उत्तरभारत के कई हिस्सों में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। उत्तराखंड से लेकर उत्तरप्रदेश और दिल्ली-NCR तक भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़कों पर मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ का पानी गांवों और सरकारी संस्थानों तक पहुंच गया है।
उत्तराखंड में छह नदियां उफान पर
उत्तराखंड में लगातार बारिश के कारण अलकनंदा, मंदाकिनी और भागीरथी समेत छह प्रमुख नदियां खतरे के स्तर के आसपास या उससे ऊपर बह रही हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे इलाकों में प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर बढ़ने से कई घाट और मंदिर पानी में डूब गए हैं।बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन और राहत एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री हाईवे बंद
भारी बारिश का सबसे ज्यादा असर उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। जगह-जगह सड़क पर मलबा आने और मार्ग बाधित होने के कारण राज्य की 132 सड़कें बंद हैं। इसके अलावा बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को जोड़ने वाले प्रमुख नेशनल हाईवे पर भी आवाजाही रोकनी पड़ी है।चारधाम यात्रा के लिहाज से भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है। लगातार बारिश के बीच यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई मार्गों पर यातायात प्रतिबंधित किया गया है। सड़कें बंद होने से यात्रियों और स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रुद्रप्रयाग में स्कूलों पर भी असर
रुद्रप्रयाग जिले में लगातार खराब मौसम और बारिश को देखते हुए स्कूलों को बंद रखने का फैसला किया गया है। प्रशासन का फोकस फिलहाल बच्चों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर है। पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के दौरान भूस्खलन और अचानक बढ़ते जलस्तर का खतरा बना रहता है, जिसके चलते संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
यूपी में भी बाढ़ का खतरा बढ़ा
उत्तरप्रदेश में भी लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। फर्रुखाबाद में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। बाढ़ का पानी जिले के 33 गांवों और 40 सरकारी स्कूलों तक पहुंचने से ग्रामीण इलाकों में स्थिति चिंताजनक हो गई है।गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण नदी किनारे रहने वाले लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
बलिया में सरयू का बढ़ता संकट
बलिया में सरयू नदी का बढ़ता जलस्तर ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। पिछले एक सप्ताह के दौरान नदी के कटाव की वजह से 27 घर नदी में समा चुके हैं। लगातार हो रहे कटाव से नदी किनारे बसे परिवारों पर अपना आशियाना बचाने का संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय स्तर पर नदी के कटाव से प्रभावित परिवारों की स्थिति बेहद कठिन बनी हुई है। बारिश और नदी के जलस्तर में वृद्धि के बीच आने वाले दिनों में हालात और चुनौतीपूर्ण होने की आशंका है।
दिल्ली-NCR में तेज बारिश, सड़कों पर जलभराव
दिल्ली-NCR में भी गुरुवार को तेज बारिश ने यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया। कई प्रमुख सड़कों पर जलभराव के कारण वाहनों की रफ्तार थम गई और लंबा जाम देखने को मिला। दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे समेत कई मार्गों पर बारिश का असर पड़ा।बारिश के कारण कई इलाकों में सड़कें पानी से भर गईं। इससे ऑफिस जाने वाले लोगों, यात्रियों और वाहन चालकों को काफी परेशानी हुई। जलभराव के चलते कई जगह यातायात को नियंत्रित करने में भी दिक्कतें आईं।
द्वारका में खुले नाले में बहा युवक, 7 घंटे चला रेस्क्यू
दिल्ली के द्वारका सेक्टर-25 में तेज बारिश के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया। बारिश के बीच एक युवक खुले नाले में गिर गया और पानी के तेज बहाव में बह गया। घटना की सूचना मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा और युवक की तलाश शुरू की गई।लगभग सात घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन युवक का कोई सुराग नहीं मिल सका। तेज बारिश और पानी के बहाव के कारण बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आईं।
कई राज्यों में बारिश ने बढ़ाई चिंता
उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश और दिल्ली-NCR में बारिश से पैदा हुए हालात यह दिखा रहे हैं कि मानसूनी बारिश अब सामान्य जनजीवन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पहाड़ों में सड़क और हाईवे बंद होने से संपर्क प्रभावित है, जबकि मैदानी इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से गांवों में बाढ़ और कटाव का खतरा बना हुआ है।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। लोगों से नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने तथा मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की जा रही है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति को देखते हुए राहत और बचाव एजेंसियों के सामने चुनौती बनी रह सकती है।