रांची। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने बड़ा बयान दिया है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री इरफान अंसारी ने साफ कहा कि राज्य में किसी भी भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ। उनका कहना है कि जहां भी अनियमितताओं की शिकायतें मिलीं, वहां सरकार ने कार्रवाई की है और छात्रों की चिंताओं का समाधान बातचीत के जरिए निकालने की कोशिश की जाएगी।
13वें दिन भी जारी रहा छात्रों का प्रदर्शन
राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का धरना लगातार जारी है। आंदोलन अब 13वें दिन में पहुंच चुका है और कई छात्र संगठनों ने भी इसका समर्थन करना शुरू कर दिया है। बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी डटे रहे और सरकार से ठोस निर्णय की मांग करते रहे।
मंत्री इरफान अंसारी ने क्या कहा?
मीडिया से बातचीत में मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि झारखंड की स्थिति को दूसरे राज्यों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि राज्य में किसी भी परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, जहां भी प्रक्रिया में खामियां सामने आईं, वहां सरकार ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से लिया जा रहा है और सरकार संवाद के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में है।
JPSC परीक्षा रद्द करने पर सरकार का रुख
JPSC परीक्षा रद्द करने की मांग पर मंत्री ने कहा कि ऐसा फैसला लेने से एक नया विवाद खड़ा हो सकता है। उनके अनुसार, परीक्षा में सफल अभ्यर्थी भी इसके विरोध में उतर सकते हैं और इससे स्थिति और जटिल हो जाएगी। सरकार का मानना है कि यदि कहीं प्रक्रियागत त्रुटियां हुई हैं तो उन्हें सुधारने के विकल्प मौजूद हैं, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द करना अंतिम समाधान नहीं है।
छात्र नेता भूख हड़ताल पर
धरना स्थल पर छात्र नेता देवेंद्र महतो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। खराब मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र धरनास्थल पर मौजूद हैं।
सरकार और छात्रों के बीच होगी बातचीत
आंदोलन के बीच सरकार ने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया है। इस बैठक से समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार ने भी संकेत दिए हैं कि संवाद के माध्यम से विवाद समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा, जबकि छात्र चाहते हैं कि उनकी मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय लिया जाए।