नई दिल्ली। देश के खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। मंगलवार को चीनी का औसत खुदरा भाव करीब 64 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया, जबकि कुछ स्थानों पर यह 76 रुपये प्रति किलो तक बेची गई। सोमवार को चीनी का औसत खुदरा भाव 63.05 रुपये प्रति किलो था। उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रभाग के अनुसार, 25 अगस्त को चीनी की औसत खुदरा कीमत 63.97 रुपये प्रति किलो रही। यह एक महीने पहले के 48.81 रुपये प्रति किलो के मुकाबले करीब 31 फीसदी अधिक है। वहीं, एक साल पहले चीनी का औसत भाव 46.31 रुपये प्रति किलो था।
थोक बाजार में भी बढ़े दाम
थोक बाजार में सोमवार को चीनी का औसत भाव 59.23 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। एक महीने पहले थोक कीमत 45.35 रुपये और एक साल पहले 43.01 रुपये प्रति किलो थी। हालांकि पिछले कुछ दिनों में चीनी की एक्स-मिल कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन इसका असर अभी खुदरा बाजार में पूरी तरह दिखाई नहीं दिया है।
सरकार के फैसले के बाद एक्स-मिल कीमतों में गिरावट
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के अनुसार देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सरकार द्वारा चीनी आयात की अनुमति देने और जमाखोरी व सट्टेबाजी पर रोक लगाने के बाद एक्स-मिल कीमतों में करीब 18 फीसदी की गिरावट आई है। चीनी का मिल भाव अब करीब 55 रुपये प्रति किलो तक आ गया है। पिछले सप्ताह यह रिकॉर्ड 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और गिरावट आएगी।
घरेलू मांग के मुकाबले उत्पादन लगभग बराबर
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 मार्केटिंग ईयर में एथेनॉल के लिए उपयोग के बाद चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है। इस अवधि में शुरुआती स्टॉक करीब 50 लाख टन था, जबकि देश की सालाना घरेलू मांग 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है। सितंबर के अंत तक चीनी का स्टॉक करीब 35 लाख टन रहने का अनुमान जताया गया है। मौजूदा मार्केटिंग ईयर में कुल चीनी उत्पादन करीब 309 लाख टन रहने का अनुमान है।
जमाखोरी रोकने के लिए फ्लाइंग स्क्वाड तैनात
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाईकनवारे ने कहा कि देश के किसी भी राज्य में चीनी की एक्स-मिल कीमत 55 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक नहीं है। उन्होंने बताया कि जमाखोरी और कृत्रिम तरीके से कीमत बढ़ाने की कोशिशों पर रोक लगाने के लिए देशभर में फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए गए हैं।
सरकार ने चीनी आयात के नियमों में दी ढील
चीनी की घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है। हालांकि आयात की खेप भारत पहुंचने में हो रही देरी को देखते हुए सरकार ने नियमों में बदलाव किया है। पहले आयातकों को कच्ची चीनी का प्रसंस्करण कर उसे 31 अक्टूबर तक घरेलू बाजार में बेचने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन चीनी उद्योग ने सरकार को बताया कि यह समयसीमा व्यावहारिक नहीं है। उद्योग ने ब्राजील के बंदरगाहों पर भीड़भाड़ और भारत तक चीनी की खेप पहुंचने में करीब 40 दिन लगने का हवाला दिया। इन परिस्थितियों को देखते हुए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 24 अगस्त को 20 अगस्त की अधिसूचना में संशोधन करते हुए आयातित कच्ची चीनी के प्रसंस्करण और घरेलू बिक्री की समयसीमा बढ़ा दी है। NFCSF के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाईकनवारे ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।