नई दिल्ली. भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार सहित देश के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा। कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी वर्षा के साथ 50 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका जताते हुए लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। ऐसे मौसम में अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र बना वजह
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तथा उससे सटे उत्तरी ओडिशा और पश्चिम बंगाल तट के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो गया है। यही सक्रिय वेदर सिस्टम मानसूनी हवाओं को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान कर रहा है। इसके प्रभाव से देश के मध्य भागों में अगले 5 से 6 दिनों तक व्यापक वर्षा गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। यह प्रणाली धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए कई राज्यों में अच्छी बारिश का कारण बनेगी और मानसून की गति को और मजबूत करेगी।
इन राज्यों में अगले कुछ दिनों तक रहेगी सबसे ज्यादा बारिश
आईएमडी के अनुसार 2 से 5 जुलाई के बीच दक्षिण गुजरात और कोंकण क्षेत्र में अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना है। वहीं 2 से 4 जुलाई तक सौराष्ट्र और कच्छ में भी मूसलाधार बारिश का अनुमान जताया गया है। 3 और 4 जुलाई को पश्चिमी मध्य प्रदेश तथा ओडिशा में कई स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा हो सकती है। इसके अलावा 3 से 5 जुलाई के दौरान मध्य महाराष्ट्र में भी कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश दर्ज होने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका बनी हुई है।
उत्तर-पश्चिम भारत में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है मानसून
मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश के शेष हिस्सों, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कुछ और क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। इससे उत्तर-पश्चिम भारत के उन इलाकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जहां अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। अच्छी बारिश से तापमान में गिरावट आने के साथ कृषि गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।
यात्रा और खेती दोनों के लिए अहम रहेगा यह मौसम
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की सक्रियता खरीफ फसलों की बुआई के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और दलहन जैसी फसलों को इस समय पर्याप्त वर्षा की आवश्यकता होती है। वहीं, लगातार बारिश को देखते हुए यात्रियों को भी यात्रा से पहले मौसम की जानकारी अवश्य लेने की सलाह दी गई है। पहाड़ी क्षेत्रों, नदी किनारे और जलभराव वाले इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होगी ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।
प्रशासन और नागरिकों के लिए सतर्क रहने का समय
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि भारी बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को आपदा प्रबंधन की तैयारियां मजबूत रखने और नागरिकों को समय-समय पर मौसम संबंधी चेतावनियों से अवगत कराने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान वेदर सिस्टम सक्रिय बना रहा तो जुलाई के शुरुआती सप्ताह में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की स्थिति और अधिक मजबूत हो सकती है।