानिक सहयोग और बाल कल्याण समिति के सामने प्रस्तुत करने की प्रक्रिया अपनाने को भी कहा गया है।
Meta India से सामग्री हटाने और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा
NHRC ने Meta से संबंधित सामग्री की उपलब्धता रोकने और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा है। इसमें संबंधित खातों का डेटा, मेटाडेटा, IP लॉग और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शामिल हो सकते हैं, ताकि पुलिस जांच में सामग्री के स्रोत और प्रसार का पता लगाया जा सके। प्लेटफॉर्म से यह भी बताने को कहा गया है कि ऐसी सामग्री की पहचान, रिपोर्टिंग, हटाने और दोबारा अपलोड रोकने के लिए कौन-से तकनीकी तथा प्रशासनिक उपाय लागू हैं।
MeitY से ब्लॉकिंग और दीर्घकालिक उपायों की रिपोर्ट
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से कथित आपत्तिजनक लिंक को ब्लॉक करने या उनकी पहुंच प्रतिबंधित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी गई है। मंत्रालय से यह भी बताने को कहा गया है कि ऑनलाइन बाल सुरक्षा मजबूत करने, सोशल मीडिया मध्यस्थों की जवाबदेही तय करने और प्रतिबंधित सामग्री को दोबारा उपलब्ध होने से रोकने के लिए क्या दीर्घकालिक व्यवस्था बनाई जा रही है।
नोटिसों की संख्या अलग-अलग क्यों बताई जा रही?
इस मामले में अलग-अलग तारीखों पर कई शिकायतों और कार्यवाहियों की जानकारी सामने आई है। 3 अगस्त की एक कार्यवाही में पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़, हरियाणा, ओडिशा और दिल्ली सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस देकर एक सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई थी। इसके बाद नई शिकायतों और लिंक की जानकारी मिलने पर प्रियंक कानूनगो ने पंजाब, दिल्ली, तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और बिहार के पुलिस प्रमुखों का उल्लेख किया। इसलिए कहीं छह और कहीं आठ राज्यों की संख्या दिखना अलग-अलग चरणों की कार्रवाई के कारण हो सकता है।
पुराने मामले में दिल्ली पुलिस आयुक्त को किया गया तलब
NHRC की प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने इससे पहले Instagram पर कथित भुगतान वाले विज्ञापनों के जरिए CSEAM तक पहुंच उपलब्ध कराने की रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया था। आयोग ने 8 जुलाई को दिल्ली पुलिस आयुक्त से 15 दिनों में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट नहीं मिलने पर 29 जुलाई को सात दिन का अतिरिक्त समय दिया गया। इसके बाद भी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने पर पुलिस आयुक्त को 7 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से आयोग के सामने पेश होने के लिए समन जारी किया गया। हालांकि 31 अगस्त तक रिपोर्ट मिलने पर व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी जा सकती है।
BBC की रिपोर्ट से जुड़ा था पहला मामला
पहली कार्यवाही एक मीडिया जांच से संबंधित थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि Instagram पर कुछ भुगतान वाले विज्ञापन उपयोगकर्ताओं को ऐसे बाहरी चैनलों की ओर ले जा रहे थे, जहां बच्चों से संबंधित प्रतिबंधित सामग्री उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा था। NHRC ने पुलिस को विज्ञापन रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़ा डिजिटल ट्रेल, अकाउंट डेटा और प्लेटफॉर्म के रिपोर्टिंग अनुपालन की जांच करने को कहा था। ये अभी जांच के दायरे में आए आरोप हैं; संबंधित विज्ञापनदाताओं या प्लेटफॉर्म की आपराधिक जिम्मेदारी अंतिम जांच से तय होगी।
Meta का क्या कहना है?
Meta ने इससे पहले कहा था कि उसके प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री के लिए शून्य-सहनशीलता की नीति है और कंपनी अपनी पहचान तथा हटाने की तकनीक को लगातार मजबूत कर रही है। कंपनी ने जुलाई में सरकार को भेजे जवाब में अपने AI आधारित पहचान तंत्र, संदिग्ध खातों पर कार्रवाई और विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया में सुधार का उल्लेख किया था। नवीनतम 50 से अधिक लिंक वाली शिकायतों पर Meta का विस्तृत सार्वजनिक जवाब खबर तैयार किए जाने तक सामने नहीं आया था।
CSEAM का अर्थ क्या है?
सरकारी राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार CSEAM ऐसी सामग्री को कहा जाता है, जिसमें किसी बच्चे के यौन शोषण या दुर्व्यवहार से संबंधित चित्र या अन्य दृश्य सामग्री शामिल हो। ऐसी सामग्री का निर्माण, प्रकाशन, प्रसारण या प्रसार गंभीर अपराध है। जांच पूरी होने से पहले किसी लिंक को CSEAM घोषित नहीं किया जा सकता, लेकिन संदेह होने पर उसे तुरंत प्लेटफॉर्म और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को रिपोर्ट किया जाना चाहिए।
संदिग्ध सामग्री दिखे तो क्या करें?
ऐसी सामग्री सामने आने पर उसे दोबारा खोलने, डाउनलोड करने, स्क्रीन रिकॉर्ड करने, सेव करने या किसी दूसरे व्यक्ति को फॉरवर्ड करने से बचें। इससे पीड़ित बच्चे की निजता का दोबारा उल्लंघन हो सकता है और अवैध सामग्री का प्रसार बढ़ सकता है।
उपयोगकर्ता संबंधित अकाउंट या पोस्ट को Instagram के इन-ऐप रिपोर्टिंग विकल्प से रिपोर्ट कर सकते हैं। भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर Women/Children Related Crime श्रेणी में शिकायत दर्ज की जा सकती है। पोर्टल कुछ प्रकार की महिला एवं बाल अपराध शिकायतों को गुमनाम रूप से दर्ज करने की सुविधा भी देता है। बच्चे के यौन शोषण से संबंधित शिकायत NCPCR के POCSO e-Box पर भी दर्ज की जा सकती है। किसी बच्चे को तत्काल खतरा होने पर स्थानीय पुलिस या विशेष किशोर पुलिस इकाई से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
मीडिया संस्थानों के लिए जरूरी सावधानी
CSEAM से जुड़े समाचार में किसी बच्चे का नाम, फोटो, चेहरा, स्कूल, घर, परिवार या ऐसी जानकारी प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए, जिससे उसकी पहचान सामने आए। समाचार रिपोर्ट में शिकायत के साथ मिले वास्तविक लिंक, स्क्रीनशॉट या सामग्री के छोटे हिस्से भी प्रकाशित नहीं किए जाने चाहिए। संदिग्ध URL केवल अधिकृत पुलिस या जांच एजेंसी को सुरक्षित माध्यम से सौंपे जाने चाहिए।
FAQ: Instagram CSEAM शिकायत और NHRC कार्रवाई
1. NHRC को कितने मामले मिले हैं?
प्रियंक कानूनगो के अनुसार पिछले एक सप्ताह में शिकायतों के माध्यम से CSEAM से संबंधित 50 से अधिक लिंक मिले हैं। ये सभी अभी प्रमाणित अपराध या अलग-अलग पुष्टि किए गए मामले नहीं हैं।
2. किन राज्यों की पुलिस को नोटिस भेजा गया?
पंजाब, दिल्ली, तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और बिहार के संबंधित पुलिस प्रमुखों का नाम नवीनतम बयान में शामिल है।
3. क्या Meta को दोषी घोषित कर दिया गया है?
नहीं। Meta से सामग्री हटाने, डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने और अपनी रोकथाम व्यवस्था का विवरण देने को कहा गया है। आपराधिक या नियामकीय जिम्मेदारी जांच के बाद तय होगी।
4. दिल्ली पुलिस आयुक्त को क्यों बुलाया गया?
Instagram के भुगतान वाले विज्ञापनों से जुड़े पुराने मामले में निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट नहीं मिलने पर NHRC ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को समन जारी किया।
5. संदिग्ध CSEAM लिंक कहां रिपोर्ट करें?
इसे Instagram के रिपोर्ट विकल्प, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या NCPCR के POCSO e-Box पर रिपोर्ट किया जा सकता है। सामग्री डाउनलोड या फॉरवर्ड न करें।