जम्मू-कश्मीर- पवित्र अमरनाथ यात्रा 2026 के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के श्रद्धालुओं के नाम एक विशेष पत्र लिखकर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बाबा बर्फानी के दर्शन को करोड़ों शिवभक्तों के लिए आध्यात्मिक आस्था का केंद्र बताते हुए कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता, सेवा भावना और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से सुरक्षित यात्रा करने के साथ-साथ पांच महत्वपूर्ण संकल्प लेने की अपील की, ताकि यह यात्रा राष्ट्र निर्माण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी का भी संदेश दे सके।
श्रद्धालुओं से सुरक्षित यात्रा और नियमों का पालन करने की अपील
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि अमरनाथ यात्रा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच आयोजित होती है। ऐसे में प्रत्येक श्रद्धालु को प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए। उन्होंने बारिश, ठंड और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह देते हुए कहा कि सुरक्षा बलों और प्रशासन का उद्देश्य हर श्रद्धालु की यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम बनाना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करते हुए जिम्मेदारी के साथ यात्रा पूरी करें।
पीएम मोदी ने दिलाए पांच महत्वपूर्ण संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी ने श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान पांच अहम संकल्प लेने का आग्रह किया। पहला संकल्प यात्रा मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार की गंदगी न फैलाने का है। दूसरा संकल्प प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सभी निर्देशों का पालन करने का है ताकि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे। तीसरे संकल्प के रूप में उन्होंने 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को बढ़ावा देते हुए कहा कि श्रद्धालु अपनी यात्रा पर होने वाले कुल खर्च का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा जम्मू-कश्मीर के स्थानीय उत्पादों की खरीद पर खर्च करें, जिससे स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों की आजीविका मजबूत हो सके। चौथे संकल्प के तहत प्रधानमंत्री ने 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान में भाग लेने और पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण करने की अपील की। पांचवें संकल्प के रूप में उन्होंने 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने और देशहित को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया।
भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है अमरनाथ यात्रा
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि अमरनाथ यात्रा भारत की विविधता में एकता का सबसे सुंदर उदाहरण है। देश के अलग-अलग राज्यों, भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं से जुड़े लाखों श्रद्धालु एक ही आस्था के साथ बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान जम्मू-कश्मीर के स्थानीय लोग श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत करते हैं, जबकि देशभर से आए स्वयंसेवक लंगर और भंडारों के माध्यम से निःस्वार्थ सेवा करते हैं। यही भारतीय संस्कृति के 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के आदर्श को साकार करता है और सामाजिक सद्भाव तथा राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाता है।
श्राइन बोर्ड, सेना और सुरक्षा बलों की सराहना की
प्रधानमंत्री मोदी ने यात्रा के सफल संचालन में योगदान देने वाले सभी संस्थानों और कर्मियों की भी सराहना की। उन्होंने श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड, जम्मू-कश्मीर प्रशासन, भारतीय सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस, आईटीबीपी, बीएसएफ, एनडीआरएफ, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, सफाई कर्मचारियों और स्वयंसेवकों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन्हीं की बदौलत लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से संपन्न होती है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी सेवा भावना से कार्य कर रहे सभी कर्मियों का योगदान देश के लिए प्रेरणादायक है।
पत्र के अंत में बाबा बर्फानी से मांगा सभी के सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री ने बाबा अमरनाथ से सभी श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और सुरक्षित यात्रा की कामना की। उन्होंने विश्वास जताया कि इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा आस्था, सेवा, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रभक्ति का भव्य उत्सव बनेगी तथा सभी श्रद्धालु सुरक्षित और मंगलमय यात्रा पूरी कर अपने घर लौटेंगे।