मुंबई - महाराष्ट्र में टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने की पहल को बड़ी सफलता मिली है। राज्य सरकार के मुताबिक अब तक एक लाख से अधिक गैर-मराठी टैक्सी और ऑटो चालकों ने रोजमर्रा के कामकाज में इस्तेमाल होने वाली बुनियादी मराठी का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। सरकार का उद्देश्य यात्रियों और चालकों के बीच भाषा की वजह से होने वाली परेशानी को कम करना है।
1 मई से लागू हुआ भाषा संबंधी नियम
महाराष्ट्र सरकार ने 1 मई 2026 से राज्य में टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालकों के लिए बुनियादी मराठी भाषा दक्षता को अनिवार्य करने की व्यवस्था शुरू की थी। इसके तहत चालकों को यात्रियों से सामान्य बातचीत और जरूरी संवाद मराठी में करने में सक्षम बनाने पर जोर दिया गया है।
15 अगस्त तक प्रशिक्षण पूरा करने की अपील
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने मंत्रालय में हुई समीक्षा बैठक के बाद बताया कि अभियान के तहत बड़ी संख्या में चालक प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। उन्होंने एप आधारित टैक्सी सेवाओं से जुड़े ड्राइवरों समेत अन्य चालकों से भी 15 अगस्त तक मराठी प्रशिक्षण पूरा करने की अपील की है। सरकार की ओर से चालकों को ऐसी मराठी सिखाई जा रही है, जिसका इस्तेमाल वे यात्रियों से बातचीत, रास्ता बताने, किराया समझाने और रोजमर्रा की परिस्थितियों में कर सकें।
यात्रियों से मराठी में संवाद पर जोर
राज्य सरकार ने अप्रैल में घोषणा की थी कि महाराष्ट्र में टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए यात्रियों से मराठी में संवाद करने की बुनियादी क्षमता जरूरी होगी। इसके लिए चालकों के भाषा ज्ञान का परीक्षण किए जाने की व्यवस्था भी बताई गई थी। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी भाषा को लेकर भेदभाव पैदा करना नहीं, बल्कि राज्य की आधिकारिक भाषा में बुनियादी संवाद को बढ़ावा देना है।
शुरू किया गया ‘बालासाहेब ठाकरे मराठी शिकवणी अभियान’
महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर ‘बालासाहेब ठाकरे मराठी शिकवणी अभियान’ की शुरुआत की गई। इसके तहत दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र आकर टैक्सी और ऑटो चलाने वाले लोगों के लिए विशेष मराठी पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इस कार्यक्रम में रोजमर्रा के कामकाज से जुड़े शब्दों और वाक्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि चालक कम समय में यात्रियों से प्रभावी तरीके से संवाद कर सकें।
साहित्यिक संस्थाएं भी अभियान का हिस्सा
मराठी भाषा विभाग के साथ मुंबई मराठी साहित्य संघ और कोंकण मराठी साहित्य परिषद जैसे साहित्यिक संगठनों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। इन संस्थाओं की मदद से गैर-मराठी चालकों के लिए व्यावहारिक और आसानी से समझ आने वाला भाषा प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया
परिवहन मंत्री के अनुसार, अभियान को राज्यभर में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। एक लाख से अधिक चालकों का प्रशिक्षण पूरा करना इस पहल की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अब सरकार का फोकस बाकी चालकों को भी निर्धारित समयसीमा में प्रशिक्षण से जोड़ने और महाराष्ट्र में यात्रियों व ड्राइवरों के बीच स्थानीय भाषा में सहज संवाद सुनिश्चित करने पर है।