शहडोल: मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में एक अनाथ युवती की शिकायत के बाद प्रशासन ने पटवारी आशीष सोनकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पटवारी पर जमीन संबंधी काम और जाति प्रमाण-पत्र बनवाने के एवज में रिश्वत मांगने, व्हाट्सऐप पर कथित आपत्तिजनक बातचीत करने और काम के बदले होटल बुलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पटवारी आशीष सोनकर हल्का चांपा में पदस्थ थे और वर्तमान में पतखई/बमुरा हलके का प्रभार संभाल रहे थे।
युवती ने कलेक्टर से की थी शिकायत
जानकारी के मुताबिक, अनाथ युवती ने कलेक्टर शहडोल को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि पटवारी ने जमीन से जुड़े काम और जाति प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए उससे 20 हजार रुपये की मांग की थी। युवती के अनुसार, उसने पटवारी को 15 हजार रुपये नकद दिए थे। शिकायत में युवती ने पटवारी पर व्हाट्सऐप के जरिए कथित आपत्तिजनक बातचीत करने और सरकारी काम कराने के बदले होटल बुलाने का भी आरोप लगाया।
शिकायत के साथ इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी दिए
शिकायतकर्ता ने प्रशासन के सामने कथित व्हाट्सऐप चैट, स्क्रीनशॉट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी प्रस्तुत किए थे। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पटवारी को 24 अगस्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। पटवारी से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब मांगा गया था, लेकिन प्रशासन के अनुसार उन्होंने समय पर अपना जवाब प्रस्तुत नहीं किया।
जवाब नहीं देने पर निलंबन की कार्रवाई
कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं मिलने के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अमृता गर्ग ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम-9 के तहत पटवारी आशीष सोनकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान पटवारी का मुख्यालय तहसील सोहागपुर निर्धारित किया गया है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब मामले में लगाए गए आरोपों की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। फिलहाल पटवारी को निलंबित कर दिया गया है और आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।