नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में लगातार जारी गतिरोध के बीच गुरुवार का दिन अहम माना जा रहा है। केंद्र सरकार आज लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Amendment Bill), 2026 पेश कर सकती है। माना जा रहा है कि इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह भी सदन में सरकार का पक्ष रख सकते हैं। दूसरी ओर, विपक्ष और सरकार के बीच टकराव जारी रहने से लोकसभा में पिछले 15 दिनों से प्रश्नकाल पूरा नहीं हो सका है, जिससे संसदीय कामकाज लगातार प्रभावित हो रहा है।
आज पेश हो सकता है FCRA संशोधन विधेयक
सरकार विदेशी फंडिंग पाने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाने और कानून की खामियों को दूर करने के उद्देश्य से FCRA संशोधन विधेयक-2026 पेश करने की तैयारी में है। यह विधेयक पहले मार्च में बजट सत्र के दौरान पेश किया गया था, लेकिन उस समय लोकसभा से पारित नहीं हो सका था। सूत्रों के मुताबिक, बिल पेश होने के दौरान गृह मंत्री अमित शाह सदन में सरकार का पक्ष रख सकते हैं।
15 दिन से पूरा नहीं हुआ प्रश्नकाल
20 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र में लगातार हंगामे के कारण लोकसभा का एक भी प्रश्नकाल सुचारु रूप से पूरा नहीं हो पाया है। विपक्ष की नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के चलते सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी, जिससे महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी प्रभावित हुए हैं।
रिजिजू-राहुल की बैठक में नहीं निकला समाधान
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से करीब 50 मिनट तक मुलाकात कर सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग मांगा। बैठक में प्रियंका गांधी भी मौजूद रहीं। हालांकि, राहुल गांधी ने सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और गतिरोध खत्म करने के लिए दो प्रमुख शर्तें रखीं।
राहुल गांधी की दो प्रमुख शर्तें
राहुल गांधी ने कहा कि जब तक छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह सदन में बयान नहीं देते और अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर चर्चा नहीं होती, तब तक विपक्ष सरकार का सहयोग नहीं करेगा। विपक्ष का आरोप है कि इन दोनों मुद्दों पर सरकार जवाब देने से बच रही है।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर भी चर्चा
बैठक के दौरान किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण और लोकसभा-विधानसभा सीटों के परिसीमन से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का रुख भी जानने की कोशिश की। राहुल गांधी ने कहा कि इस विषय पर सहयोगी दलों से चर्चा के बाद ही कोई अंतिम राय दी जाएगी।
विशेष सत्र या विस्तार की अटकलों पर विराम
राहुल गांधी से मुलाकात के बाद किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और गृह मंत्री अमित शाह से भी चर्चा की। इसके बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद सत्र की अवधि बढ़ाने या विशेष सत्र बुलाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।
परिसीमन पर क्यों बढ़ी चर्चा?
वर्ष 1973 में संविधान संशोधन के जरिए लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या को फ्रीज किया गया था। बाद में 84वें संविधान संशोधन (2002) के तहत यह व्यवस्था 2026 तक बढ़ा दी गई। अब यह अवधि समाप्त होने वाली है। ऐसे में सरकार को तय करना होगा कि सीटों की संख्या पर रोक जारी रखनी है या नया परिसीमन लागू करना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले का सीधा असर महिला आरक्षण कानून के लागू होने पर भी पड़ सकता है।