पश्चिम बंगाल: रक्षाबंधन के त्योहार से ठीक पहले पश्चिम बंगाल के बाजारों में रंग-बिरंगी राखियों की रौनक के बीच एक नया और अनोखा राजनीतिक रुझान देखा जा रहा है। राज्य के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सबंग ब्लॉक स्थित तेमाथानी बाजार और बीरभूम जिले के सिऊड़ी स्थित बाजारों में इस बार साधारण व धार्मिक राखियों के साथ-साथ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के चित्र वाली राखियों की जबरदस्त मांग बनी हुई है। रक्षाबंधन पर्व की आहट के साथ ही दुकानों पर इन विशेष राखियों की खरीदारी के लिए ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
kolkata बारबाज़ार में बढ़ा क्रेज, एक ही दिन में बिक गया पूरा स्टॉक
बारबाज़ार बाजार सहित आसपास के व्यापारिक केंद्रों पर इस बार पारंपरिक डिजाइनों के अलावा राजनीतिक दिग्गजों के फोटो लगे उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। स्थानीय विक्रेताओं और कारीगरों का कहना है कि जोखिम उठाकर बनाई गई ये राखियां बाजार में आते ही हाथों-हाथ बिक गईं। थोक विक्रेता और 'राखीपाड़ा' के कारीगरों का नेतृत्व कर रहे स्वपन के अनुसार, शुरुआत में 5,000 राखियां तैयार की गई थीं जो एक ही दिन में समाप्त हो गईं। अत्यधिक मांग को देखते हुए अब 84 से 96 रुपये प्रति दर्जन के नए मूल्य स्तर पर दोबारा उत्पादन शुरू किया गया है।
सिऊड़ी में कारीगरों को मिले हजारों राखियों के थोक ऑर्डर
बीरभूम जिले के सिऊड़ी में भी राजनीतिक प्रतीक चिन्हों और नेताओं के चित्रों वाली राखियों को लेकर कारीगरों की व्यस्तता काफी बढ़ गई है। सिऊड़ी के राखी निर्माता अक्षय मालाकार ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से लगभग 2,000 राजनीतिक राखियों का अग्रिम ऑर्डर मिल चुका है। बाजार की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए कारीगरों ने लगभग 5,000 राखियां तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इन उत्पादों में पार्टी का चुनाव चिन्ह 'कमल' भी प्रमुखता से शामिल है।
धार्मिक आस्था और ऊंचे बजट वाली राखियों की भी धूम
राजनीतिक रुझान के अलावा बाजार में धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता भी देखने को मिल रही है। भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के चित्रों से सजी राखियां भी श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। बाजार में साधारण सुतली और मोतियों वाली राखियों से लेकर विशेष डिजाइन वाली प्रीमियम राखियां उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत ₹500 से लेकर ₹1,000 तक पहुंच रही है।
राखी बंधवाने का पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व
रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का उत्सव नहीं है, बल्कि इसका संबंध प्राचीन पौराणिक और ऐतिहासिक घटनाओं से भी जुड़ा है:
- पौराणिक कथाएं: देवासुर संग्राम के दौरान इंद्राणी शची ने देवराज इंद्र की रक्षा के लिए उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था। वहीं, महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण की कटी उंगली से बहते रक्त को रोकने के लिए द्रौपदी ने अपनी साड़ी का आंचल बांधा था। इसके अलावा यमराज को उनकी बहन यमुना द्वारा राखी बांधने पर अमरत्व का वरदान मिलने और राजा बलि व देवी लक्ष्मी की कथा भी प्रचलित है।
- ऐतिहासिक प्रसंग: मध्यकालीन इतिहास में चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूं को राखी भेजकर सहायता मांगी थी, जिसे स्वीकार करते हुए हुमायूं ने अपनी सेना भेजी थी।
- बंगभंग आंदोलन (1905): आधुनिक भारत में कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ बंगाल में हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के लिए रक्षाबंधन उत्सव का आह्वान किया था।