भोपाल, 6 अगस्त 2026 | मध्य प्रदेश में मानसून का वितरण अब भी असमान बना हुआ है। प्रदेश के उत्तरी हिस्से में कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो रही है, जबकि भोपाल, इंदौर और मध्य तथा दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों के कई जिलों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है। IMD के नवीनतम संचयी आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 5 अगस्त तक प्रदेश में औसतन 413.1 मिलीमीटर यानी करीब 16.3 इंच बारिश दर्ज की गई। इस तारीख तक 507.2 मिलीमीटर, करीब 20 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। यानी राज्य सामान्य से 19 प्रतिशत या लगभग 94 मिलीमीटर—करीब 3.7 इंच—पीछे है।
55 में से 27 जिले आधिकारिक वर्षा-घाटे की श्रेणी में
IMD की श्रेणीवार रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के 55 जिलों में से 26 को ‘Deficient’ और एक जिले को ‘Large Deficient’ श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा दो जिले ‘Excess’ और 26 ‘Normal’ श्रेणी में हैं। इस तरह आधिकारिक वर्गीकरण में कुल 27 जिले गंभीर वर्षा-घाटे वाली श्रेणी में आते हैं।
यहां ‘Normal’ श्रेणी का अर्थ यह नहीं कि उस जिले में बिल्कुल सामान्य या अधिक बारिश ही हुई है। IMD सामान्य से 19 प्रतिशत कम से 19 प्रतिशत अधिक वर्षा को ‘Normal’ श्रेणी में रखता है। इसलिए भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे जिले अपने व्यक्तिगत सामान्य आंकड़े से पीछे होने के बावजूद तकनीकी रूप से ‘Normal’ श्रेणी में हो सकते हैं।
आज इन 9 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
6 अगस्त के लिए जारी जिलेवार पूर्वानुमान में इन जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवा की चेतावनी दी गई है:
- शिवपुरी
- ग्वालियर
- दतिया
- भिंड
- रीवा
- मऊगंज
- सतना
- पन्ना
- छतरपुर
इन क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवा चल सकती है। यह चेतावनी गुरुवार सुबह 8:30 बजे से शुक्रवार सुबह 8:30 बजे तक प्रभावी है।
भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, रतलाम और प्रदेश के कई अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश अथवा गरज-चमक की गतिविधियां हो सकती हैं। बारिश का असर एक जिले के भीतर भी अलग-अलग तहसीलों में बदल सकता है।
अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग के ताजा उपखंड स्तरीय पूर्वानुमान के अनुसार 6 अगस्त को पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। 7 अगस्त को पश्चिमी मध्य प्रदेश में चेतावनी का स्तर बढ़कर कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश तक पहुंच सकता है, जबकि पूर्वी हिस्से में भारी वर्षा का अनुमान है।
8 अगस्त को पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं भारी बारिश जारी रह सकती है। पूर्वी हिस्से में भारी वर्षा की उपखंड स्तरीय चेतावनी नहीं है, लेकिन गरज-चमक और स्थानीय बारिश की संभावना बनी रहेगी।
| तारीख | पश्चिमी मध्य प्रदेश | पूर्वी मध्य प्रदेश |
|---|---|---|
| 6 अगस्त | कहीं-कहीं भारी बारिश | कहीं-कहीं भारी बारिश |
| 7 अगस्त | कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश | कहीं-कहीं भारी बारिश |
| 8 अगस्त | कहीं-कहीं भारी बारिश | गरज-चमक और स्थानीय बारिश |
| 9 अगस्त | गरज-चमक की संभावना | गरज-चमक की संभावना |
क्या नया पश्चिमी विक्षोभ बारिश कराएगा?
बारिश की आगामी गतिविधियों को केवल नए पश्चिमी विक्षोभ का असर बताना पूरी तरह सटीक नहीं होगा। मौसम केंद्र भोपाल की रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर क्षेत्र वाला पश्चिमी विक्षोभ अब कम स्पष्ट हो गया है। इस समय मानसूनी द्रोणिका उत्तर भारत से गुजर रही है। इसके साथ उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के आसपास ऊपरी हवा में चक्रवाती परिसंचरण मौजूद हैं। इन्हीं प्रणालियों और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी के संयुक्त प्रभाव से उत्तरी, ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड तथा विंध्य क्षेत्र में बारिश बढ़ रही है।
बुधवार को भिंड में 155 मिमी बारिश
प्रदेश में बारिश का वितरण कितना असमान है, इसका उदाहरण पिछले 24 घंटों के आंकड़ों से मिलता है। भिंड में 155 मिलीमीटर और अटेर में 123.2 मिलीमीटर बहुत भारी बारिश दर्ज की गई।
गौरीहार में 102, मऊ में 98, गोरमी में 89, जैतपुर में 79 और रौन व मिहोना में 70-70 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। दूसरी ओर भोपाल और इंदौर समेत कई स्थानों पर मामूली बारिश हुई।
पूर्वी मध्य प्रदेश में 22 प्रतिशत वर्षा घाटा
बारिश की सबसे अधिक कमी पूर्वी मध्य प्रदेश में बनी हुई है। यहां 5 अगस्त तक 431.4 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 556.2 मिलीमीटर है। यानी पूर्वी हिस्से में वर्षा सामान्य से 22 प्रतिशत कम है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 399.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई, जबकि सामान्य 469.6 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। यहां बारिश का घाटा 15 प्रतिशत है।
| क्षेत्र | वास्तविक बारिश | सामान्य बारिश | अंतर |
|---|---|---|---|
| पूरा मध्य प्रदेश | 413.1 मिमी | 507.2 मिमी | -19% |
| पश्चिमी मध्य प्रदेश | 399.1 मिमी | 469.6 मिमी | -15% |
| पूर्वी मध्य प्रदेश | 431.4 मिमी | 556.2 मिमी | -22% |
रीवा में सबसे अधिक 64 प्रतिशत की कमी
जिलावार आंकड़ों में रीवा सबसे अधिक प्रभावित है, जहां वर्षा सामान्य से 64 प्रतिशत कम है। इसके बाद मुरैना में 50, मैहर में 44, नर्मदापुरम में 41, दतिया में 40, सागर और टीकमगढ़ में 35-35 प्रतिशत की कमी है।
सिंगरौली में 34, मंडला में 33, अलीराजपुर और शिवपुरी में 32-32 तथा शाजापुर एवं नरसिंहपुर में 31-31 प्रतिशत वर्षा घाटा दर्ज हुआ है।
क्या मध्य प्रदेश में आधिकारिक रूप से सूखा है?
बारिश की कमी किसानों और जल संसाधनों के लिए चिंता का विषय जरूर है, लेकिन उपलब्ध IMD रिपोर्ट मध्य प्रदेश को राज्य स्तर पर अभी ‘Normal’ श्रेणी में रखती है। कारण यह है कि 19 प्रतिशत तक की कमी IMD की सामान्य श्रेणी की सीमा में आती है।
इसलिए खबर में “सूखा घोषित” या “पूरे प्रदेश में आधिकारिक सूखा” लिखना सही नहीं होगा। अधिक सटीक भाषा होगी—“बारिश की कमी से सूखे जैसी चिंता” या “कई जिलों में गंभीर वर्षा घाटा”।
इंदौर शहर में करीब 100 मिमी की कमी
इंदौर शहर के मौसम केंद्र पर मानसून सीजन की बारिश 394.3 मिलीमीटर के आसपास पहुंची है और मौसमी कमी लगभग 98.5 मिलीमीटर है। बुधवार को शहर में केवल एक मिलीमीटर बारिश हुई थी।
वहीं IMD की जिलेवार रिपोर्ट में पूरे इंदौर जिले का औसत 450.4 मिलीमीटर और सामान्य 461.7 मिलीमीटर है, यानी जिला स्तर पर कमी केवल दो प्रतिशत है। शहर और पूरे जिले के आंकड़े अलग मौसम केंद्रों तथा औसत पद्धति के कारण अलग दिखाई दे सकते हैं।
सोयाबीन समेत खरीफ फसलों पर बढ़ा दबाव
मालवा क्षेत्र में लंबे वर्षा अंतराल से खेतों की नमी घट सकती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सोयाबीन और दूसरी खरीफ फसलों के महत्वपूर्ण विकास चरण में पर्याप्त मिट्टी की नमी जरूरी है। समय पर बारिश न होने पर पौधों की बढ़वार और उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।
हालांकि उत्पादन कितने प्रतिशत घटेगा, इसका अभी निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इसका असर फसल की अवस्था, स्थानीय वर्षा, सिंचाई की उपलब्धता और आगामी बारिश के वितरण पर निर्भर करेगा।
किसानों और आम लोगों पर क्या असर?
- किसानों के लिए: भारी बारिश वाले जिलों में खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था रखें। कम बारिश वाले क्षेत्रों में उपलब्ध सिंचाई का उपयोग फसल की जरूरत के अनुसार करें।
- यात्रियों के लिए: ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड में तेज बारिश के दौरान निचली पुलिया, बहते नाले और जलभराव वाले रास्तों से बचें।
- शहरी क्षेत्रों के लिए: भोपाल और इंदौर में व्यापक भारी बारिश की गारंटी नहीं है, लेकिन स्थानीय तेज बौछारें ट्रैफिक और जल निकासी को प्रभावित कर सकती हैं।
- जल संसाधनों के लिए: असमान बारिश के कारण कुछ बांध और जलाशय भर सकते हैं, जबकि कम वर्षा वाले जिलों में भूजल तथा रबी सीजन के लिए उपलब्ध पानी पर दबाव बना रह सकता है।