देशभर में आज भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन मनाया जा रहा है। इस बार राखी बांधने के लिए बहनों को कई शुभ मुहूर्त मिलेंगे और खास बात यह है कि पर्व के दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा। वहीं, आज साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी है, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा।
रक्षाबंधन पर बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई बहन की रक्षा और हर सुख-दुख में साथ देने का संकल्प लेते हैं। आइए जानते हैं आज राखी बांधने का सबसे शुभ समय, अन्य मुहूर्त और पूजा की सही विधि।
रक्षाबंधन 2026 पर कब से कब तक है पूर्णिमा तिथि?
हिंदू पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस बार सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह 9:08 बजे शुरू हुई और इसका समापन 28 अगस्त सुबह 9:48 बजे होगा।इसी अवधि के आधार पर आज रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा रहा है।
इस बार रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा भद्रा का साया
रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल को राखी बांधने के लिए शुभ नहीं माना जाता। इस बार राहत की बात यह है कि भद्रा काल रक्षाबंधन के मुख्य मुहूर्त से पहले ही समाप्त हो चुका है।पंचांग के अनुसार भद्रा 27 अगस्त सुबह 9:08 बजे से रात 9:32 बजे तक रही। यानी आज राखी बांधने के समय भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा।
राखी बांधने का सबसे खास शुभ मुहूर्त
आज भाई की कलाई पर राखी बांधने का प्रमुख शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक रहेगा।इस तरह बहनों को राखी बांधने के लिए करीब 3 घंटे 51 मिनट का शुभ समय मिलेगा। इस दौरान भाई को राखी बांधना शुभ माना जा रहा है।
अभिजीत मुहूर्त में भी बांध सकते हैं राखी
अगर किसी कारण से सुबह के मुख्य मुहूर्त में राखी नहीं बांध पाते हैं, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह शुभ कार्य किया जा सकता है।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक
शुभ चौघड़िया: दोपहर 12:28 बजे से 2:03 बजे तक
अपराह्न काल: दोपहर 1:44 बजे से शाम 4:16 बजे तक
चर चौघड़िया: शाम 5:13 बजे से 6:48 बजे तक
रक्षाबंधन पर आज चंद्र ग्रहण भी
आज साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। हालांकि, यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका रक्षाबंधन पर्व के आयोजन पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं रहेगा और देशभर में लोग परंपरा के अनुसार रक्षाबंधन मना सकेंगे।
रक्षाबंधन पर कैसे बांधें राखी? जानें पूजा विधि
रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और अपने इष्टदेव का स्मरण करें। इसके बाद पूजा की थाली तैयार करें। इसमें रोली, चंदन, अक्षत, दही, राखी, मिठाई और घी का दीपक रखें।सबसे पहले भगवान की पूजा करें। इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। परंपरा के अनुसार राखी बांधते समय भाई और बहन दोनों का सिर ढका होना चाहिए। बहन सिर पर चुनरी और भाई साफ रुमाल या स्वच्छ वस्त्र रख सकता है।
इसके बाद भाई के माथे पर रोली या चंदन का तिलक लगाकर अक्षत लगाएं। भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर आरती उतारकर मिठाई खिलाएं।
राखी बांधने के बाद घर के माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना भी शुभ माना जाता है। भाई अपनी सामर्थ्य के अनुसार बहन को उपहार देकर उसकी रक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प ले सकता है।