भोपाल/नई दिल्ली। मध्यप्रदेश ने स्वच्छ और नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी बढ़ती ताकत का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय मंच पर किया है। नई दिल्ली में आयोजित 7वें अंतरराष्ट्रीय नवकरणीय ऊर्जा सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की ऊर्जा नीति, बड़े निवेश और भविष्य की योजनाओं को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि अब ग्रीन एनर्जी, ऊर्जा भंडारण और स्वच्छ औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है और मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए पूरी तैयारी के साथ काम कर रहा है।
दिल्ली मेट्रो से पहुंचे सम्मेलन, दिया ग्रीन ट्रांसपोर्ट का संदेश
सम्मेलन में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एयरपोर्ट से निजी वाहन के बजाय दिल्ली मेट्रो एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन से यात्रा की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा का संदेश केवल भाषणों से नहीं बल्कि व्यवहार से भी दिया जाना चाहिए। दिल्ली मेट्रो बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा का उपयोग करती है, इसलिए उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण का बेहतर उदाहरण बताया।
12 साल में 25 गुना बढ़ी प्रदेश की ऊर्जा क्षमता
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में मध्यप्रदेश ने ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2014 के आसपास जहां प्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 438 मेगावाट थी, वहीं अब यह बढ़कर 11,000 मेगावाट के करीब पहुंच चुकी है। यह करीब 25 गुना वृद्धि है, जो प्रदेश की ऊर्जा नीति और निवेश को दर्शाती है।
रीवा और आगर-शाजापुर-नीमच परियोजनाएं बनीं पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना ने देश में पहली बार ऐसा उदाहरण पेश किया, जब सौर ऊर्जा का टैरिफ कोयला आधारित बिजली से भी कम रहा। इस परियोजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला और इसकी केस स्टडी प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई जाती है। इसके अलावा आगर-शाजापुर-नीमच सौर परियोजना ने भी रिकॉर्ड कम टैरिफ पर बिजली उपलब्ध कराते हुए भारतीय रेलवे को हरित ऊर्जा उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई है।
फ्लोटिंग सोलर और बैटरी स्टोरेज पर बड़ा फोकस
प्रदेश सरकार अब केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहती। मुख्यमंत्री ने बताया कि ऊर्जा भंडारण (Battery Energy Storage) को भविष्य की जरूरत मानते हुए कई नई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मुरैना में विकसित हो रही 440 मेगावाट सौर परियोजना के साथ 880 मेगावाट-घंटा बैटरी स्टोरेज सिस्टम प्रदेश की पहली बड़ी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में शामिल है। इसके अलावा 4 घंटे, 6 घंटे और 24 घंटे तक बिजली उपलब्ध कराने वाली ऊर्जा भंडारण योजनाओं पर भी काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
रूफटॉप सोलर में भी तेजी
सरकार ने सरकारी भवनों और आम नागरिकों दोनों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में भी अभियान तेज किया है।
करीब 1300 सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर लगाने का काम जारी है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश के लगभग 1.5 लाख घरों में सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं।
सरकार का मानना है कि इससे बिजली खर्च कम होगा और स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा।
निवेशकों के लिए तैयार हो रहा ग्रीन एनर्जी हब
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की नई ऊर्जा नीतियां निजी निवेश को आकर्षित कर रही हैं। बेहतर आधारभूत संरचना, पर्याप्त भूमि और प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के कारण प्रदेश ग्रीन एनर्जी निवेश का बड़ा केंद्र बन सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में नवकरणीय ऊर्जा नीति, पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज नीति और बायोमास नीति लागू कर निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है।
सम्मेलन में कई देशों के प्रतिनिधि हुए शामिल
नई दिल्ली में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, एचडी कुमारस्वामी, भूटान और श्रीलंका के ऊर्जा मंत्रियों सहित कई देशों के विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, हरित तकनीक, निवेश और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
प्रदेश का लक्ष्य क्या है?
सरकार का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें चौबीसों घंटे स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सके। इसके लिए ऊर्जा भंडारण, सौर परियोजनाओं और हरित औद्योगिक विकास पर समान रूप से काम किया जा रहा है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख ग्रीन एनर्जी हब के रूप में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है।