नई दिल्ली, 6 अगस्त 2026 | दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार, 7 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। यह आठवीं दिल्ली विधानसभा का छठा सत्र होगा। विधानसभा सचिवालय के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार सदन की बैठकें 7 अगस्त के बाद सोमवार 10 अगस्त और मंगलवार 11 अगस्त को होंगी। तीनों दिन कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होगी और निर्धारित कामकाज पूरा होने तक जारी रहेगी। विधायी कार्य की जरूरत पड़ने पर सत्र को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में सत्र का प्रमुख विधायी एजेंडा तय किया गया। बैठक में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने, दो नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक यानी CAG रिपोर्ट रखने और दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग से जुड़ी एक अधिसूचना सदन के पटल पर रखने का निर्णय हुआ।
मानसून सत्र लगातार पांच दिन नहीं, तीन दिन चलेगा
सत्र की घोषित अवधि 7 से 11 अगस्त है, लेकिन विधानसभा की वास्तविक बैठकें केवल तीन दिन निर्धारित हैं।
| तारीख | दिन | बैठक का समय |
|---|---|---|
| 7 अगस्त 2026 | शुक्रवार | सुबह 11 बजे |
| 8–9 अगस्त | शनिवार-रविवार | बैठक निर्धारित नहीं |
| 10 अगस्त 2026 | सोमवार | सुबह 11 बजे |
| 11 अगस्त 2026 | मंगलवार | सुबह 11 बजे |
अधिकारिक बुलेटिन में स्पष्ट किया गया है कि सदन की बैठक आवश्यकता के अनुसार बढ़ाई जा सकती है। इसलिए इसे पांच दिवसीय लगातार सत्र के बजाय तीन निर्धारित बैठकों वाला मानसून सत्र लिखना अधिक सटीक होगा।
सरकार कौन-से तीन बिल पेश करेगी?
1. समय पर सरकारी सेवाएं नहीं मिलीं तो तय होगी जवाबदेही
सरकार Delhi (Right of Citizen to Time Bound Delivery of Services) Bill, 2026 पेश करेगी। यह विधेयक वर्ष 2011 के मौजूदा समयबद्ध सेवा कानून को हटाकर उसकी जगह नया ढांचा लागू करने के लिए लाया जा रहा है।
प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी सेवाओं की संख्या बढ़ाना, आवेदन और सेवा वितरण को तकनीक से जोड़ना तथा बिना उचित कारण देरी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करना बताया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बिना उचित वजह सेवा में देरी होने पर संबंधित अधिकारी पर प्रतिदिन ₹250, अधिकतम ₹5,000 तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान हो सकता है। आवेदन अनुचित रूप से खारिज किए जाने पर भी ₹250 से ₹5,000 तक एकमुश्त दंड का प्रस्ताव बताया गया है। अंतिम प्रावधान विधेयक के आधिकारिक पाठ और सदन में पारित स्वरूप से स्पष्ट होंगे।
आम लोगों को क्या फायदा हो सकता है?
विधेयक पास होकर लागू होता है तो प्रमाणपत्र, लाइसेंस, पंजीकरण और दूसरी अधिसूचित सरकारी सेवाओं के लिए तय समयसीमा तथा शिकायत व्यवस्था मजबूत हो सकती है। हालांकि किन सेवाओं को शामिल किया जाएगा और आवेदनकर्ता को मुआवजा मिलेगा या नहीं, यह विधेयक के पूरे पाठ और बाद में बनने वाले नियमों से तय होगा।
2. झुग्गी पुनर्वास की कट-ऑफ तारीख 2025 करने का प्रस्ताव
दूसरा विधेयक दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड यानी DUSIB Act, 2010 में संशोधन से संबंधित होगा। इसके जरिए झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों को पुनर्वास योजना के दायरे में लाने की कट-ऑफ तारीख 1 जनवरी 2015 से बढ़ाकर 1 जनवरी 2025 करने का प्रस्ताव है।
दिल्ली सरकार का अनुमान है कि संशोधित पात्रता से करीब चार से पांच लाख परिवार या लगभग 20 लाख लोग पुनर्वास व्यवस्था के दायरे में आ सकते हैं। पात्र परिवारों को बहुमंजिला आवासों के साथ स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी और खेल मैदान जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है। यह संख्या सरकार का अनुमान है; हर परिवार की पात्रता सर्वेक्षण, दस्तावेज और अंतिम कानून के आधार पर तय होगी।
किन लोगों पर पड़ेगा सीधा असर?
यह प्रस्ताव मुख्य रूप से उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण होगा, जो 1 जनवरी 2015 के बाद और 1 जनवरी 2025 तक स्थापित या विस्तारित JJ क्लस्टर में रह रहे हैं। केवल कट-ऑफ तारीख बदलने से प्रत्येक निवासी को स्वतः मकान नहीं मिलेगा। पुनर्वास के लिए निवास प्रमाण, सर्वे रिकॉर्ड, संबंधित जमीन की स्थिति और योजना की दूसरी शर्तें लागू हो सकती हैं।
3. बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों का पुराना कानून होगा रद्द
तीसरा विधेयक National Capital Territory of Delhi (Incredible India) Bed and Breakfast Establishments (Registration and Regulation) Act, 2007 को रद्द करने के लिए पेश किया जाएगा। इसके साथ वर्ष 2010 और 2021 में किए गए संबंधित संशोधनों को भी निरस्त करने का प्रस्ताव है।
यह कानून दिल्ली में घरों या निजी संपत्तियों से संचालित बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों के पंजीकरण और नियमन से जुड़ा है। कानून रद्द होने के बाद इन प्रतिष्ठानों के लिए कौन-सी वैकल्पिक पंजीकरण व्यवस्था लागू होगी, इसका पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं है। संचालकों को अंतिम विधेयक, नियमों और पर्यटन विभाग की अधिसूचना का इंतजार करना होगा।
तीनों विधेयक एक नजर में
| विधेयक | प्रस्तावित बदलाव | संभावित असर |
|---|---|---|
| समयबद्ध सेवा विधेयक, 2026 | वर्ष 2011 का कानून हटाकर नया ढांचा | सरकारी सेवाओं में समयसीमा और अधिकारियों की जवाबदेही |
| DUSIB संशोधन विधेयक | पुनर्वास कट-ऑफ 2015 से बढ़ाकर 2025 | ज्यादा JJ क्लस्टर परिवार पुनर्वास के लिए पात्र हो सकते हैं |
| Bed and Breakfast कानून निरसन विधेयक | 2007 के कानून और संशोधनों को हटाना | होम-स्टे और B&B प्रतिष्ठानों की नियामकीय व्यवस्था बदल सकती है |
ये तीनों विधेयक अभी केवल पेश किए जाने हैं। सदन से पारित होने, आवश्यक स्वीकृति मिलने और अधिसूचना जारी होने से पहले इन्हें लागू कानून नहीं माना जाएगा।
कौन-सी दो CAG रिपोर्ट सदन में रखी जाएंगी?
मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री रेखा गुप्ता दो CAG रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखेंगी।
रिपोर्ट नंबर 01 ऑफ 2026
यह रिपोर्ट 31 मार्च 2023 को समाप्त वित्तीय वर्ष तक दिल्ली सरकार के खातों और संबंधित ऑडिट निष्कर्षों से जुड़ी है।
रिपोर्ट नंबर 02 ऑफ 2026
यह दिल्ली सरकार की वित्तीय स्थिति के लिए वित्त वर्ष 2024-25 की State Finance Report है। इसमें सामान्य रूप से सरकार की आय, व्यय, बजट प्रबंधन, देनदारियों और वित्तीय अनुशासन का ऑडिट विश्लेषण शामिल होता है।
| CAG रिपोर्ट | संबंधित अवधि |
|---|---|
| रिपोर्ट नंबर 01 ऑफ 2026 | 31 मार्च 2023 को समाप्त वर्ष |
| रिपोर्ट नंबर 02 ऑफ 2026 | दिल्ली सरकार का राज्य वित्त, 2024-25 |
दोनों रिपोर्टों के विस्तृत निष्कर्ष सदन में औपचारिक रूप से रखे जाने के बाद सामने आएंगे। इससे पहले किसी संभावित गड़बड़ी, नुकसान या विभागीय जिम्मेदारी को तथ्य के रूप में लिखना उचित नहीं होगा।
CAG रिपोर्ट आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
CAG रिपोर्ट सरकारी धन के संग्रह और इस्तेमाल की स्वतंत्र ऑडिट समीक्षा प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट सामने आने के बाद यह जानकारी मिल सकती है कि बजट का कितना हिस्सा खर्च हुआ, किन योजनाओं में धन कम या ज्यादा इस्तेमाल हुआ और सरकारी विभागों ने वित्तीय नियमों का पालन किया या नहीं।
रिपोर्ट रखे जाने का अर्थ यह नहीं है कि उसमें उल्लिखित प्रत्येक ऑडिट टिप्पणी आपराधिक घोटाला साबित हो गई। संबंधित विभागों के जवाब, विधानसभा समितियों की जांच और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई अलग प्रक्रियाएं होती हैं।
DERC की अधिसूचना भी सदन में रखी जाएगी
ऊर्जा मंत्री आशीष सूद Delhi Electricity Regulatory Commission (Terms and Conditions for Open Access) (Second Amendment) Regulations, 2026 से संबंधित अधिसूचना और शुद्धिपत्र सदन में रखेंगे।
ओपन एक्सेस व्यवस्था सामान्य रूप से पात्र बिजली उपभोक्ताओं को स्थानीय वितरण कंपनी के अतिरिक्त दूसरे स्रोत से बिजली खरीदने की अनुमति देने वाले नियामकीय ढांचे से जुड़ी होती है। हालांकि दूसरे संशोधन के वास्तविक प्रभाव का आकलन अधिसूचना का पूरा पाठ सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।
विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में
आम आदमी पार्टी मानसून सत्र में दवाओं की खरीद से जुड़े कथित अनियमितताओं, छात्राओं की साइकिल वितरण योजना और E20 पेट्रोल सहित विभिन्न मुद्दे उठाने की तैयारी कर रही है। ये विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोप और प्रस्तावित मुद्दे हैं; संबंधित मामलों में सरकार का जवाब और सदन की चर्चा शुरू होने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
जनता पर क्या पड़ेगा असर?
- सरकारी सेवाएं लेने वालों पर: समयबद्ध सेवा विधेयक पारित हुआ तो आवेदन निपटाने की समयसीमा और देरी पर अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ सकती है।
- JJ क्लस्टर के निवासियों पर: कट-ऑफ तारीख 2025 होने से नए परिवारों के पुनर्वास की पात्रता का रास्ता खुल सकता है, लेकिन आवास का आवंटन स्वतः नहीं होगा।
- बेड एंड ब्रेकफास्ट संचालकों पर: पुराना कानून रद्द होने के बाद पंजीकरण और संचालन नियम बदल सकते हैं। नई व्यवस्था स्पष्ट होने तक मौजूदा नियमों का पालन जरूरी रहेगा।
- दिल्ली के करदाताओं पर: CAG रिपोर्ट सरकार की आय, खर्च और बजट प्रबंधन की स्थिति को सार्वजनिक एवं विधायी जांच के दायरे में लाएगी।