पुरी - रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को उनके-अपने विशाल लकड़ी के रथों में विराजमान कर भक्तों द्वारा खींचा जाता है। यह यात्रा श्रीजगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर गुंडिचा मंदिर तक जाती है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु रथों की रस्सियां खींचकर स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं।
एक सप्ताह तक गुंडिचा मंदिर में प्रवास
परंपरा के अनुसार तीनों देवता रथ यात्रा के बाद गुंडिचा मंदिर में लगभग एक सप्ताह तक विराजमान रहते हैं। इसे भगवान जगन्नाथ की मौसी के घर की यात्रा भी माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुंडिचा मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन करते हैं। सप्ताहभर के प्रवास के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा बहुदा यात्रा के माध्यम से पुनः श्रीजगन्नाथ मंदिर लौटते हैं। यह वापसी यात्रा भी रथ यात्रा जितनी ही भव्य और धार्मिक महत्व की मानी जाती है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम
रथ यात्रा को देखते हुए पुरी में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है। भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, चिकित्सा सुविधाएं, पेयजल, सफाई और आपातकालीन सेवाओं केलिए विशेष योजनाएं लागू की जा रही हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन की सुविधा मिल सके। जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदू धर्म के सबसे बड़े और सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर वर्ष इस ऐतिहासिक उत्सव में लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं और भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते हैं। इस बार भी 16 जुलाई से शुरू होने वाली रथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।