जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत की अपील के बाद राजस्थान सरकार भी बड़े प्रशासनिक बदलाव की तैयारी में जुट गई है। राज्य सरकार जल्द नई गाइडलाइन जारी कर सकती है, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी जा सकती है। इसके साथ ही सरकारी खर्च और ईंधन खपत कम करने के लिए कई विभागों में नई व्यवस्थाएं लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
सरकारी खर्च और ईंधन बचत पर फोकस
राजस्थान सरकार अब सरकारी खर्चों में कटौती और ईंधन बचत को लेकर गंभीर कदम उठाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक मंत्रियों और अधिकारियों के काफिलों में शामिल वाहनों की संख्या कम की जा रही है, ताकि पेट्रोल-डीजल की खपत घटाई जा सके। सरकार करीब एक दर्जन से अधिक विभागों में अगले सप्ताह से वर्क फ्रॉम होम और नो-व्हीकल डे जैसी व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है।
वर्चुअल मोड में होंगी बैठकें
नई गाइडलाइन के तहत सरकारी विभागों की नियमित बैठकें, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप को धीरे-धीरे वर्चुअल मोड में शिफ्ट किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे अधिकारियों और कर्मचारियों की यात्रा कम होगी और करोड़ों रुपए के ईंधन व अन्य खर्चों की बचत होगी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिया संदेश
राजस्थान के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma ने भी ईंधन बचत को लेकर बड़ा संदेश दिया है। जयपुर में आयोजित ‘एनर्जी कॉन्क्लेव’ में मुख्यमंत्री अपने पारंपरिक बड़े काफिले के बजाय इलेक्ट्रिक वाहन से पहुंचे। इसे सरकार की नई नीति का प्रतीकात्मक संकेत माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने लोगों से भी कम से कम निजी वाहनों का उपयोग करने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है।
जल्द जारी हो सकती है आधिकारिक गाइडलाइन
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नई गाइडलाइन में वर्क फ्रॉम होम के अलावा ऊर्जा बचत, सरकारी वाहनों के सीमित उपयोग और डिजिटल कार्यप्रणाली को बढ़ावा देने जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं। राजस्थान सरकार का मानना है कि इससे ईंधन संकट के बीच राहत मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।