NEET UG Paper Leak: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में कथित पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी चार्जशीट में एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसने परीक्षा की गोपनीयता और पूरी चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, लीक की शुरुआती कड़ी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े तीन विषय विशेषज्ञों तक पहुंचती है। CBI ने इस मामले में कुल 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें तीन विषय विशेषज्ञों के अलावा कथित बिचौलिये, कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग और अन्य आरोपी शामिल हैं। चार्जशीट में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी ने डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, हैंडराइटिंग विशेषज्ञों की राय और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को भी अपनी जांच का हिस्सा बनाया है। मामले की सबसे अहम बात यह है कि CBI के अनुसार कथित तौर पर पूरा प्रश्नपत्र किसी एक डिजिटल फाइल के रूप में सीधे बाहर नहीं भेजा गया। इसके बजाय प्रश्नों, विकल्पों और सही उत्तरों को अलग-अलग तरीकों से चुनिंदा छात्रों तक पहुंचाने की कोशिश की गई। जांच के मुताबिक, कुछ मामलों में छात्रों को प्रश्न बोलकर लिखवाए गए, जबकि बाद में इन्हीं सामग्री की तस्वीरें और डिजिटल फाइलें दूसरे लोगों तक पहुंचीं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। आरोपियों की दोषसिद्धि अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी।
NEET UG Paper Leak की शुरुआत कहां से हुई?
CBI की जांच के मुताबिक कथित लीक की शुरुआत परीक्षा की गोपनीय सामग्री तक अधिकृत पहुंच रखने वाले विशेषज्ञों से हुई। ये विशेषज्ञ NTA की परीक्षा प्रक्रिया के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर जुड़े हुए थे और अलग-अलग विषयों से संबंधित प्रश्नों की तैयारी, अनुवाद या समीक्षा जैसी जिम्मेदारियों में शामिल थे। चार्जशीट में जिन तीन विषय विशेषज्ञों का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है, वे हैं:
मनीषा गुरुनाथ मांधरे — बॉटनी और जूलॉजी
प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी (पीवी कुलकर्णी) — केमिस्ट्री
मनीषा संजय हवलदार — फिजिक्स
सरकारी जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार मनीषा मांधरे के पास बॉटनी और जूलॉजी के प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी, जबकि पीवी कुलकर्णी को केमिस्ट्री से जुड़े प्रश्नपत्रों तक पहुंच मिली थी। CBI ने दोनों को कथित लीक नेटवर्क की शुरुआती कड़ियों में शामिल बताया है।
पूरा पेपर बाहर निकालने के बजाय अपनाया गया अलग तरीका
इस मामले में सबसे दिलचस्प पहलू कथित लीक का तरीका है। CBI की जांच के मुताबिक आरोपियों ने पूरे प्रश्नपत्र की कॉपी बनाकर उसे खुले तौर पर डिजिटल माध्यम से प्रसारित करने के बजाय प्रश्नों और उत्तरों को सीमित संख्या में लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की। जांच में सामने आया कि कुछ प्रश्नों को छात्रों के सामने बोला गया और उन्होंने उन्हें अपनी नोटबुक में लिख लिया। इससे कथित तौर पर प्रश्नपत्र की डिजिटल कॉपी बनाने या उसे सीधे मोबाइल से साझा करने की जरूरत कम हो गई। जांच एजेंसी के मुताबिक यही तरीका बाद में नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों तक सामग्री पहुंचाने के लिए इस्तेमाल हुआ। CBI के अनुसार यह तरीका कथित तौर पर डिजिटल सबूतों से बचने के लिए अपनाया गया था। लेकिन आगे चलकर नोटबुक, फोन रिकॉर्ड, भुगतान और अन्य डिजिटल साक्ष्यों ने जांचकर्ताओं को नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में मदद की।
पुणे में छात्रों को कथित तौर पर बताए गए सवाल
CBI की चार्जशीट के अनुसार पीवी कुलकर्णी और मनीषा मांधरे पर पुणे में चुनिंदा छात्रों के लिए विशेष सत्र आयोजित करने का आरोप है। जांच में आरोप लगाया गया है कि इन बैठकों में परीक्षा के प्रश्न, उनके विकल्प और सही उत्तर छात्रों को बताए गए। छात्र इन सवालों को अपनी नोटबुक में लिखते थे। मई 2026 में CBI ने पीवी कुलकर्णी को इस मामले में कथित मुख्य स्रोत के रूप में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने उस समय दावा किया था कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में पुणे स्थित उनके आवास पर विशेष कोचिंग सत्र आयोजित किए गए, जहां छात्रों को प्रश्न और उत्तर लिखवाए गए। CBI के मुताबिक छात्रों की नोटबुक में लिखे प्रश्न 3 मई 2026 को आयोजित वास्तविक NEET-UG प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए। यही मिलान जांच में एक महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आया।
मनीषा हवलदार पर भी गंभीर आरोप
फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार का नाम भी चार्जशीट में प्रमुखता से शामिल है। CBI के अनुसार हवलदार ने कथित तौर पर फिजिक्स के प्रश्न कुछ कोचिंग शिक्षकों तक पहुंचाए। इन प्रश्नों को हाथ से लिखे जाने और बाद में उनकी तस्वीरें खींचकर आगे भेजे जाने की बात जांच में सामने आई है। जांच एजेंसी ने पुणे स्थित APMA कोचिंग संस्थान से जुड़े शिक्षक तेजस हर्षदकुमार शाह का नाम भी चार्जशीट में शामिल किया है। आरोप है कि हवलदार से प्राप्त प्रश्न आगे दूसरे लोगों तक पहुंचाए गए। इस पूरी प्रक्रिया में फोन नंबर, डिजिटल संचार और कथित भुगतान से जुड़े साक्ष्यों की भी जांच की गई।
हाथ से लिखे सवालों से खुलती गई जांच की कड़ी
कथित पेपर लीक में हाथ से लिखी गई सामग्री जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गई। अगर प्रश्न सीधे किसी PDF या मैसेज के जरिए बड़े स्तर पर साझा किए जाते, तो डिजिटल ट्रेल मिलने की संभावना अधिक रहती। लेकिन जांच के अनुसार कुछ शुरुआती चरणों में छात्रों को प्रश्न बोलकर लिखवाए गए। बाद में इन्हीं हस्तलिखित नोट्स और उनकी तस्वीरों के जरिए कथित तौर पर नेटवर्क आगे बढ़ा। CBI ने छात्रों की नोटबुक में मौजूद सामग्री का वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र से मिलान कराया। जांच एजेंसी ने दावा किया कि फोरेंसिक और विशेषज्ञ परीक्षण में कई प्रश्न वास्तविक NEET-UG 2026 परीक्षा के प्रश्नों से मेल खाते पाए गए।
लातूर तक पहुंचा सवालों का नेटवर्क
जांच के मुताबिक पेपर लीक की कथित गतिविधियां केवल पुणे तक सीमित नहीं रहीं। CBI ने लातूर के कोचिंग नेटवर्क से जुड़े शिवराज रघुनाथ मोतेगांवकर और डॉक्टर मनोज भगवानराव शिरुरे सहित कई लोगों को भी आरोपी बनाया है। चार्जशीट में आरोप है कि कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले विशेष स्थानों पर बुलाकर कथित रूप से लीक हुए प्रश्न और उत्तर याद करवाए गए। इससे जांच एजेंसी को यह पता लगाने में मदद मिली कि कथित तौर पर परीक्षा से पहले प्रश्नों को केवल एक जगह रखने के बजाय अलग-अलग समूहों तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई थी।
महाराष्ट्र से दूसरे राज्यों तक पहुंची सामग्री
CBI के मुताबिक कथित नेटवर्क की एक और महत्वपूर्ण कड़ी महाराष्ट्र से बाहर निकलती है। जांच में शुभम मधुकर खैरनार और यश यादव सहित अन्य आरोपियों के नाम सामने आए। आरोप है कि प्रश्नों को एक PDF के रूप में तैयार करके टेलीग्राम के माध्यम से आगे भेजा गया। इसके बाद कथित तौर पर यह सामग्री राजस्थान के जयपुर तक पहुंची। चार्जशीट के अनुसार जयपुर के मंगीलाल बिवाल तक यह सामग्री करीब 10 से 12 लाख रुपये में पहुंचाई गई। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद सामग्री को प्रिंट करवाकर अलग-अलग लोगों तक पहुंचाया गया।
इस तरह कथित नेटवर्क की कड़ी पुणे → लातूर → अन्य शहरों → जयपुर तक जाती दिखाई देती है।
जयपुर में भी कथित तौर पर बांटी गई सामग्री
CBI की जांच में आरोप लगाया गया है कि जयपुर पहुंचने के बाद कथित लीक सामग्री का इस्तेमाल उन छात्रों और अन्य लोगों तक पहुंचाने में किया गया जो NEET-UG परीक्षा से जुड़े थे। मंगीलाल बिवाल के अलावा चार्जशीट में विकाश बिवाल और दिनेश बिवाल के नाम भी आरोपी के तौर पर शामिल हैं। इससे जांच एजेंसी ने यह निष्कर्ष निकालने की कोशिश की कि कथित लीक केवल किसी एक शहर या सीमित समूह तक नहीं रहा, बल्कि इसे अलग-अलग राज्यों में मौजूद संपर्कों के जरिए आगे बढ़ाया गया।
डिजिटल पेमेंट ने खोली पैसे के लेनदेन की परत
पेपर लीक की जांच में सिर्फ प्रश्नों और नोटबुक का मिलान ही नहीं किया गया। CBI ने कथित आर्थिक लेनदेन को भी जांच का अहम हिस्सा बनाया है। चार्जशीट के मुताबिक कुछ आरोपियों के बीच डिजिटल भुगतान के साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी ने ऐसे मोबाइल नंबर और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की जिनका कथित तौर पर लीक नेटवर्क से संबंध था। इससे जांचकर्ताओं को यह समझने में मदद मिली कि कथित तौर पर प्रश्नों के बदले पैसे किस तरह और किन लोगों के बीच भेजे गए। CBI ने फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों को जोड़कर कथित लेनदेन की कड़ियां स्थापित करने की कोशिश की है।
नकदी बरामदगी का भी चार्जशीट में जिक्र
जांच एजेंसी ने कथित पेपर लीक नेटवर्क में नकद रकम से जुड़े साक्ष्यों का भी उल्लेख किया है। चार्जशीट के अनुसार डॉक्टर मनोज शिरुरे के एक परिजन के पास से 5 लाख रुपये नकद बरामद किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि किसी बरामद रकम को सीधे अपराध की कमाई मानना तभी अंतिम रूप से संभव होगा जब अदालत में उससे जुड़े सभी तथ्य और साक्ष्य स्थापित हों। फिलहाल CBI ने इसे अपनी जांच का हिस्सा बनाया है।
फोरेंसिक जांच बनी CBI के लिए अहम कड़ी
इस मामले में फोरेंसिक जांच ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। CBI ने चार्जशीट के साथ डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण, हैंडराइटिंग विशेषज्ञों की रिपोर्ट और अकादमिक विशेषज्ञों की राय भी संलग्न की है। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा छात्रों की नोटबुक में लिखे सवालों और वास्तविक NEET-UG प्रश्नपत्र के बीच समानता की जांच करना था। यदि किसी छात्र की नोटबुक में परीक्षा से पहले लिखे गए सवाल बाद में वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं, तो यह जांच के लिए महत्वपूर्ण परिस्थितिजन्य साक्ष्य बन सकता है। CBI ने इसी तरह के साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के बीच कथित संबंधों को जोड़ने की कोशिश की है।
CBI ने 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट
CBI ने इस मामले में कुल 13 आरोपियों को चार्जशीट में नामजद किया है। इनमें तीन NTA विषय विशेषज्ञों के अलावा कथित बिचौलिये, कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग और अन्य आरोपी शामिल हैं।
चार्जशीट में शामिल प्रमुख नामों में:
मनीषा गुरुनाथ मांधरे
प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी
मनीषा संजय हवलदार
मनीषा संजय वाघमारे
धनंजय निवृत्ति लोखंडे
शुभम मधुकर खैरनार
यश यादव
मंगीलाल बिवाल
विकाश बिवाल
दिनेश बिवाल
डॉक्टर मनोज भगवानराव शिरुरे
शिवराज रघुनाथ मोतेगांवकर
तेजस हर्षदकुमार शाह शामिल हैं।
CBI ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात और भ्रष्टाचार से जुड़े प्रावधानों सहित अन्य कानूनों के तहत आरोप लगाए हैं।
क्या NTA के किसी सरकारी अधिकारी का नाम चार्जशीट में है?
इस मामले में एक अहम बात यह है कि चार्जशीट में फिलहाल NTA के किसी सरकारी अधिकारी को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार जांच में पेपर की गोपनीय सामग्री तक पहुंच रखने वाले कॉन्ट्रैक्ट पर जुड़े विषय विशेषज्ञों की भूमिका सामने आई है। इसलिए खबर में “NTA के अधिकारी” और “NTA से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट विशेषज्ञ” के बीच अंतर समझना जरूरी है। CBI की जांच के अनुसार कथित तौर पर इन विशेषज्ञों ने अपनी अधिकृत पहुंच का दुरुपयोग किया। यह आरोप अभी अदालत में साबित होना बाकी है।
NEET-UG 2026 परीक्षा पर पड़ा था बड़ा असर
NEET-UG देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। लाखों विद्यार्थी MBBS, BDS और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए इस परीक्षा में शामिल होते हैं। पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे और मूल परीक्षा को रद्द करके दोबारा परीक्षा करानी पड़ी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की गई थी। इस वजह से इस मामले का प्रभाव सिर्फ आरोपियों और जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लाखों छात्रों की परीक्षा प्रक्रिया और प्रवेश कार्यक्रम पर भी पड़ा।
CBI की जांच से क्या तस्वीर सामने आती है?
चार्जशीट के आधार पर जांच की कहानी को देखें तो कथित नेटवर्क कई चरणों में आगे बढ़ा। पहले परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों के पास मौजूद गोपनीय सामग्री तक पहुंच बनी। इसके बाद कुछ सवालों और उत्तरों को कथित तौर पर सीमित छात्रों तक पहुंचाया गया। आगे चलकर यही सामग्री कोचिंग नेटवर्क और बिचौलियों के जरिए दूसरे शहरों तक पहुंची। कुछ स्तरों पर हस्तलिखित नोट्स का इस्तेमाल हुआ तो बाद के चरणों में डिजिटल माध्यम और PDF का भी इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। फिर कथित तौर पर पैसे के लेनदेन हुए और सामग्री को दूसरे राज्यों में पहुंचाया गया। CBI ने इन सभी अलग-अलग कड़ियों को फोरेंसिक रिपोर्ट, नोटबुक, मोबाइल रिकॉर्ड, डिजिटल भुगतान और बरामदगी जैसे साक्ष्यों के जरिए जोड़ने की कोशिश की है।
आगे क्या होगा?
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में जाएगा। अदालत में CBI द्वारा पेश किए गए दस्तावेज, गवाह और अन्य साक्ष्य जांचे जाएंगे। आरोपियों को अदालत में अपना पक्ष रखने का अधिकार होगा और अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों को कानूनी मानकों के अनुरूप साबित करना होगा। इसलिए चार्जशीट में लगाए गए आरोपों को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। दोष या निर्दोष होने का अंतिम निर्धारण अदालत करेगी।