गुजरात - त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले ही महंगाई का असर लोगों की जेब पर दिखाई देने लगा है। प्याज और चीनी के बाद अब ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। गुजरात और महाराष्ट्र के बाजारों में काजू, बादाम, पिस्ता और किशमिश समेत कई उत्पादों के दाम बढ़े हैं। कुछ बाजारों में कीमतों में 20 से 80 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

पुणे में 15 दिन में ₹300 तक बढ़े भाव
पुणे के गुलटेकडी मार्केट यार्ड में पिछले 15 दिनों के दौरान बादाम, पिस्ता और काजू के दाम ₹100 से ₹300 प्रति किलो तक बढ़े हैं। कारोबारियों के मुताबिक, त्योहारों से पहले मांग बढ़ने के साथ बाजार में आवक कम हुई है। इसके अलावा परिवहन लागत बढ़ने से भी कीमतों पर दबाव आया है।
बादाम के भाव करीब ₹750-1,000 से बढ़कर ₹850-1,200 प्रति किलो हो गए हैं। पिस्ता अब लगभग ₹2,700-3,000 प्रति किलो बिक रहा है, जबकि काजू के दाम ₹900-1,400 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। अलग-अलग क्वालिटी और बाजार के हिसाब से भाव में अंतर हो सकता है।

गुजरात में किशमिश की कीमत में 80% तक उछाल
गुजरात के बाजारों में भी ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की खबर है। रिपोर्ट के अनुसार, किशमिश का भाव ₹250 से बढ़कर करीब ₹450 प्रति किलो हो गया है, यानी लगभग 80 फीसदी की वृद्धि। वहीं बादाम का भाव करीब ₹1,000 से बढ़कर ₹1,200 और पिस्ता ₹1,800 से बढ़कर ₹2,200 प्रति किलो बताया गया है।
क्यों महंगे हो रहे हैं ड्राई फ्रूट्स?
कारोबारियों के मुताबिक कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। प्रमुख उत्पादक देशों में उत्पादन में कमी, घरेलू बाजार में कम आवक, त्योहारों से पहले बढ़ती मांग और परिवहन लागत में इजाफा प्रमुख वजहें हैं। पुणे में बादाम की साप्ताहिक आवक पहले करीब 10-20 टन थी, जो घटकर लगभग 5-10 टन रह गई है। पिस्ते की आवक भी करीब 400-500 किलो से घटकर लगभग 250 किलो प्रति सप्ताह बताई गई है। कुछ अंतरराष्ट्रीय परिवहन मार्गों में व्यवधान के कारण आयातित माल को लंबे वैकल्पिक रास्तों से लाना पड़ रहा है। इससे शिपिंग और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ी है।
त्योहारों की खरीदारी पर पड़ेगा असर
रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान ड्राई फ्रूट्स की मांग बढ़ जाती है। इनका इस्तेमाल मिठाइयों, गिफ्ट पैक और घरों में होने वाली खरीदारी में बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी से परिवारों के त्योहारों के बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
बाजार में कीमतें आगे भी मांग और सप्लाई पर निर्भर रहेंगी। अगर त्योहारों के दौरान मांग और बढ़ती है तथा आवक सामान्य नहीं होती, तो कुछ ड्राई फ्रूट्स के दाम पर दबाव बना रह सकता है। वहीं काजू की घरेलू उत्पादन और आयात से आपूर्ति बेहतर होने के बावजूद मजबूत मांग के कारण इसके भाव में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।