भोपाल। साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला राजधानी भोपाल में सामने आया है। कोलार इलाके में साइबर ठगों ने ED, दिल्ली पुलिस और सुप्रीम कोर्ट के नाम का डर दिखाकर 65 वर्षीय बुजुर्ग दंपती को करीब 97 दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट में रखा। ठगों की धमकियों से घबराए दंपती ने अपने जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपये भी उनके बताए खाते में जमा कर दिए। बेटी की सहेली की मदद से आखिरकार फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
दिल्ली पुलिस का अधिकारी बनकर आया पहला कॉल
कोलार के गणपति इन्क्लेव में रहने वाली सुवर्णा लक्ष्मी और उनके पति नरसिम्हा राव के साथ यह ठगी 19 मई से शुरू हुई। सुवर्णा निजी स्कूल का संचालन कर चुकी हैं, जबकि नरसिम्हा राव निजी कंपनी के फाइनेंस विभाग से सेवानिवृत्त हैं। आंध्र प्रदेश स्थित अपने पैतृक गांव में रहने के दौरान सुवर्णा के पास अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का अधिकारी बताया और कहा कि उनके नाम से दिल्ली के केनरा बैंक में खुले खाते से नरेश गोयल से जुड़े मामले में करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है।
वीडियो कॉल पर सुप्रीम कोर्ट की पेशी का डर
ठगों ने दंपती को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट में पेशी कराने की बात कही। इसके बाद उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया। उन्हें धमकाया गया कि मामला बेहद गोपनीय है और किसी को जानकारी देने पर जान का खतरा हो सकता है। दो दिन बाद एक महिला ने खुद को CID की मुख्य जांच अधिकारी निशा पटेल बताया। उसने दंपती से बैंक खातों और संपत्ति से जुड़ी जानकारी ली। इसके बाद कथित सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश से भी उनकी बातचीत कराई गई।
फर्जी आदेश भेजकर 22 लाख जमा कराने का दबाव
9 जून को ठगों ने दंपती को संपत्ति जब्ती का कथित आदेश भेजा। इसके बाद उन्हें FD, सोना-चांदी बेचने या गिरवी रखकर 22 लाख रुपये तत्काल जमा करने के लिए कहा गया। दंपती आंध्र प्रदेश से भोपाल लौटे और 12 जून को कैप्री गोल्ड में अपने जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपये का लोन लिया। इसके बाद रकम ठगों के बताए खाते में जमा कर दी।
22 लाख देने के बाद भी खत्म नहीं हुआ डिजिटल अरेस्ट
रकम जमा करने के बाद भी ठगों ने दंपती को वीडियो कॉल की निगरानी से मुक्त नहीं किया। उन्हें जमानत और दस्तावेज कोलार थाने भेजने की बात कहकर लगातार भ्रमित किया जाता रहा। आखिरकार दंपती की बेटी ने ठगों की ओर से भेजा गया कथित सुप्रीम कोर्ट का आदेश अपनी सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रही सहेली को दिखाया। दस्तावेज की जांच के बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
23 अगस्त को थाने पहुंचा मामला
सच्चाई सामने आने के बाद दंपती ने 23 अगस्त की रात कोलार थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने साइबर ठगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक ट्रांजेक्शन, फोन कॉल और आरोपितों से जुड़े अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
परिवार पढ़ा-लिखा, फिर भी ठगी का शिकार
खास बात यह है कि पीड़ित परिवार में कई लोग उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। दंपती का बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, जबकि बेटी मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही है। परिवार में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट और आपराधिक मामलों की पैरवी करने वाले वकील भी हैं। इसके बावजूद ठगों ने ED, CID और सुप्रीम कोर्ट का डर दिखाकर पूरे परिवार को भरोसे में ले लिया।
डर के बीच उज्जैन में कराई पूजा
नरसिम्हा राव को लगा कि शायद परिवार का बुरा समय चल रहा है। उन्होंने ठगों से कुछ समय की मोहलत मांगी और उज्जैन पहुंचकर महाकाल का अभिषेक कराया। इसके साथ ही ग्रह दोष शांत कराने के लिए विशेष पूजा-अनुष्ठान भी करवाया।
ChatGPT से भी जांचा फर्जी आदेश
पीड़ित ने बताया कि ठगों की ओर से भेजे गए कथित सुप्रीम कोर्ट के आदेश की उन्होंने ChatGPT पर भी जांच की थी। दस्तावेज में सुप्रीम कोर्ट की सील, हस्ताक्षर और अन्य औपचारिकताएं होने के कारण वह पहली नजर में असली जैसा लगा, हालांकि जांच में उसे संदिग्ध और फर्जी बताया गया था।